उझानी में संतोषी माता मंदिर से कल्याण चौक तक कांवड़ मार्ग बदहाल, सावन से पहले गड्ढा मुक्त सड़क के दावों की खुली पोल।

उझानी में संतोषी माता मंदिर से कल्याण चौक तक कांवड़ मार्ग बदहाल, सावन से पहले गड्ढा मुक्त सड़क के दावों की खुली पोल।

उझानी (बदायूं)। सावन माह में चल रही कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कांवड़ मार्गों को गड्ढामुक्त, स्वच्छ और सुरक्षित बनाए जाने के दावे किए गए थे। संबंधित विभागों को समय रहते सड़क मरम्मत, साफ-सफाई और जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए थे। लेकिन उझानी नगर में संतोषी माता मंदिर से कल्याण चौक तक का कांवड़ मार्ग इन दावों की वास्तविकता बयां करता नजर आ रहा है। इस पूरे मार्ग पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, जलभराव और टूटी सड़कें श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं।

सावन शुरू होने से पहले प्रशासन की ओर से कांवड़ मार्गों को गड्ढामुक्त किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन धरातल पर स्थिति बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। संतोषी माता मंदिर से लेकर कल्याण चौक तक सड़क पर कई स्थानों पर गड्ढे बने हुए हैं, जिनमें बारिश का पानी भर जाने से उनकी गहराई दिखाई नहीं देती। ऐसे में इस मार्ग से गुजरने वाले कांवड़ियों और आम राहगीरों के सामने हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

यह मार्ग कांवड़ यात्रा के दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में शिवभक्त इसी रास्ते से गुजरते हैं। कंधों पर पवित्र गंगाजल लेकर पैदल चल रहे श्रद्धालुओं को गंदे पानी और कीचड़ के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है। कई स्थानों पर जलभराव इतना अधिक है कि लोगों को सड़क छोड़कर किनारे से गुजरने की कोशिश करनी पड़ती है, जिससे दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति कोई नई समस्या नहीं है। लंबे समय से मार्ग पर गड्ढे बने हुए हैं और बारिश के बाद स्थिति और भी खराब हो गई है। यदि सावन शुरू होने से पहले सड़क की मरम्मत कर दी जाती और जल निकासी की उचित व्यवस्था बना दी जाती तो आज शिवभक्तों को इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि पानी से भरे गड्ढों का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है। पैदल चल रहे कांवड़िए कभी भी फिसल सकते हैं या चोटिल हो सकते हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी यह मार्ग जोखिम भरा बना हुआ है। यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार द्वारा कांवड़ यात्रा को लेकर व्यापक तैयारियों के निर्देश दिए गए थे। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि किसी भी कांवड़ मार्ग पर गड्ढे न रहें और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके बावजूद उझानी के इस महत्वपूर्ण मार्ग की बदहाल स्थिति संबंधित विभागों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का विषय है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और स्वच्छ मार्ग उपलब्ध कराया जाए। लेकिन वर्तमान हालात देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार विभागों ने इस मार्ग की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।

व्यापारियों का कहना है कि सड़क पर लगातार जलभराव रहने से ग्राहकों को भी दिक्कत होती है। दुकानों तक पहुंचने में परेशानी होती है और वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। बारिश के बाद सड़क पर फैली गंदगी और कीचड़ से पूरे क्षेत्र का वातावरण प्रभावित हो रहा है।

नगरवासियों ने जिला प्रशासन, नगर पालिका परिषद और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि संतोषी माता मंदिर से कल्याण चौक तक पूरे कांवड़ मार्ग का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। सड़क पर बने गड्ढों को तत्काल भरवाया जाए, जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए और मार्ग को सुरक्षित बनाया जाए, ताकि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

लोगों का कहना है कि प्रशासनिक दावे तभी सार्थक होंगे जब उनका असर धरातल पर भी दिखाई देगा। केवल कागजों पर गड्ढामुक्त सड़कें घोषित कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। आवश्यकता इस बात की है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लें और तत्काल प्रभाव से आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें।

कांवड़ यात्रा अभी जारी है और आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में यदि समय रहते इस मार्ग की मरम्मत नहीं कराई गई तो परेशानी और बढ़ सकती है। स्थानीय नागरिकों और शिवभक्तों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द संज्ञान लेकर इस महत्वपूर्ण कांवड़ मार्ग को दुरुस्त कराएगा, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित, सुगम और श्रद्धा के अनुरूप सम्मानजनक ढंग से पूरी हो सके।

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