मुस्लिम युवक से शादी के बाद पिता ने जीवित बेटी का किया पिंडदान, आजीवन संबंध खत्म करने की घोषणा
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से पारिवारिक रिश्तों, अंतरधार्मिक विवाह और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा एक असामान्य मामला सामने आया है। धरमपुरा क्रमांक-3 क्षेत्र में रहने वाले सुजान दत्ता ने अपनी जीवित बेटी का हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पिंडदान किया। परिवार के मुताबिक, बेटी के दूसरे धर्म के युवक से विवाह और कथित धर्म परिवर्तन के बाद पिता इस फैसले से बेहद आहत थे। घटना 20 सितंबर को हुई और इसके बाद पिता ने सार्वजनिक रूप से बेटी से आजीवन पारिवारिक संबंध समाप्त करने की घोषणा भी की।
रिपोर्टों के अनुसार, सुजान दत्ता पेशे से श्रमिक हैं। परिवार का कहना है कि उनकी बेटी सिमरन दत्ता ने करीब दो महीने पहले एक मुस्लिम युवक से पंजीकृत विवाह किया था। परिवार के मुताबिक विवाह के साथ धर्म परिवर्तन भी हुआ। परिजनों का कहना है कि उन्होंने बेटी को अपने फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपने निर्णय पर कायम रही। इसके बाद पिता ने बेटी से संबंध खत्म करने का फैसला लिया।
मंत्रोच्चार के बीच किया पिंडदान
20 सितंबर को सुजान दत्ता ने अपने घर पर धार्मिक अनुष्ठान कराया। पंडितों की मौजूदगी में मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने सिर मुंडवाया और बेटी का पिंडदान किया। सामान्य तौर पर पिंडदान मृत्यु के बाद किए जाने वाले धार्मिक संस्कारों से जुड़ा होता है, लेकिन इस मामले में पिता ने अपनी जीवित बेटी के लिए यह रस्म निभाई।

रिपोर्टों के अनुसार, पिंडदान के साथ ही सुजान दत्ता ने सार्वजनिक घोषणा की कि अब उनका बेटी के साथ आजीवन कोई पारिवारिक संबंध नहीं रहेगा। परिवार की ओर से इस फैसले को बेटी के विवाह और धर्म परिवर्तन के प्रति गहरी नाराजगी और भावनात्मक पीड़ा से जोड़कर बताया गया है।
परिवार का कहना—समझाने की कोशिश की गई
परिवार के सदस्यों के मुताबिक, बेटी के दूसरे धर्म में विवाह करने के फैसले के बाद उसे समझाने की कई कोशिशें की गई थीं। परिजनों का कहना है कि परिवार चाहता था कि बेटी अपने फैसले पर पुनर्विचार करे, लेकिन जब उसने अपना निर्णय नहीं बदला तो पिता ने उससे संबंध समाप्त करने का कठोर फैसला लिया।
परिवार के लिए यह फैसला भावनात्मक रूप से बेहद कठिन बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों में परिवार की ओर से कहा गया है कि पिता ने बेटी को अपनी जिंदगी से अलग करने के प्रतीक के तौर पर पिंडदान की रस्म निभाई। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी इसकी चर्चा शुरू हो गई है।
‘लव जिहाद’ का भी लगाया आरोप
इस पूरे मामले को परिवार और कुछ सामाजिक लोगों की ओर से ‘लव जिहाद’ से जोड़कर देखा गया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इसे परिवार की ओर से लगाए गए आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है। यह स्पष्ट नहीं है कि विवाह और धर्म परिवर्तन के पीछे किसी तरह की साजिश या जबरदस्ती थी।
मामले की रिपोर्टिंग में यह अंतर बनाए रखना महत्वपूर्ण है कि एक ओर परिवार की आपत्ति और आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर उपलब्ध जानकारी में संबंधित बेटी का विस्तृत पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी भी पहुंचे
पिंडदान की जानकारी सामने आने के बाद निखिल भारत बंगाली समन्वय समिति, बस्तर संभाग से जुड़े कुछ पदाधिकारी भी सुजान दत्ता के घर पहुंचे। रिपोर्टों के मुताबिक, समिति के अध्यक्ष जीवानंद हालदार, प्रदीप गुहा सहित अन्य पदाधिकारियों ने परिवार से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। कुछ सामाजिक प्रतिनिधियों ने परिवार के फैसले का समर्थन भी किया।
समाज से जुड़े लोगों ने बच्चों को अपनी परंपरा, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, इस घटना ने अंतरधार्मिक विवाह, धर्म परिवर्तन, पारिवारिक स्वीकृति और व्यक्तिगत निर्णयों को लेकर सामाजिक बहस को भी सामने ला दिया है।
रिश्तों और व्यक्तिगत फैसलों को लेकर चर्चा
जगदलपुर की यह घटना केवल एक परिवार तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि इसके जरिए परिवार की धार्मिक-सामाजिक मान्यताओं और किसी वयस्क व्यक्ति के निजी जीवन से जुड़े फैसलों के बीच टकराव का मुद्दा भी चर्चा में आया है। एक तरफ परिवार अपनी धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं के आधार पर बेटी के फैसले से असहमति जता रहा है, वहीं दूसरी तरफ अंतरधार्मिक विवाह और व्यक्तिगत पसंद जैसे विषय भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन गए हैं।
पिता द्वारा जीवित बेटी का पिंडदान किए जाने की घटना इसलिए भी असामान्य मानी जा रही है क्योंकि पिंडदान सामान्यतः दिवंगत व्यक्ति से जुड़े धार्मिक संस्कार के रूप में किया जाता है। इस मामले में पिता ने इसे बेटी से सामाजिक और पारिवारिक संबंध खत्म करने के प्रतीक के रूप में किया।
फिलहाल चर्चा में बना हुआ है मामला
जगदलपुर के धरमपुरा क्षेत्र की यह घटना 20 सितंबर के बाद से चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिता ने अपनी बेटी के विवाह और कथित धर्म परिवर्तन से असहमति जताते हुए पिंडदान किया और आजीवन संबंध विच्छेद की घोषणा की। इस मामले में फिलहाल किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि जब परिवार की धार्मिक-सामाजिक मान्यताओं और किसी सदस्य के व्यक्तिगत जीवन के फैसले में टकराव हो, तो रिश्तों पर उसका कितना गहरा प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल जगदलपुर का यह मामला स्थानीय स्तर से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

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