कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाज़ों का ऐतिहासिक प्रदर्शन: 7 स्वर्ण और 3 रजत पदकों के साथ भारत ने रचा नया इतिहास।

नई दिल्ली/ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाज़ों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। भारत ने मुक्केबाजी प्रतियोगिता का समापन 7 स्वर्ण (गोल्ड) और 3 रजत (सिल्वर) पदकों के साथ किया। इसके साथ ही भारतीय टीम ने बॉक्सिंग मेडल तालिका में पहला स्थान हासिल किया और कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में मुक्केबाजी में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज कराया। भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में दमदार खेल, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिचय देते हुए देश का गौरव बढ़ाया।
शनिवार को पुरुषों के 90+ किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में भारत के नरेंद्र ने शानदार संघर्ष किया, लेकिन उन्हें इंग्लैंड के डमार थॉमस के खिलाफ 0-5 के सर्वसम्मत निर्णय से हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद नरेंद्र ने रजत पदक जीतकर भारत की झोली में एक और पदक डाला। हालांकि वे स्वर्ण पदक से चूक गए, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन सराहनीय रहा।
इससे पहले दिन की शुरुआत भारत के लिए बेहद शानदार रही। अंकुश पांघल ने पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू को 4-1 के स्प्लिट निर्णय से हराकर भारत के लिए सातवां स्वर्ण पदक जीता। यह जीत भारत के लिए ऐतिहासिक साबित हुई क्योंकि इसके साथ भारतीय मुक्केबाजी दल ने स्वर्ण पदकों का नया रिकॉर्ड कायम कर दिया।
महिला वर्ग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। 51 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में साक्षी चौधरी ने इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को एकतरफा मुकाबले में 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 25 वर्षीय साक्षी ने शुरुआत से ही मुकाबले पर अपना दबदबा बनाए रखा। पहले राउंड में उन्होंने लंबी पहुंच, तेज जैब और बेहतरीन फुटवर्क का शानदार प्रदर्शन किया, जिससे उनकी प्रतिद्वंद्वी रूबी व्हाइट लगातार दबाव में रहीं।
दूसरे राउंड में रूबी व्हाइट ने वापसी की कोशिश की और कुछ प्रभावी पंच भी लगाए, लेकिन साक्षी ने संयम बनाए रखते हुए बेहतर तकनीक और सटीक पंचों के दम पर मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत रखी। निर्णायकों ने साक्षी के प्रदर्शन को बेहतर मानते हुए उन्हें सर्वसम्मति से विजेता घोषित किया। यह साक्षी चौधरी का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक है और उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
साक्षी की जीत के कुछ ही मिनट बाद भारत को एक और स्वर्ण पदक मिला। प्रिया घांघस ने महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में कनाडा की मैरी-बाथौल को 4-1 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। प्रिया ने पूरे मुकाबले में शानदार आक्रामक खेल दिखाया और निर्णायक क्षणों में अपने अनुभव का बेहतरीन प्रदर्शन किया।
इसके बाद भारतीय मुक्केबाज अरुंधति चौधरी ने महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में इंग्लैंड की चैंटेल रीड को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया। अरुंधति की इस जीत ने भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या और बढ़ा दी तथा यह साबित कर दिया कि भारतीय महिला मुक्केबाज विश्व स्तर पर लगातार अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।
भारत के लिए इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों में सचिन सिवाच, जैस्मिन लंबोरिया, प्रीति पवार, साक्षी चौधरी, अरुंधति चौधरी, प्रिया घांघस और अंकुश पांघल शामिल रहे। वहीं नरेंद्र सहित तीन भारतीय मुक्केबाजों ने रजत पदक जीतकर भारत की कुल पदक संख्या को 10 तक पहुंचाया।
भारतीय मुक्केबाजी दल का यह प्रदर्शन कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। इससे पहले किसी भी कॉमनवेल्थ गेम्स संस्करण में भारत ने मुक्केबाजी में 7 स्वर्ण पदक नहीं जीते थे। इस उपलब्धि ने भारतीय मुक्केबाजी के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत को दुनिया के सामने साबित कर दिया।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय मुक्केबाजी में हुए बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाओं और खिलाड़ियों की मेहनत का परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर साफ दिखाई दे रहा है। पुरुषों के साथ-साथ महिला मुक्केबाजों का शानदार प्रदर्शन यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में भारत विश्व मुक्केबाजी में और अधिक मजबूत दावेदार बन सकता है।
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों का यह प्रदर्शन देश के खेल इतिहास के सुनहरे अध्यायों में शामिल हो गया है। खिलाड़ियों की इस ऐतिहासिक सफलता पर पूरे देश में खुशी की लहर है। खेल प्रेमी, पूर्व खिलाड़ी और विभिन्न राज्यों की सरकारें विजेता खिलाड़ियों को बधाई दे रही हैं।
JANPAD NEWS 24 UP की ओर से भारतीय मुक्केबाजी टीम के सभी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और सहयोगी स्टाफ को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। पूरे देश को अपने खिलाड़ियों पर गर्व है। उम्मीद है कि भारतीय मुक्केबाज आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों और ओलंपिक में भी इसी तरह शानदार प्रदर्शन कर तिरंगे का मान बढ़ाते रहेंगे।
