मुजफ्फरनगर में फर्जी डिग्री बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़: 15 हजार का इनामी समेत तीन गिरफ्तार, बिना डिग्री अस्पताल चला रहा था आरोपी।

मुजफ्फरनगर में फर्जी डिग्री बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़: 15 हजार का इनामी समेत तीन गिरफ्तार, बिना डिग्री अस्पताल चला रहा था आरोपी।

मुजफ्फरनगर | जनपद न्यूज़ 24 यूपी | विशेष रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए फर्जी मेडिकल डिग्री और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। छपार थाना पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की संयुक्त कार्रवाई में 15 हजार रुपये के इनामी आरोपी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में शामिल एक व्यक्ति बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के हरिद्वार में अस्पताल का संचालन कर रहा था।

पुलिस का कहना है कि यह गिरोह केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि कई राज्यों में अपना नेटवर्क फैलाकर लोगों को फर्जी मेडिकल डिग्रियां उपलब्ध करा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है।

आईजीआरएस शिकायत से खुला मामला।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजय कुमार वर्मा ने बताया कि मामले का खुलासा आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त एक शिकायत के आधार पर हुआ। शिकायत मिलने के बाद छपार थाने में मुकदमा दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि शेरपुर निवासी इमलाख उर्फ इमलाक मोटी रकम लेकर फर्जी शैक्षणिक डिग्रियां और अन्य कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का काम करता था। उसके खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज होने के कारण पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 15 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा था।

मुखबिर की सूचना पर हुई गिरफ्तारी।

जांच के दौरान मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने ताजपुर रजवाहे के पास घेराबंदी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इमलाख उर्फ इमलाक, डॉ. वी.के. गौतम और डॉ. मंसूर उलहक के रूप में हुई है।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 32 विजिटिंग कार्ड, छह खाली लैटरहेड, चार भरे हुए लैटरहेड, चार मेडिकल अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट, छह मरीजों की बुकलेट, तीन मोबाइल फोन और एक कार बरामद की है। इन दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों तक भी पहुंचा जा सके।

बी.फार्मा, डी.फार्मा और बीएएमएस की बनती थीं फर्जी डिग्रियां

पूछताछ में मुख्य आरोपी इमलाख ने पुलिस को बताया कि वह बी.फार्मा, डी.फार्मा और बीएएमएस जैसी मेडिकल शिक्षा से जुड़ी फर्जी डिग्रियां तैयार कराता था। इन डिग्रियों के माध्यम से कई लोगों को डॉक्टर बनाकर अस्पताल और क्लीनिक संचालित करने में मदद की जाती थी।

 

इमलाख ने यह भी स्वीकार किया कि उसे पहले उत्तराखंड एसटीएफ भी इसी प्रकार के मामले में गिरफ्तार कर चुकी है और वह लगभग दो वर्ष जेल में रह चुका है। जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर से यही अवैध कारोबार शुरू कर दिया।

बिना डिग्री चला रहा था अस्पताल।

पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपी डॉ. वी.के. गौतम ने पुलिस को बताया कि उसके पास कोई वैध मेडिकल डिग्री नहीं है। इसके बावजूद वह हरिद्वार में अस्पताल का संचालन कर रहा था।

पुलिस के अनुसार, उसने बीएएमएस की फर्जी डिग्री तैयार कराने के लिए करीब छह लाख रुपये खर्च किए थे। यह खुलासा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है।

वहीं, आरोपी डॉ. मंसूर उलहक ने स्वीकार किया कि उसने गौतम से रुपये लेकर अपना कमीशन काटने के बाद बाकी रकम इमलाख को पहुंचाई थी।

कई गंभीर मामलों में आरोपी है इमलाख।

एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि मुख्य आरोपी इमलाख के खिलाफ पहले से धोखाधड़ी, जालसाजी, हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं।

पुलिस का मानना है कि आरोपी लंबे समय से फर्जी डिग्री तैयार करने का संगठित नेटवर्क चला रहा था और कई राज्यों में उसके संपर्क मौजूद हैं।

स्वास्थ्य विभाग के साथ होगी संयुक्त जांच।

एसएसपी ने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. सुनील तेवतिया के सहयोग से विशेष टीम गठित की जा रही है। यह टीम फर्जी डिग्रियों के आधार पर चिकित्सा कार्य कर रहे लोगों की पहचान करेगी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराई हैं और कितने अस्पताल या क्लीनिक ऐसे लोगों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।

लोगों की जान से हो रहा था खिलवाड़।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार के गिरोह केवल आर्थिक अपराध ही नहीं करते, बल्कि लोगों के जीवन और स्वास्थ्य को भी गंभीर खतरे में डालते हैं। बिना वैध योग्यता वाले लोगों द्वारा इलाज किए जाने से मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

इसी कारण पुलिस इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में कार्रवाई कर रही है।

आगे की कार्रवाई जारी।

फिलहाल तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है, जहां से अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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