उत्तर प्रदेश के गंगेश्वरी विकास खंड के देहरी गुर्जर गांव की नौ वर्षीय मासूम बच्ची माही इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। महज 36 सेकेंड के एक वीडियो में माही ने हाथ जोड़कर जिला प्रशासन से ऐसी अपील की है, जिसने लाखों लोगों के दिल को छू लिया।माही का कहना है — “डीएम मैम, किताबों के दाम बहुत ज्यादा हैं, इन्हें कम करवा दीजिए, क्योंकि हर मां-बाप अमीर नहीं होते।” यह एक साधारण वाक्य नहीं, बल्कि उस सच्चाई की आवाज है जिससे आज देश के लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार जूझ रहे हैं।माही के पिता सोहित कुमार भूमिहीन मजदूर हैं, जो दिनभर कड़ी मेहनत करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनकी कमाई इतनी सीमित है कि घर का खर्च चलाना ही मुश्किल हो जाता है, ऐसे में बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना किसी पहाड़ से कम नहीं।नए शिक्षा सत्र की शुरुआत में माही के स्कूल से ही किताबें दी गईं, जिनकी कीमत 3,100 रुपये बताई गई। यह रकम एक मजदूर परिवार के लिए बहुत बड़ी है, जिसे अभी तक चुकाया नहीं जा सका है। पिता के चेहरे की चिंता और घर की तंगी को देखकर माही ने जो कदम उठाया, वह उसकी समझदारी और संवेदनशीलता को दर्शाता है।माही का बड़ा भाई पंछी भी पढ़ाई के लिए अपने मामा के घर गजरौला में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहा है, जिससे परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव और बढ़ गया है।इस पूरे मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने कहा है कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है और संबंधित स्कूल प्रबंधन से भी बातचीत की जाएगी।माही की यह मासूम अपील केवल एक बच्ची की गुहार नहीं, बल्कि उन सभी परिवारों की आवाज है जो अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए हर दिन संघर्ष कर रहे हैं। यह घटना शिक्षा व्यवस्था और बढ़ती महंगाई पर भी कई सवाल खड़े करती है—क्या शिक्षा अब हर किसी के लिए सुलभ रह गई है या फिर यह भी धीरे-धीरे महंगी होती जा रही है?माही ने बिना किसी गुस्से और शिकायत के, सिर्फ अपने शब्दों से समाज और सिस्टम के सामने एक बड़ा सवाल रख दिया है—क्या गरीब का बच्चा पढ़ नहीं सकता?
👉 अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मासूम अपील पर क्या कदम उठाता है और क्या माही जैसी हजारों बच्चियों को राहत मिल पाती है या नहीं। जनपद न्यूज़ 24 यूपी ऐसे ही आवाज उठाता रहेगा और सच्चाई आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत करता रहेगा
