72 घंटे की जंग के बाद मासूम ऋषभ की सकुशल वापसी, IPS अंशिका वर्मा की अगुवाई में पुलिस ने रचा ऑपरेशन का इतिहास।
गर्लफ्रेंड के महंगे शौक पूरे करने के लिए किया था अपहरण, महज 60 हजार रुपये में बेच दिया मासूम; 25 जांबाज सिपाहियों की टीम ने चलाया सफल ऑपरेशन।

बरेली। कहते हैं कि जब लालच इंसान पर हावी हो जाता है तो वह इंसानियत की सारी सीमाएं भूल जाता है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला बरेली में सामने आया, जहां पैसों की लालसा और ऐशो-आराम की जिंदगी जीने की चाहत ने एक युवक को इतना अंधा बना दिया कि उसने एक मासूम बच्चे का अपहरण कर लिया। इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि पूरे इलाके को भी झकझोर कर रख दिया। हालांकि बरेली पुलिस की सतर्कता, मेहनत और सूझबूझ के चलते 72 घंटे के अंदर मासूम बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया गया और आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया।

जानकारी के अनुसार 24 मई को बरेली के एक मंदिर में सफाई का कार्य करने वाले अमन का मासूम बेटा ऋषभ अपने घर के बाहर खेल रहा था। परिवार के लोग अपने-अपने काम में व्यस्त थे। इसी दौरान अचानक ऋषभ लापता हो गया। काफी देर तक जब बच्चा दिखाई नहीं दिया तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। देखते ही देखते परिवार की चिंता बढ़ती चली गई और पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

बच्चे के गायब होने की सूचना मिलते ही पुलिस भी सक्रिय हो गई। परिवार की हालत बेहद खराब थी। मां का रो-रोकर बुरा हाल था, जबकि पिता हर संभावित जगह पर अपने बेटे को ढूंढ़ने की कोशिश कर रहे थे। हर गुजरता पल परिवार के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं था।
पुलिस जांच में जो खुलासा हुआ, उसने सभी को हैरान कर दिया। पता चला कि शाहजहांपुर निवासी योगेश, जिसने नर्सिंग की पढ़ाई की थी, अपनी गर्लफ्रेंड के महंगे शौक पूरे करने और जल्दी पैसा कमाने की चाहत में अपराध की राह पर चल पड़ा। उसने अपने साथी पवन सिंह के साथ मिलकर मासूम ऋषभ का अपहरण कर लिया। आरोपियों ने बच्चे को महज 60 हजार रुपये में बेचने की योजना बनाई थी। यह जानकर हर कोई स्तब्ध रह गया कि एक मासूम की जिंदगी की कीमत अपराधियों ने सिर्फ 60 हजार रुपये लगाई थी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए SP साउथ IPS अंशिका वर्मा ने स्वयं मामले की कमान संभाली। उन्होंने तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया, जिसमें 25 चुनिंदा और जांबाज पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया। पुलिस ने बच्चे की तलाश के लिए दिन-रात एक कर दिए। मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से लगातार सुराग जुटाए जाते रहे।
ऑपरेशन के दौरान पुलिस की पांच अलग-अलग टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं। एक टीम सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही थी, दूसरी मोबाइल डेटा का विश्लेषण कर रही थी, जबकि अन्य टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी में जुटी थीं। पुलिस ने कई जिलों में दबिश दी और हर छोटी-बड़ी जानकारी को गंभीरता से जांचा।

72 घंटे तक लगातार चले इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन के बाद 27 मई की सुबह पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी। तकनीकी साक्ष्यों और खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की लोकेशन ट्रेस कर ली। इसके बाद पांच टीमों ने एक साथ घेराबंदी कर कार्रवाई की। पुलिस को देखते ही आरोपी भागने लगे और बचने के लिए प्रयास करने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपी घायल हो गए और पुलिस की गिरफ्त में आ गए।
इस पूरे अभियान का सबसे सुखद और भावुक क्षण तब आया, जब पुलिस ने एक स्थान से डरे-सहमे बैठे मासूम ऋषभ को सकुशल बरामद कर लिया। कई दिनों से अपने परिवार से दूर रहने के कारण बच्चा सहमा हुआ था, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसे प्यार और सुरक्षा का एहसास दिलाया। बच्चे के सुरक्षित मिलने की खबर मिलते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।
बरामदगी के बाद जब IPS अंशिका वर्मा ने मासूम ऋषभ को अपनी गोद में उठाया और उसे स्नेहपूर्वक दुलारा, तो वह दृश्य हर किसी को भावुक कर गया। यह सिर्फ एक पुलिस अधिकारी और बच्चे की तस्वीर नहीं थी, बल्कि यह उस संवेदनशील पुलिस व्यवस्था की तस्वीर थी, जो जनता की सुरक्षा के लिए दिन-रात समर्पित रहती है। यह दृश्य एक मां की लौटती मुस्कान, एक पिता की पूरी हुई प्रार्थना और एक परिवार की वापस लौटी खुशियों का प्रतीक बन गया।
आज ऋषभ सुरक्षित अपने परिवार के बीच है। घर में फिर से हंसी-खुशी का माहौल है और मां की सूनी गोद फिर से आबाद हो चुकी है। वहीं इस घटना ने समाज को भी एक बड़ा संदेश दिया है कि अपराध चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के लंबे हाथ आखिरकार अपराधियों तक पहुंच ही जाते हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है और आरोपियों से पूछताछ कर अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। वहीं स्थानीय लोगों ने भी बरेली पुलिस और विशेष रूप से IPS अंशिका वर्मा की कार्यशैली की जमकर सराहना की है।
यह पूरा ऑपरेशन पुलिस की तत्परता, तकनीकी दक्षता और मानवीय संवेदनाओं का शानदार उदाहरण बनकर सामने आया है। 72 घंटे तक चली इस जंग में जीत सिर्फ पुलिस की नहीं, बल्कि न्याय, उम्मीद और इंसानियत की हुई है। मासूम ऋषभ की सुरक्षित वापसी ने यह साबित कर दिया कि जब पुलिस पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ काम करती है, तो असंभव लगने वाले मिशन भी सफल हो जाते हैं।

IPS अंशिका वर्मा और उनकी पूरी टीम को इस सराहनीय कार्य के लिए सलाम, जिन्होंने एक परिवार की दुनिया उजड़ने से बचा ली और समाज में कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास को और मजबूत किया।
JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।