भारत की परमाणु शक्ति पर SIPRI रिपोर्ट से हलचल, पहली बार 12 परमाणु हथियार ‘ऑपरेशनल तैनाती’ में शामिल; पाकिस्तान ने जताई चिंता।

भारत की परमाणु शक्ति पर SIPRI रिपोर्ट से हलचल, पहली बार 12 परमाणु हथियार ‘ऑपरेशनल तैनाती’ में शामिल; पाकिस्तान ने जताई चिंता।

नई दिल्ली/इस्लामाबाद। दक्षिण एशिया की सामरिक राजनीति और परमाणु संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। स्वीडन स्थित प्रतिष्ठित रक्षा एवं शांति अनुसंधान संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने पहली बार अपने कुछ परमाणु हथियारों को केवल भंडारण तक सीमित रखने के बजाय सक्रिय सैन्य तैनाती की श्रेणी में शामिल किया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत के लगभग 190 परमाणु वारहेड्स में से 12 को “ऑपरेशनल रूप से तैनात” माना गया है।

रिपोर्ट के सामने आने के बाद पाकिस्तान ने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए चिंता व्यक्त की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वह भारत की बढ़ती सैन्य क्षमताओं और परमाणु नीति में हो रहे बदलावों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

क्या है SIPRI की रिपोर्ट।

SIPRI दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित रक्षा और हथियार नियंत्रण संबंधी संस्थाओं में से एक मानी जाती है। संस्था हर वर्ष वैश्विक सैन्य शक्ति, हथियारों के भंडार और परमाणु क्षमताओं को लेकर विस्तृत रिपोर्ट जारी करती है।

हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपने परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार भारत ने परमाणु हथियारों को अधिक प्रभावी, त्वरित और सुरक्षित उपयोग के लिए तैयार रखने वाली तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारत की बदलती सुरक्षा आवश्यकताओं और क्षेत्रीय रणनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप देखा जा सकता है। हालांकि भारत सरकार की ओर से इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कैनिस्टराइजेशन’ तकनीक क्या है।

रिपोर्ट में जिस तकनीक का विशेष उल्लेख किया गया है, उसे ‘कैनिस्टराइजेशन’ कहा जाता है। इस प्रणाली में परमाणु वारहेड को पहले से ही मिसाइल प्रणाली में सुरक्षित रूप से सील कर दिया जाता है। इससे आवश्यकता पड़ने पर मिसाइल को बेहद कम समय में लॉन्च किया जा सकता है।

पारंपरिक व्यवस्था में वारहेड और मिसाइल को अलग-अलग रखा जाता था, जबकि कैनिस्टराइजेशन तकनीक त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत बनाती है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रणाली किसी भी देश की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को अधिक प्रभावी बनाती है क्योंकि संकट की स्थिति में हथियारों को सक्रिय करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाता है।

रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भारत अपनी लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को आधुनिक बनाने के लिए इस दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।

पाकिस्तान ने क्या कहा।

SIPRI रिपोर्ट के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत की बढ़ती रणनीतिक क्षमताएं और परमाणु हथियारों की आधुनिक तैनाती क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। पाकिस्तान ने विशेष रूप से भारत की मिसाइल प्रणालियों के आधुनिकीकरण और परमाणु हथियारों की त्वरित तैनाती क्षमता पर चिंता जताई।

इस्लामाबाद का कहना है कि दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन बनाए रखना दोनों देशों की जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की सैन्य बढ़त क्षेत्र में हथियारों की नई दौड़ को जन्म दे सकती है।

हालांकि भारत लंबे समय से अपनी परमाणु नीति को “न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता” और “पहले उपयोग न करने” (No First Use) के सिद्धांतों पर आधारित बताता रहा है।

समुद्र आधारित परमाणु क्षमता पर भी जोर।

रिपोर्ट में भारत की परमाणु-सक्षम पनडुब्बियों और समुद्र आधारित प्रतिरोधक क्षमता का भी उल्लेख किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी परमाणु शक्ति के लिए थल, जल और वायु—तीनों माध्यमों से जवाबी हमला करने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

भारत पिछले कुछ वर्षों में अपनी समुद्री सुरक्षा और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में लगातार निवेश कर रहा है। इससे देश की तथाकथित “न्यूक्लियर ट्रायड” क्षमता को मजबूती मिलती है, जिसके अंतर्गत जमीन, समुद्र और हवा तीनों प्लेटफॉर्म से परमाणु हथियार ले जाने और लॉन्च करने की क्षमता शामिल होती है।

दक्षिण एशिया में बढ़ सकती है रणनीतिक प्रतिस्पर्धा।

रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपनी-अपनी सुरक्षा चुनौतियों के कारण सैन्य आधुनिकीकरण पर लगातार जोर दे रहे हैं। ऐसे में SIPRI जैसी संस्थाओं की रिपोर्टें क्षेत्रीय सुरक्षा पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत की बढ़ती आर्थिक और तकनीकी शक्ति उसे उन्नत रक्षा प्रणालियों के विकास में मदद कर रही है, जबकि पाकिस्तान भी अपनी रणनीतिक क्षमताओं को बनाए रखने के प्रयासों में जुटा हुआ है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सामरिक प्रतिस्पर्धा आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण विषय बनी रह सकती है।

वैश्विक स्तर पर भी बढ़ रही चिंता।

SIPRI की रिपोर्ट केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है। संस्था ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि दुनिया की प्रमुख परमाणु शक्तियां लगातार अपने हथियारों का आधुनिकीकरण कर रही हैं। इससे वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियार नियंत्रण और सामरिक स्थिरता को लेकर नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं।

दक्षिण एशिया के संदर्भ में यह रिपोर्ट इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं और दोनों के बीच लंबे समय से सामरिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। ऐसे में भारत की परमाणु क्षमता को लेकर सामने आए नए आकलनों ने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक समुदाय का ध्यान एक बार फिर इस क्षेत्र की ओर आकर्षित कर दिया है।

फिलहाल SIPRI की रिपोर्ट को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है, जबकि पाकिस्तान की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को और अधिक सुर्खियों में ला दिया है।

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