स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण में सख्ती: एक भी बच्चा छूटा तो प्रधानाध्यापक पर होगी कार्रवाई।

स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण में सख्ती: एक भी बच्चा छूटा तो प्रधानाध्यापक पर होगी कार्रवाई।

1 जुलाई से शुरू होगा अभियान का दूसरा चरण, 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश।

जनपद न्यूज 24 यूपी | विशेष रिपोर्ट।

प्रदेश में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने और प्रत्येक बच्चे को विद्यालय से जोड़ने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘स्कूल चलो अभियान’ के दूसरे चरण को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि विद्यालय जाने योग्य आयु का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। यदि किसी विद्यालय क्षेत्र में कोई पात्र बच्चा नामांकन से छूट जाता है या अगली कक्षा में उसका प्रवेश नहीं कराया जाता है, तो संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 1 जुलाई से स्कूल चलो अभियान का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा। इस चरण का मुख्य उद्देश्य 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा विद्यालय से जोड़ने तथा कक्षा 5, 8 और 10 उत्तीर्ण छात्रों का अगली कक्षा में प्रवेश सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

नामांकन की जिम्मेदारी सीधे प्रधानाध्यापकों पर।

शिक्षा विभाग ने अभियान की सफलता के लिए विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों की जिम्मेदारी तय कर दी है। अब यदि किसी क्षेत्र में कोई बच्चा विद्यालय में प्रवेश से वंचित रह जाता है, तो उसकी जवाबदेही सीधे संबंधित प्रधानाध्यापक की मानी जाएगी।

विभाग का मानना है कि कई बार बच्चों के विद्यालय छोड़ने या अगली कक्षा में प्रवेश न लेने की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती, जिससे शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य प्रभावित होता है। इसे रोकने के लिए अब जवाबदेही तय कर दी गई है।

किसकी क्या जिम्मेदारी।

विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार विभिन्न कक्षाओं के छात्रों के प्रवेश की जिम्मेदारी निम्न प्रकार से निर्धारित की गई है—

कक्षा 5 उत्तीर्ण छात्र : उन्हें कक्षा 6 में प्रवेश दिलाने की जिम्मेदारी संबंधित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक की होगी।

कक्षा 8 उत्तीर्ण छात्र : उनका कक्षा 9 में प्रवेश सुनिश्चित कराने का दायित्व उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक का होगा।

कक्षा 10 उत्तीर्ण छात्र : उनका कक्षा 11 में प्रवेश सुनिश्चित कराना माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी होगी।

यदि किसी छात्र का अगली कक्षा में प्रवेश नहीं होता है, तो इसकी समीक्षा की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी या प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

घर-घर जाकर होगा सर्वे।

बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को निर्देश दिए हैं कि शिक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर सर्वेक्षण करें। इस दौरान ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी जो स्कूल नहीं जा रहे हैं, पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं या किसी कारणवश अगली कक्षा में प्रवेश नहीं ले पाए हैं।

सर्वेक्षण के दौरान शिक्षकों को अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित करने की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभाग का मानना है कि कई बार आर्थिक, सामाजिक या पारिवारिक कारणों से बच्चे शिक्षा से दूर हो जाते हैं, जिन्हें समय रहते मुख्यधारा में वापस लाना आवश्यक है।

प्रतिदिन होगी प्रगति की समीक्षा।

शिक्षा विभाग ने अभियान की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था की है। नामांकन और प्रवेश की प्रगति की रोजाना समीक्षा की जाएगी। विद्यालयवार रिपोर्ट तैयार की जाएगी और यह देखा जाएगा कि कितने नए बच्चों का नामांकन हुआ तथा कितने ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा विद्यालय से जोड़ा गया।

यदि किसी विद्यालय क्षेत्र में कोई पात्र बच्चा छूट जाता है या उसका प्रवेश नहीं कराया जाता है, तो संबंधित प्रधानाध्यापक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इससे अभियान को गंभीरता से लागू कराने में मदद मिलेगी।

जनसहयोग से सफल होगा अभियान।

स्कूल चलो अभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षा विभाग केवल शिक्षकों पर ही निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, ग्राम प्रधानों, विद्यालय प्रबंधन समितियों (एसएमसी) के सदस्यों और अभिभावकों का भी सहयोग लिया जाएगा।

विभाग का मानना है कि सामुदायिक भागीदारी के बिना शत-प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य हासिल करना कठिन है। इसलिए सभी संबंधित पक्षों को बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक करने और विद्यालयों से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे।

सरकार का लक्ष्य: शिक्षा से न छूटे कोई बच्चा।

प्रदेश सरकार की मंशा है कि “एक भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे”। इसी उद्देश्य के तहत स्कूल चलो अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। शिक्षा विभाग का कहना है कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिले और वह देश के विकास में अपनी भूमिका निभा सके, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

अभियान के दूसरे चरण में सख्ती बढ़ने से उम्मीद की जा रही है कि विद्यालयों में नामांकन दर में वृद्धि होगी और ड्रॉपआउट बच्चों की संख्या में कमी आएगी। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय होने से विद्यालय प्रशासन भी अधिक सक्रिय भूमिका निभाएगा।

JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।

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