आरआईआरडी में चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण संपन्न, समूह सखियों को मिले प्रमाण पत्र।

आरआईआरडी में चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण संपन्न, समूह सखियों को मिले प्रमाण पत्र।

प्रशिक्षण में समूह की अवधारणा, पंच सूत्र, नेतृत्व, समूह प्रबंधन और सूक्ष्म वित्त की प्रक्रिया पर दी गई जानकारी।

आसफपुर (बदायूं)। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत क्षेत्रीय ग्राम्य विकास संस्थान (आरआईआरडी) के लक्ष्मी वाई गोष्ठी हाल में समूह सखी मॉड्यूल-1 का चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रशिक्षण के समापन अवसर पर प्रतिभागी समूह सखियों का पोस्ट क्षमता आकलन प्रश्न पत्र कराया गया। इसके बाद प्रशिक्षण में शामिल समूह सखियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्रशिक्षण का उद्देश्य समूह सखियों को ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों के संचालन, प्रबंधन और सदस्यों के मार्गदर्शन के लिए आवश्यक व्यवहारिक एवं सैद्धांतिक जानकारी उपलब्ध कराना रहा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विकासखंडों से समूह सखियों ने प्रतिभाग किया। प्रथम बैच में बिसौली, अंबियापुर, दहगवां, कादर चौक और उझानी विकासखंड की समूह सखियां शामिल हुईं। वहीं द्वितीय बैच में जगत, आसफपुर, समरेर, म्यायूं, दातागंज और सलारपुर विकासखंड की समूह सखियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विषयों की जानकारी केवल व्याख्यान के माध्यम से नहीं दी गई, बल्कि विभिन्न सहभागी प्रशिक्षण विधियों का प्रयोग करते हुए उन्हें विषयों को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर भी दिया गया।

फिल्म, कहानी और रोल प्ले के जरिए समझाए गए विषय।

प्रशिक्षण के दौरान समूह सखियों को फिल्म, कहानी, अभ्यास, फ्लिप बुक, समूह चर्चा, रोल प्ले सहित विभिन्न प्रशिक्षण विधियों के माध्यम से महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई। इन विधियों का उद्देश्य प्रतिभागियों को प्रशिक्षण विषयों से जोड़ना और उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में समूह के साथ काम करने के लिए तैयार करना रहा।

प्रशिक्षण में समूह की अवधारणा, गरीबी क्यों, समूह क्यों, नियम क्यों और पंच सूत्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही नेतृत्व एवं समूह प्रबंधन, समूह के पूंजीकरण के चरण तथा सूक्ष्म वित्त की प्रक्रिया के बारे में भी प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान समूह सखियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि स्वयं सहायता समूह केवल बचत और बैठक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं।

समूह सखी की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण।

द्वितीय बैच के समापन अवसर पर डीआरपी एसएमसीबी अमित कुमार सिंह तोमर ने समूह सखी की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समूह सखी वह प्रशिक्षित सहयोगी है, जो समूह की बैठक, बचत, अभिलेख, योजना आदि से संबंधित कार्यों में सदस्यों का मार्गदर्शन करती है। समूह सखी प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद समूह के सदस्यों के साथ सामूहिक सहभागिता को बढ़ाने में मदद करती है और एक सुलभकर्ता के रूप में अपनी भूमिका निभाती है।

उन्होंने कहा कि समूह सखी की जिम्मेदारी केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समूह के सदस्यों को अपने अधिकारों, जिम्मेदारियों और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया को समझने में सहयोग करना भी महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षित समूह सखी स्वयं सहायता समूहों को अधिक प्रभावी तरीके से संचालित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

डीआरपी अमित कुमार सिंह तोमर ने प्रशिक्षण के दौरान बताए गए विषयों को समूह सखियों के कार्य से जोड़ते हुए कहा कि बैठक की नियमितता, बचत, अभिलेखों का सही रखरखाव, समूह के नियमों का पालन और सदस्यों की सक्रिय भागीदारी समूह की मजबूती के लिए आवश्यक है। इसके साथ ही समूह के पूंजीकरण और सूक्ष्म वित्त से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी भी समूह सखियों के लिए उपयोगी है।

प्रशिक्षण के उद्देश्य और महत्व पर डाला प्रकाश।

प्रशिक्षण के समापन अवसर पर संस्थान के आचार्य डॉ. सुनील कुमार वर्मा ने प्रशिक्षण के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी को अपने-अपने क्षेत्रों में समूहों के साथ काम करते समय उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता तभी मानी जाती है, जब प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और कौशल को कार्यक्षेत्र में प्रभावी रूप से लागू किया जाए।

संस्थान के प्रसार प्रशिक्षण अधिकारी पंकज कुमार ने भी प्रतिभागियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने समूह सखियों को प्रशिक्षण में सीखी गई प्रक्रियाओं और व्यवहारिक पहलुओं को अपने कार्य में अपनाने के लिए प्रेरित किया।

प्रमाण पत्र पाकर समूह सखियों में दिखा उत्साह।

चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण के सफल समापन के बाद प्रतिभागी समूह सखियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाली समूह सखियों में प्रीती, आविदा, ममता, सीमा पाल, कविता रानी, शकुंतला देवी, शिवानी, ज्ञान सरिता सहित अन्य प्रतिभागी शामिल रहीं। प्रमाण पत्र प्राप्त करते समय प्रतिभागियों में उत्साह देखने को मिला।

समूह सखियों ने प्रशिक्षण के दौरान मिली जानकारी को उपयोगी बताते हुए कहा कि विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विषयों को समझाए जाने से प्रशिक्षण अधिक प्रभावी रहा। फिल्म, कहानी, अभ्यास, फ्लिप बुक, समूह चर्चा और रोल प्ले जैसी गतिविधियों ने उन्हें समूह संचालन से जुड़े विषयों को बेहतर तरीके से समझने में मदद की।

प्रशिक्षण को सफल बनाने में सहयोग।

प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में सत्र प्रभारी वीरपाल सिंह का विशेष सहयोग रहा। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न व्यवस्थाओं और सत्रों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशिक्षण से जुड़े अधिकारियों एवं सहयोगियों ने प्रतिभागियों को निर्धारित विषयों की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी जिज्ञासाओं और सवालों का समाधान भी किया।

दोनों बैच के समापन सत्र का संचालन प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभारी हरीश उपाध्याय ने किया। उन्होंने प्रशिक्षण में सहयोग करने वाले डीआरपी अमित तोमर, सुषमा सहित सभी संबंधित अधिकारियों, प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को समूहों तक पहुंचाना और ग्रामीण महिलाओं की सामूहिक भागीदारी को मजबूत करना समूह सखियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

इस तरह क्षेत्रीय ग्राम्य विकास संस्थान में आयोजित चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ज्ञानवर्धक एवं सहभागी वातावरण में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण के माध्यम से समूह सखियों को स्वयं सहायता समूहों के संचालन, नेतृत्व, प्रबंधन, बचत, अभिलेख, पूंजीकरण और सूक्ष्म वित्त से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी मिली। प्रमाण पत्र वितरण के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ और प्रतिभागियों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग करने का संकल्प लिया।

संपादक नवीन गोस्वामी।

जनपद न्यूज़ 24 यूपी

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