कानपुर में ओवैसी का अखिलेश यादव पर हमला, ‘भैया आ रहे हैं’ नारे पर उठाए सवाल।

कानपुर में ओवैसी का अखिलेश यादव पर हमला, ‘भैया आ रहे हैं’ नारे पर उठाए सवाल

कानपुर। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कानपुर में आयोजित जनसभा के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। ओवैसी ने चुनावी नारों से लेकर अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल और 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों तक का जिक्र करते हुए सपा से सवाल किए।

कानपुर के बाबूपुरवा ईदगाह मैदान में आयोजित जनसभा में ओवैसी ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं का जिक्र किया। उन्होंने ‘भैया आ रहे हैं’ जैसे नारों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव के समय जनता के बीच पुराने राजनीतिक दावे और नारे फिर सामने आने लगते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल को लेकर सवाल खड़े किए और उनके शासन के दौरान प्रदेश में कानून-व्यवस्था तथा दंगों से जुड़े घटनाक्रमों का मुद्दा उठाया।

मुजफ्फरनगर दंगों का किया जिक्र

ओवैसी ने अपने भाषण में वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, उसी दौरान मुजफ्फरनगर में हिंसा हुई थी। ओवैसी ने दावा किया कि इस हिंसा के बाद करीब 50 हजार लोग अपने घरों और गांवों से विस्थापित हुए थे। इसी आंकड़े का हवाला देते हुए उन्होंने अखिलेश यादव के कार्यकाल में हुए दंगों और सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाया।

मुजफ्फरनगर हिंसा उत्तर प्रदेश के राजनीतिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटना रही है। ओवैसी ने इसी घटना को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाया और जनता से पुराने घटनाक्रमों को याद रखने की बात कही। हालांकि, विस्थापन की संख्या को लेकर ओवैसी द्वारा इस्तेमाल किया गया करीब 50 हजार का आंकड़ा उनके भाषण में किया गया दावा है। विभिन्न रिपोर्टों में हिंसा के बाद विस्थापन को लेकर आंकड़े अलग-अलग संदर्भों में सामने आए हैं।

अखिलेश सरकार के कार्यकाल पर सवाल

AIMIM प्रमुख ने सवाल किया कि अखिलेश यादव के सत्ता में रहने के दौरान उत्तर प्रदेश में कितने दंगे हुए और इन घटनाओं के लिए राजनीतिक तथा प्रशासनिक जवाबदेही किसकी थी। उन्होंने अपने भाषण में मुस्लिम समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सरकारों के कार्यकाल में शिक्षा, रोजगार तथा सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर भी सवाल उठाए।

ओवैसी ने कहा कि आगामी चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दल जनता के बीच जाएंगे और अपने-अपने मुद्दे रखेंगे। उन्होंने विशेष रूप से मुस्लिम मतदाताओं से राजनीतिक दलों के पुराने कार्यकाल और उनके कामकाज को याद रखने की अपील की। उनके भाषण का एक बड़ा हिस्सा मुस्लिम समाज की राजनीतिक भागीदारी, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा।

गठबंधन को लेकर भी दिया संकेत

कानपुर की जनसभा में ओवैसी ने केवल समाजवादी पार्टी पर हमला ही नहीं किया, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए संभावित राजनीतिक गठबंधन को लेकर भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि AIMIM उन दलों के साथ गठबंधन के लिए तैयार है जो उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार को तीसरी बार बनने से रोकना चाहते हैं। ओवैसी ने कहा कि गठबंधन को लेकर उनकी पार्टी दो अक्टूबर तक इंतजार करेगी और इसके बाद किसी संभावित गठबंधन पर निर्णय की घोषणा की जा सकती है।

इससे पहले बिहार चुनाव के संदर्भ में भी AIMIM की ओर से गठबंधन को लेकर प्रस्ताव का जिक्र किया गया। ओवैसी ने कानपुर में अपने भाषण के दौरान कहा कि उनकी पार्टी ने बिहार में गठबंधन के तहत छह सीटों पर चुनाव लड़ने की पेशकश की थी, लेकिन इसके बजाय उन पर आरोप लगाए गए।

2027 से पहले बढ़ेगी सियासी बयानबाजी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं और उससे पहले राजनीतिक दलों ने अपने संगठन तथा जनसंपर्क अभियान को तेज करना शुरू कर दिया है। कानपुर में ओवैसी की सभा को भी इसी राजनीतिक गतिविधि के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। AIMIM उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है और कानपुर की सभा में ओवैसी ने पार्टी की राजनीतिक हिस्सेदारी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

ओवैसी ने अपने संबोधन में भाजपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत विभिन्न राजनीतिक दलों की नीतियों और मुस्लिम समाज से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को शिक्षा, रोजगार, संपत्ति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे विषयों पर राजनीतिक दलों से सवाल करना चाहिए।

कानपुर में दिए गए इस भाषण के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और AIMIM के बीच आरोप-प्रत्यारोप का एक और दौर शुरू होने की संभावना है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अलग-अलग दलों के बीच राजनीतिक समीकरण, संभावित गठबंधन और मतदाताओं से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में चुनावी बहस का हिस्सा बन सकते हैं।

फिलहाल ओवैसी के बयान ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों और अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की ओर से इन सवालों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

जनपद न्यूज़ 24 यूपी
सच की आवाज़, जनता के साथ
JANPADNEWS24UP.COM

Leave a Comment