उझानी में जर्जर डाकघर भवन पर मंडरा रहा हादसे का खतरा, दिल्ली हादसे के बाद भी नहीं जागा विभाग।
मुख्य बाजार के स्टेशन रोड स्थित डाकघर भवन की हालत जर्जर, छत से गिरता रहता है सीमेंट का प्लास्टर; भाजपा नेता ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की

उझानी। दिल्ली में हाल ही में हुए पीजीआई हादसे में छात्रों समेत सात लोगों की मौत के बाद जर्जर और असुरक्षित भवनों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। इसी बीच उझानी शहर के मुख्य बाजार स्थित स्टेशन रोड के डाकघर भवन की जर्जर हालत लोगों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। भवन की स्थिति इतनी खराब बताई जा रही है कि कई स्थानों पर सीमेंट का प्लास्टर लगातार गिरता रहता है और इमारत के कुछ हिस्से बेहद कमजोर नजर आ रहे हैं। ऐसे में डाकघर में प्रतिदिन पहुंचने वाले सैकड़ों नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, स्टेशन रोड स्थित यह डाकघर शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक पर स्थित है। आसपास बड़ी संख्या में दुकानें हैं और मुख्य बाजार होने के कारण यहां पूरे दिन लोगों की आवाजाही बनी रहती है। डाकघर में भी रोजाना सैकड़ों लोग विभिन्न कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि जर्जर भवन का कोई हिस्सा अचानक गिरता है तो बड़ा हादसा हो सकता है।
वर्षों से मरम्मत के अभाव में बिगड़ती गई हालत।
आरोप है कि पिछले कई वर्षों से डाकघर भवन की साफ-सफाई और आवश्यक मरम्मत नहीं कराई गई है, जिसके चलते इसकी हालत लगातार खराब होती चली गई। भवन के कई हिस्सों में जर्जरता साफ दिखाई देती है। सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि छत और अन्य हिस्सों से सीमेंट का प्लास्टर गिरता रहता है। इससे डाकघर के कर्मचारियों के साथ-साथ वहां आने वाले आम लोगों पर भी खतरा बना हुआ है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि किसी सरकारी भवन का इस तरह जर्जर हालत में बने रहना गंभीर विषय है। जब किसी भवन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हों, तब उसकी सुरक्षा और समय-समय पर तकनीकी जांच कराना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी बनती है।
दिल्ली हादसे के बाद बढ़ी चिंता।
हाल ही में दिल्ली में हुए पीजीआई हादसे में छात्रों समेत सात लोगों की मौत के बाद जर्जर भवनों की सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ गई है। हादसे के बाद दिल्ली में जर्जर भवनों के खिलाफ कार्रवाई और असुरक्षित इमारतों को लेकर प्रशासन की सक्रियता चर्चा में रही है। इसी संदर्भ में उझानी के जर्जर डाकघर भवन का मामला भी सामने आया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन और संबंधित विभागों को पहले से ही ऐसे भवनों की पहचान कर उनकी तकनीकी जांच करानी चाहिए। यदि कोई भवन रहने, काम करने या आम जनता के आवागमन के लिहाज से असुरक्षित है तो उसे तत्काल खाली कराकर सुरक्षित स्थान पर व्यवस्था की जानी चाहिए।
भाजपा नेता ने जिलाधिकारी को भेजा पत्र।
डाकघर भवन की जर्जर हालत को लेकर भाजपा नेता एवं सहकारी क्रय-विक्रय समिति के चेयरमैन पंडित किशन चन्द्र शर्मा ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मामले का संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में उन्होंने डाकघर भवन की स्थिति को बेहद जर्जर बताते हुए कहा है कि भवन की हालत लगातार खराब होती जा रही है। पत्र के अनुसार, भवन में कई स्थानों पर लिंटर का कुछ हिस्सा पहले ही गिर चुका है, जबकि बचे हुए हिस्से से ईंट और प्लास्टर के टुकड़े भी गिरते रहते हैं। इससे यहां काम करने वाले कर्मचारियों तथा डाकघर में आने वाले आम नागरिकों की जान को खतरा बना हुआ है।
भाजपा नेता ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि मुख्य बाजार में काफी भीड़ रहती है और डाकघर में प्रतिदिन सैकड़ों लोग आधार कार्ड सहित अन्य जरूरी कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसी स्थिति में यदि भवन का कोई कमजोर हिस्सा अचानक गिर जाता है तो बड़ी जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पंडित किशन चन्द्र शर्मा ने जिलाधिकारी से मांग की है कि डाकघर भवन की तकनीकी जांच लोक निर्माण विभाग से कराई जाए, ताकि भवन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक भवन को खाली कराकर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पत्र में मांग की गई है कि जांच के आधार पर यह तय किया जाए कि भवन की मरम्मत संभव है या फिर इसे पूरी तरह असुरक्षित घोषित कर ध्वस्त करने की आवश्यकता है। यदि भवन की मरम्मत संभव नहीं है तो डाकघर को किसी सुरक्षित वैकल्पिक भवन में स्थानांतरित किया जाए, जिससे कर्मचारियों और आम जनता को खतरे से बचाया जा सके।
बाजार में रोजाना रहती है भारी भीड़।
स्टेशन रोड और मुख्य बाजार उझानी के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल हैं। यहां सुबह से लेकर शाम तक बड़ी संख्या में लोग खरीदारी, बैंकिंग, सरकारी कार्यों और अन्य जरूरी कामों के लिए पहुंचते हैं। डाकघर भी इसी व्यस्त क्षेत्र में स्थित होने के कारण वहां लगातार लोगों का आना-जाना लगा रहता है।

