
सोमनाथ सिर्फ मंदिर नहीं, भारत की आत्मा है: प्रधानमंत्री मोदी ने लेख में बताया सभ्यता, साहस और पुनर्जागरण का प्रतीक।
PM मोदी की कलम से ‘सोमनाथ’: आक्रमणों के बावजूद नहीं टूटा भारत का आत्मबल, मंदिर बना सनातन स्वाभिमान का प्रतीक।
प्रधानमंत्री मोदी की कलम से: ‘सोमनाथ’ भारत के स्वाभिमान और सनातन चेतना का प्रतीकनई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर को भारत की संस्कृति, आत्मबल और सनातन चेतना का प्रतीक बताते हुए भावनात्मक लेख लिखा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के अटूट संकल्प और आत्मविश्वास का जीवंत प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में लिखा कि सोमनाथ के सामने लहराता विशाल समुद्र मानव को यह संदेश देता है कि चाहे कितने भी बड़े तूफान क्यों न आएं, साहस और आत्मबल के दम पर फिर से खड़ा हुआ जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सदियों के आक्रमण और संघर्ष के बावजूद सोमनाथ की आस्था कभी समाप्त नहीं हुई।उन्होंने उल्लेख किया कि हमारे प्राचीन ग्रंथों में भी प्रभास क्षेत्र और सोमनाथ का विशेष महत्व बताया गया है।
यह केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक निरंतरता और सनातन परंपरा का प्रतीक है।प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026 की शुरुआत में उन्हें सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होने का अवसर मिला था।
अब 11 मई को पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर फिर वहां जाने का अवसर प्राप्त हो रहा है।उन्होंने कहा कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा मंदिर लोकार्पण का ऐतिहासिक क्षण भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक था।
सोमनाथ का इतिहास विनाश से पुनर्निर्माण तक भारत की अटूट चेतना और संघर्षशीलता की कहानी कहता है।प्रधानमंत्री मोदी का यह लेख सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।