बदायूं में विकास की कीमत! NH 530B के लिए 5600 पेड़ों की कटाई, गर्मी और प्रदूषण बढ़ने का खतरा।

हाईवे के नाम पर हरियाली खत्म: बदायूं में 5600 पेड़ों पर चला आरा, गर्मी और धूल से लोग बेहाल।

उझानी (बदायूं), 4 मई:बरेली-मथुरा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 530B) को फोरलेन बनाने की तेज रफ्तार ने बदायूं जिले की दशकों पुरानी हरियाली को निगल लिया है। उझानी से कछला के बीच सड़क किनारे खड़े घने जामुन, नीम और शीशम के करीब 5600 पेड़ों पर आरा चल चुका है, जिससे पूरा इलाका अब धूल, गर्मी और वीरानी की चपेट में आ गया है।जहां कभी यह सड़क ‘ग्रीन कवर’ की तरह यात्रियों को छाया और ठंडक देती थी, अब वहां सिर्फ मिट्टी के ढेर, कटे पेड़ों के ठूंठ और मशीनों का शोर दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इन पेड़ों की वजह से गर्मियों में हाईवे का तापमान आसपास के इलाकों से 3 से 4 डिग्री तक कम रहता था, लेकिन अब मई की दोपहर में सड़क तवे की तरह तपने लगी है।इतना ही नहीं, पेड़ों की कटाई से पर्यावरण पर भी गहरा असर पड़ा है। जामुन और नीम के पेड़ों पर रहने वाले तोते, मैना और नीलकंठ जैसे पक्षी अब इस क्षेत्र से लगभग गायब हो गए हैं। पेड़ों की आड़ खत्म होने से धूल अब सीधे गांवों तक पहुंच रही है, जिससे लोगों को सांस संबंधी परेशानियों का खतरा भी बढ़ गया है।वहीं, NHAI अधिकारियों का कहना है कि बदायूं से कछला तक बनने वाला यह हाईवे करीब 1,527 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा है, जिसकी चौड़ाई 48 मीटर होगी और इसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों का दावा है कि काटे गए हर पेड़ के बदले 10 गुना यानी लगभग 56,000 पौधे लगाए जाएंगे।हालांकि, पर्यावरणविद इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि 50 साल पुराने पेड़ों की भरपाई छोटे पौधों से संभव नहीं है, क्योंकि नए पौधों को बड़ा होने में 15 से 20 साल का समय लगेगा। तब तक कार्बन सोखने, तापमान कम करने और बारिश के संतुलन को बनाए रखने वाला पूरा इकोसिस्टम खत्म हो सकता है।फिलहाल, मौके पर पुरानी सड़क को तोड़ दिया गया है और दोनों तरफ पेड़ों के ठूंठ व मलबे के ढेर नजर आ रहे हैं। कछला के आसपास कई ढाबे और मकान भी जद में आकर टूट चुके हैं। मानसून से पहले काम तेजी से पूरा करने के लिए निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।

नवीन गोस्वामी बदायूं उत्तर प्रदेश

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