4 वर्षीय भांजे की हत्या के दोषी मामा को फांसी, अदालत में बोला- “छोड़ोगे तो फिर हत्या करूंगा”
गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में चार वर्षीय मासूम भांजे की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने दोषी मामा को फांसी की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायालय के इस फैसले ने न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया, बल्कि अदालत में सुनवाई के दौरान हुई बातचीत ने भी सभी को स्तब्ध कर दिया। न्यायाधीश द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में दोषी ने कहा कि यदि उसे छोड़ दिया जाए तो वह फिर हत्या करेगा। इसके बाद अदालत ने मामले को “दुर्लभतम से भी दुर्लभ” (Rarest of Rare) श्रेणी का अपराध मानते हुए मृत्युदंड सुनाया।

चार साल पुराने मामले में आया फैसला।
यह मामला लगभग चार वर्ष पुराना है। जानकारी के अनुसार गाजीपुर जिले में रहने वाले अमजद खान का अपनी बड़ी बहन से किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। मामूली कहासुनी और पारिवारिक विवाद ने इतना भयावह रूप ले लिया कि अमजद ने अपनी ही बहन के चार वर्षीय बेटे को निशाना बना लिया।
आरोप है कि गुस्से में आकर अमजद खान ने अपने मासूम भांजे की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी थी। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। एक मासूम बच्चे की इतनी बेरहमी से हत्या ने लोगों को झकझोर कर रख दिया था।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
सुनवाई के दौरान पेश हुए मजबूत साक्ष्य।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। जांच में जुटाए गए सबूतों और प्रत्यक्ष परिस्थितियों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना।
अभियोजन पक्ष का कहना था कि आरोपी ने पूरी तरह सुनियोजित और क्रूर तरीके से मासूम बच्चे की जान ली। इस अपराध में न केवल एक निर्दोष बच्चे की हत्या हुई, बल्कि पारिवारिक रिश्तों की मर्यादा भी तार-तार हो गई।
अदालत ने मामले से जुड़े सभी तथ्यों, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का गहन अध्ययन करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया।
अदालत में हुआ चौंकाने वाला संवाद।
फैसला सुनाए जाने से पहले अदालत में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने मौजूद लोगों को हैरान कर दिया। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार, सजा तय करने से पहले न्यायाधीश शक्ति सिंह ने दोषी अमजद खान से पूछा कि यदि उसे रिहा कर दिया जाए तो वह क्या करेगा।
बताया गया कि इस सवाल के जवाब में अमजद खान ने कहा, “हत्या करूंगा।”
दोषी के इस जवाब से अदालत भी हैरान रह गई। इसके बाद न्यायाधीश ने उससे दूसरा सवाल किया कि क्या उसे अपने किए पर कोई पछतावा है।
इस पर आरोपी ने कथित तौर पर जवाब दिया कि उसे अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं है।
अदालत ने आरोपी के इस रवैये, अपराध की प्रकृति और मासूम बच्चे की नृशंस हत्या को देखते हुए इसे अत्यंत गंभीर अपराध माना।
‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में रखा गया मामला।
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि चार वर्षीय मासूम बच्चे की निर्मम हत्या समाज को झकझोर देने वाला अपराध है। ऐसे मामलों में केवल आजीवन कारावास पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा कि यह अपराध “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में आता है, जहां समाज और न्याय व्यवस्था के हित में कठोरतम दंड आवश्यक हो जाता है। इसी आधार पर दोषी अमजद खान को फांसी की सजा सुनाई गई।
भारतीय न्याय व्यवस्था में मृत्युदंड केवल उन्हीं मामलों में दिया जाता है जिन्हें अत्यंत जघन्य और असाधारण माना जाता है। अदालत ने माना कि यह मामला उन्हीं परिस्थितियों में आता है।
पीड़ित परिवार ने फैसले का किया स्वागत।
अदालत का फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली। परिवार के सदस्यों ने कहा कि चार साल से वे न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे और अब अदालत के फैसले से उन्हें संतोष मिला है।
परिजनों का कहना है कि मासूम बच्चे की हत्या ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया था। अदालत का फैसला उनके लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला समाज को एक स्पष्ट संदेश देता है कि मासूम बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराध करने वालों के प्रति कानून कोई नरमी नहीं बरतेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रिश्तों की आड़ में किए गए ऐसे अपराधों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

गाजीपुर की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि न्यायालय अपराध की गंभीरता और अपराधी के आचरण को ध्यान में रखते हुए कठोरतम सजा देने से पीछे नहीं हटता। मासूम भांजे की हत्या के दोषी मामा को मिली फांसी की सजा अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है।
JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।