उझानी में क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर पर रिश्वत मांगने का आरोप।

उझानी में क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर पर रिश्वत मांगने का आरोप, नगर पालिका लिपिक ने SSP से लगाई सुरक्षा की गुहार

फर्जी मार्कशीट मामले की जांच के बीच नया विवाद, लिपिक का आरोप– “50 हजार रुपये नहीं दिए तो फंसा देने की धमकी”

उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद की उझानी नगर पालिका में फर्जी मार्कशीट प्रकरण की जांच अब नए विवादों में घिरती नजर आ रही है। नगर पालिका के एक लिपिक ने क्राइम ब्रांच प्रभारी निरीक्षक और कोतवाली में तैनात एक दीवान पर गंभीर आरोप लगाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है। आरोप है कि जांच के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग की गई और रुपये न देने पर “लंबा नाप देने” तथा “झंझट में फंसा देने” जैसी धमकियां दी गईं।

उझानी में क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर पर रिश्वत मांगने का आरोप।

यह मामला उस समय और अधिक चर्चा में आ गया जब शिकायतकर्ता लिपिक ने अपनी सुरक्षा की गुहार लगाते हुए पूरे घटनाक्रम को लिखित रूप में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को सौंप दिया। शिकायत सामने आने के बाद नगर पालिका कर्मचारियों में भी हलचल मच गई है। वहीं पुलिस महकमे में भी यह मामला चर्चाओं का विषय बना हुआ है।

दरअसल पूरा मामला उझानी नगर पालिका परिषद में तैनात नफीस अहमद से जुड़ा है, जिन पर इंटरमीडिएट की कथित फर्जी मार्कशीट के आधार पर चौकीदार से लिपिक बनने का आरोप लगा है। इसी मामले में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी द्वारा करीब तीन सप्ताह पूर्व कोतवाली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। मामले की विवेचना कोतवाली में तैनात क्राइम ब्रांच प्रभारी निरीक्षक राहुल चौहान को सौंपी गई थी। अब इसी जांच प्रक्रिया के दौरान रिश्वत मांगने और धमकाने के आरोपों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।

क्या है पूरा मामला।

जानकारी के अनुसार उझानी नगर पालिका परिषद में कार्यरत नफीस अहमद पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से इंटरमीडिएट की फर्जी मार्कशीट का इस्तेमाल कर चौकीदार से लिपिक पद तक पदोन्नति प्राप्त की। इस मामले को लेकर नगर पालिका प्रशासन की ओर से जांच कराई गई थी। जांच के बाद अधिशासी अधिकारी विनय कुमार मणि त्रिपाठी ने 26 अप्रैल को कोतवाली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच प्रभारी निरीक्षक राहुल चौहान द्वारा की जा रही है। इसी दौरान नगर पालिका में तैनात लिपिक मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी और कोतवाली में तैनात दीवान ने उन्हें परेशान किया और रिश्वत की मांग की।

कोतवाली बुलाकर घंटों बैठाया गया”

नगर मोहल्ला बहादुरगंज निवासी लिपिक मुकेश शर्मा पुत्र स्वर्गीय रघुवीर शरण शर्मा ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में बताया कि 13 मई को कोतवाली में तैनात दीवान प्रीतोष कुमार नगर पालिका कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर राहुल चौहान ने उन्हें तत्काल कोतवाली बुलाया है।

मुकेश शर्मा के अनुसार वह सरकारी कार्य समझकर कोतवाली पहुंच गए। वहां उनकी मुलाकात क्राइम ब्रांच प्रभारी निरीक्षक राहुल चौहान से हुई। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने उनसे कड़े लहजे में बातचीत की और नफीस अहमद से संबंधित कई दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगीं।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इंस्पेक्टर ने इंटरमीडिएट की मार्कशीट, पदावनति आदेश, रिकवरी आदेश, निलंबन आदेश और लिपिक पद पर पदोन्नति से संबंधित सभी अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा।

मुकेश शर्मा के अनुसार जब वह अपने साथ गए अनुचर अवनीश कुमार तोमर के साथ वहां से जाने लगे तो उन्हें रोक लिया गया और कहा गया कि पहले दीवान प्रीतोष कुमार से मिल लो। इसके बाद उन्हें काफी देर तक कोतवाली परिसर में बैठाकर रखा गया।

50 हजार रुपये की मांग की गई”

शिकायत में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि दीवान प्रीतोष कुमार ने क्राइम ब्रांच प्रभारी निरीक्षक राहुल चौहान के इशारे पर उनसे 50 हजार रुपये की मांग की।

मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि दीवान ने कहा कि “इंस्पेक्टर साहब 50 हजार रुपये मांग रहे हैं, व्यवस्था करके लाओ।” शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने काफी अनुरोध किया और कहा कि यह प्राथमिकी अधिशासी अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई है, इसलिए वह उनसे बात कर लेंगे।

आरोप है कि इस पर दीवान ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि अधिकारियों से इस बारे में कुछ मत कहना, नहीं तो “लफड़े में पड़ जाओगे।”

मुकेश शर्मा का कहना है कि वह बेहद घबरा गए थे और किसी तरह वहां से वापस नगर पालिका कार्यालय पहुंचे।