ऐसे में जर्जर भवन से केवल डाकघर के कर्मचारियों को ही खतरा नहीं है, बल्कि उसके आसपास से गुजरने वाले राहगीर और दुकानदार भी संभावित खतरे के दायरे में हैं। यदि भवन की छत अथवा प्लास्टर का बड़ा हिस्सा अचानक गिरता है तो आसपास मौजूद लोगों को गंभीर चोट लग सकती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि भवन की हालत को देखते हुए संबंधित विभाग को इसे केवल सामान्य मरम्मत का मामला मानकर टालना नहीं चाहिए। पहले भवन की सुरक्षा ऑडिट और तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अनहोनी को रोका जा सके।
लोगों ने समय रहते कार्रवाई की मांग की।
नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को किसी हादसे का इंतजार नहीं करना चाहिए। दिल्ली में हुए हादसे के बाद देशभर में जर्जर और असुरक्षित भवनों को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं। ऐसे में उझानी के डाकघर भवन की स्थिति का भी तत्काल संज्ञान लिया जाना जरूरी है।
लोगों की मांग है कि प्रशासन मौके का निरीक्षण कराए और संबंधित विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करे। यदि भवन वास्तव में खतरनाक स्थिति में है तो वहां आम लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने के साथ-साथ डाकघर के लिए सुरक्षित स्थान की व्यवस्था की जानी चाहिए।
सवाल यह कि हादसे से पहले कब होगी कार्रवाई?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब किसी भवन की हालत लगातार बिगड़ रही हो, छत और प्लास्टर के हिस्से गिर रहे हों तथा वहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग पहुंचते हों, तो संबंधित विभाग कब तक कार्रवाई करेगा? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही भवन की मरम्मत या स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू होगी, या प्रशासन समय रहते कदम उठाएगा?
फिलहाल भाजपा नेता की ओर से जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र के बाद उम्मीद जगी है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डाकघर भवन की तकनीकी जांच कराएगा और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। अब देखना यह है कि जांच और कार्रवाई कितनी जल्दी होती है।
उझानी के लोगों के लिए यह केवल एक जर्जर सरकारी भवन का मामला नहीं, बल्कि रोजाना सैकड़ों नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है। समय रहते कदम उठाए गए तो संभावित हादसे को टाला जा सकता है।

स्थान : उझानी, बदायूं।
संपादक नवीन गोस्वामी।
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