आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, नियमों का उल्लंघन मिलने पर सील करने के निर्देश।

आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, नियमों का उल्लंघन मिलने पर सील करने के निर्देश

नई दिल्ली, 23 सितंबर। आवासीय संपत्तियों का नियमों के विपरीत व्यावसायिक इस्तेमाल करने वालों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देशभर के नगर निगमों और नगर निकायों को निर्देश दिया कि वे आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित संपत्तियों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करें। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित संपत्ति को सील करने की कार्रवाई की जाए।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि स्थानीय निकायों को अपने-अपने क्षेत्रों में यह जांच करनी होगी कि आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित संपत्तियों का कहीं नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल तो नहीं किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उद्देश्य भूमि उपयोग और भवन नियमों के उल्लंघन पर संबंधित प्राधिकरणों की कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

आवासीय संपत्ति में कारोबार मिलने पर होगी कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार नगर निकायों को ऐसे मामलों की पहचान करने के लिए व्यापक जांच करनी होगी, जहां आवासीय संपत्तियों में उनकी निर्धारित उपयोग श्रेणी के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

ऐसी संपत्तियों में दुकान, कार्यालय या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां यदि संबंधित नियमों और अनुमति के विपरीत पाई जाती हैं, तो स्थानीय निकाय कानून के तहत कार्रवाई कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से ऐसे मामलों को प्राथमिकता देने को कहा है।

इससे उन लोगों पर कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है जो आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित भवनों या परिसरों में बिना आवश्यक अनुमति के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।

स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं क्षेत्रों की भी होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे इलाकों की पहचान और जांच की जाए जिनका उपयोग स्पष्ट रूप से न तो आवासीय और न ही व्यावसायिक श्रेणी में निर्धारित है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि फिलहाल ऐसे क्षेत्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाए।

इसका मतलब यह है कि स्थानीय निकाय पहले उन संपत्तियों और क्षेत्रों की पहचान करेंगे जहां भूमि उपयोग स्पष्ट रूप से आवासीय है और वहां नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। जिन क्षेत्रों की उपयोग श्रेणी स्पष्ट नहीं है, उनकी जानकारी और स्थिति की जांच की जाएगी, लेकिन तत्काल सीलिंग जैसी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

‘चुनिंदा कार्रवाई’ पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकायों को कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करने की चेतावनी दी है। पीठ ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित प्राधिकरणों को समान रूप से कार्रवाई करनी होगी।

कोर्ट ने कहा कि यदि अधिकारी किसी खास व्यक्ति या संपत्ति को चुनकर कार्रवाई करते हैं और समान स्थिति वाली दूसरी संपत्तियों को छोड़ देते हैं, तो अदालत इस तरह की ‘पिक एंड चूज’ कार्रवाई को गंभीरता से लेगी। यानी नियमों का पालन सुनिश्चित करते समय कार्रवाई सभी समान मामलों में एक समान तरीके से होनी चाहिए।

यह निर्देश स्थानीय निकायों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर लंबे समय से भवन उपनियमों और भूमि उपयोग नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आती रही हैं।

पहले भी हो चुकी है देशव्यापी जांच की प्रक्रिया

यह मामला एक व्यापक न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय क्षेत्रों के गैर-आवासीय इस्तेमाल के मुद्दे पर देशव्यापी स्तर पर जांच का दायरा बढ़ाया था। उस समय अदालत ने राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों की राजधानियों के नगर निगमों एवं नगर निकायों को अपने अधिकार क्षेत्र में ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने का निर्देश दिया था, जिन्हें विशेष रूप से आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित किया गया है, लेकिन उनका गैर-आवासीय इस्तेमाल हो रहा है।

यह मामला Loganathan बनाम State of Tamil Nadu से जुड़ी कार्यवाही के दौरान व्यापक हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय कहा था कि आवासीय क्षेत्रों का अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल केवल नियमों के उल्लंघन का विषय नहीं है, बल्कि इससे वहां रहने वाले लोगों और नागरिक सुविधाओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

दिल्ली समेत कई शहरों में कार्रवाई की जानकारी

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्थानीय निकायों द्वारा की जा रही कार्रवाई के आंकड़े भी अदालत के सामने रखे गए हैं। दिल्ली नगर निगम ने हाल में अदालत को बताया कि उसने बड़ी संख्या में संपत्तियों के व्यावसायिक दुरुपयोग के मामलों में कार्रवाई शुरू की है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार एमसीडी ने 5,900 से अधिक संपत्तियों के खिलाफ व्यावसायिक दुरुपयोग को लेकर कार्रवाई शुरू की थी, जिनमें 33 संपत्तियों को सील किए जाने की जानकारी दी गई।

इससे स्पष्ट है कि मामला केवल किसी एक शहर तक सीमित नहीं है और स्थानीय निकायों द्वारा आवासीय संपत्तियों के कथित व्यावसायिक दुरुपयोग की जांच की जा रही है।

संपत्ति मालिकों और कारोबारियों के लिए क्या मायने?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उन संपत्ति मालिकों और कारोबारियों को अपने भवन के भूमि उपयोग, स्थानीय निकाय की अनुमति और संबंधित लाइसेंस की स्थिति की जांच करनी पड़ सकती है, जो आवासीय संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।

हालांकि किसी भी संपत्ति पर कार्रवाई उसके स्थानीय भवन उपनियमों, भूमि उपयोग नियमों, स्वीकृत नक्शे और उपलब्ध अनुमतियों के आधार पर होगी। इसलिए केवल किसी भवन में कोई गतिविधि चलने भर से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वह स्वतः अवैध है। संबंधित स्थानीय नियम और अनुमति की स्थिति देखना जरूरी होगा।

आगे बढ़ सकती है स्थानीय निकायों की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद नगर निगमों और नगर निकायों पर अपने-अपने क्षेत्रों में आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल की पहचान और नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

अब स्थानीय स्तर पर सर्वे, निरीक्षण, दस्तावेजों की जांच और नियमों के उल्लंघन की पहचान जैसी प्रक्रियाएं तेज हो सकती हैं। जहां स्पष्ट उल्लंघन सामने आएगा, वहां संबंधित कानूनों और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार सीलिंग समेत कार्रवाई की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही यह संदेश भी स्पष्ट किया है कि कार्रवाई पारदर्शी और समान रूप से होनी चाहिए। किसी व्यक्ति या संपत्ति को चुनकर कार्रवाई करने के बजाय समान परिस्थितियों वाले मामलों में समान नियम लागू करने होंगे।

जनपद न्यूज़ 24 यूपी — सच की आवाज़, जनता के साथ।

Leave a Comment