दस्तावेज भेजने के बाद भी धमकी का आरोप

शिकायतकर्ता के अनुसार कोतवाली से लौटने के बाद उन्होंने जांच में सहयोग करते हुए मांगे गए सभी दस्तावेजों की छायाप्रतियां नगर पालिका के दफ्तरी कुंवर सेन के माध्यम से कोतवाली भेज दीं।

लेकिन आरोप है कि इसके बाद भी उन्हें प्रताड़ित किया गया। शिकायत में कहा गया है कि क्राइम ब्रांच प्रभारी निरीक्षक ने कड़े लहजे में कहा कि “जो रुपये मांगे गए हैं, मुकेश उन्हें देने में टालमटोल कर रहा है।”

मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि इंस्पेक्टर ने यह भी कहा कि अभी निलंबन आदेश की प्रति बाकी है, उसे कोई और लेकर न आए बल्कि स्वयं मुकेश शर्मा ही लेकर आएं। साथ ही कथित रूप से यह धमकी भी दी गई कि “फालतू के झगड़े में मत पड़ो, नहीं तो लंबा नाप दूंगा।”

SSP से लगाई सुरक्षा की गुहार

पूरा घटनाक्रम बताते हुए नगर पालिका लिपिक मुकेश शर्मा ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर अपनी सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो उनके साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि क्राइम ब्रांच प्रभारी निरीक्षक राहुल चौहान और संबंधित दीवान की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि वह एक सरकारी कर्मचारी हैं और केवल कार्यालयीय अभिलेख उपलब्ध कराने का कार्य कर रहे थे, लेकिन उन्हें अनावश्यक रूप से दबाव में लिया जा रहा है।

नगर पालिका कर्मचारियों में बढ़ी बेचैनी।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद नगर पालिका परिषद उझानी के कर्मचारियों में बेचैनी बढ़ गई है। कई कर्मचारियों का कहना है कि यदि जांच के नाम पर कर्मचारियों को इस तरह दबाव में लिया जाएगा तो सरकारी कामकाज प्रभावित होगा।

वहीं कुछ कर्मचारियों का कहना है कि फर्जी मार्कशीट मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन किसी भी कर्मचारी के साथ अनुचित व्यवहार नहीं होना चाहिए।

नगर पालिका से जुड़े सूत्रों के अनुसार नफीस अहमद प्रकरण पहले से ही काफी संवेदनशील माना जा रहा था क्योंकि इसमें विभागीय पदोन्नति और शैक्षिक अभिलेखों की सत्यता का सवाल जुड़ा हुआ है। अब रिश्वत मांगने और धमकी देने के आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

फर्जी मार्कशीट प्रकरण बना चर्चा का विषय।

उझानी नगर पालिका में फर्जी मार्कशीट के आधार पर नौकरी और पदोन्नति हासिल करने का मामला पिछले कुछ समय से चर्चा में बना हुआ है। आरोप है कि चौकीदार पद पर कार्यरत नफीस अहमद ने इंटरमीडिएट की कथित फर्जी मार्कशीट लगाकर लिपिक पद प्राप्त किया।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल विभागीय नियमों का उल्लंघन माना जाएगा बल्कि सरकारी सेवा में धोखाधड़ी का मामला भी बन सकता है। इसी कारण नगर पालिका प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

अब जांच प्रक्रिया के दौरान सामने आए नए आरोपों ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या विवेचना निष्पक्ष तरीके से हो रही है या फिर जांच के नाम पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस विभाग में भी मचा हड़कंप।

एक ओर जहां शिकायतकर्ता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरी ओर पुलिस विभाग में भी इस मामले को लेकर हलचल तेज हो गई है।

सूत्रों का कहना है कि मामला सीधे क्राइम ब्रांच प्रभारी निरीक्षक से जुड़ा होने के कारण अधिकारी बेहद सतर्कता से पूरे प्रकरण को देख रहे हैं। यदि शिकायत की जांच बैठती है तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

हालांकि अभी तक पुलिस विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

निष्पक्ष जांच की उठी मांग।

नगर के सामाजिक संगठनों और कुछ स्थानीय लोगों ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि कोई कर्मचारी दोषी है तो उसके खिलाफ कानूनन कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जांच के दौरान किसी प्रकार की अवैध वसूली या दबाव की शिकायत बेहद गंभीर मामला है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो सके।

अब सबकी नजर SSP की कार्रवाई पर।

फिलहाल पूरे मामले में अब सबकी नजर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की कार्रवाई पर टिकी हुई है। शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर माने जा रहे हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो संबंधित पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

वहीं दूसरी ओर नफीस अहमद की कथित फर्जी मार्कशीट का मामला भी जांच के दायरे में है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह प्रकरण और अधिक तूल पकड़ सकता है।

उझानी नगर पालिका से शुरू हुआ यह विवाद अब प्रशासनिक और पुलिस महकमे दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। जनता भी अब यह जानना चाहती है कि आखिर इस पूरे मामले में सच्चाई क्या है और दोषियों पर कब कार्रवाई होगी।

उझानी में क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर पर रिश्वत मांगने का आरोप।

JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।

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