बदायूं में नकली पोटाश बनाने का खुलासा, खैरी गांव के बंद लॉन में चल रहा था कारोबार
बदायूं/बिल्सी। किसानों की फसलों के लिए इस्तेमाल होने वाली पोटाश को लेकर बदायूं जिले में कृषि विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बड़ा मामला सामने आया है। बिल्सी-इस्लामनगर मार्ग पर खैरी गांव के समीप एक बंद पड़े मैरिज लॉन में कथित तौर पर नमक से नकली पोटाश तैयार किए जाने का खुलासा हुआ है। कृषि विभाग की टीम ने पुलिस के साथ छापेमारी कर मौके से बड़ी मात्रा में नमक, तैयार कट्टे, खाली उर्वरक कट्टे, सिलाई मशीन, धागा, जनरेटर और गेरू समेत अन्य सामग्री बरामद की है। कार्रवाई के दौरान नौ लोगों को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है।
मैरिज हॉल में चल रहा था कथित नकली पोटाश का कारोबार
रिपोर्टों के अनुसार बिल्सी-इस्लामनगर रोड पर खैरी गांव के पास स्थित बंद लॉन को कथित तौर पर पोटाश तैयार करने और पैकिंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। जिला कृषि अधिकारी मनोज रावत के नेतृत्व में कृषि विभाग की टीम ने पुलिस के साथ यहां छापेमारी की।
छापेमारी के दौरान मौके पर बड़ी मात्रा में नमक और तैयार पैकेट मिले। अधिकारियों के अनुसार नमक का इस्तेमाल पोटाश तैयार करने में किया जा रहा था। मौके से करीब 300 बोरी नमक, लगभग 300 तैयार कट्टे, बड़ी संख्या में खाली कट्टे, दो सिलाई मशीन, धागा, जनरेटर और गेरू बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में खाली कट्टों की संख्या करीब 400 बताई गई है।
कंपनी के नाम वाले कट्टे भी मिले
कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू तैयार कट्टों से जुड़ा है। कृषि अधिकारी के अनुसार मौके से मिले कुछ कट्टों पर इंडियन पोटाश लिमिटेड के नाम वाले प्रिंट का इस्तेमाल किया जा रहा था। इससे जांच का दायरा केवल निर्माण स्थल तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि यह भी जांच का विषय बन गया है कि इन कट्टों को कहां से हासिल किया गया और तैयार सामग्री की आपूर्ति कहां-कहां की जानी थी।
अधिकारियों की कार्रवाई के बाद बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार बिल्सी कोतवाली में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
नौ लोगों को पकड़े जाने की जानकारी
छापेमारी के दौरान फैक्टरी संचालक समेत नौ लोगों को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों में मुख्य संचालक के रूप में सहसवान के पठान टोला निवासी आरिफ का नाम बताया गया है। अन्य पकड़े गए लोगों के बारे में भी पुलिस स्तर पर जानकारी सामने आई है।

हालांकि इस पूरे मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल कृषि विभाग और पुलिस की कार्रवाई के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
किसानों तक पहुंचने से पहले पकड़ी गई सामग्री
इस मामले का सबसे अहम पहलू किसानों से जुड़ा है। पोटाश जैसे उर्वरक का इस्तेमाल किसान फसलों की जरूरत के अनुसार करते हैं। यदि किसी उर्वरक के नाम पर दूसरी सामग्री पैक करके बाजार में भेजी जाती है, तो किसान को आर्थिक नुकसान के साथ फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
इसी वजह से कृषि विभाग की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अधिकारियों ने मौके से तैयार सामग्री को जब्त कर लिया, जिससे कथित तौर पर तैयार किए जा रहे उत्पाद की तत्काल बाजार में आपूर्ति पर रोक लगी है।
अब सप्लाई नेटवर्क की जांच पर नजर
छापेमारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि तैयार कथित नकली पोटाश की सप्लाई कहां की जानी थी। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक कृषि विभाग के अधिकारियों ने यह भी बताया है कि बड़ी संख्या में कट्टे पहले बेचे जाने की आशंका की जांच की जा रही है। हालांकि किन दुकानों या विक्रेताओं तक सामग्री पहुंची, इसकी अंतिम जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि खाली उर्वरक कट्टे कहां से आए, पैकिंग किस स्तर पर की जाती थी, तैयार माल को कहां भेजा जाता था और इस कथित कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या थी।
किसानों के लिए भी जरूरी है सतर्कता
कृषि विभाग की इस कार्रवाई के बाद किसानों के लिए भी उर्वरक खरीदते समय सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है। किसानों को अधिकृत विक्रेता से ही उर्वरक खरीदने, बिल लेने और पैकेट पर कंपनी का नाम, बैच तथा अन्य जरूरी विवरण देखने की सलाह दी जाती है। संदिग्ध सामग्री मिलने पर संबंधित कृषि विभाग या प्रशासन को इसकी सूचना दी जा सकती है।

किसानों की फसल उनके पूरे साल की मेहनत और आय का महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे में उर्वरक की गुणवत्ता को लेकर किसी भी तरह की गड़बड़ी का असर सीधे किसान की जेब पर पड़ सकता है।
कार्रवाई के बाद कई सवाल
खैरी गांव के पास बंद मैरिज लॉन में मिले इस कथित नकली पोटाश निर्माण के मामले ने उर्वरक की सप्लाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। पुलिस और कृषि विभाग की जांच में अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि यह गतिविधि कितने समय से चल रही थी, तैयार सामग्री की कितनी मात्रा बाजार तक पहुंची और इसके पीछे पूरा नेटवर्क किस तरह काम कर रहा था।

फिलहाल कृषि विभाग और पुलिस की कार्रवाई में बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद होने तथा नौ लोगों को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच आगे बढ़ रही है। जांच पूरी होने पर ही पूरे नेटवर्क और कथित रूप से बाजार में पहुंची सामग्री की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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