बाजार में गिरते दाम, लागत भी नहीं निकल रही किसानों में सरकार के फैसले को लेकर नाराजगीआलू किसानों पर मार! 6.5 रुपये किलो सरकारी खरीद से बढ़ी मुश्किलें।

बाजार में गिरते दाम, लागत भी नहीं निकल रही किसानों में सरकार के फैसले को लेकर नाराजगी आलू किसानों पर मार! 6.5 रुपये किलो सरकारी खरीद से बढ़ी मुश्किलें।

बाजार में गिरते दाम, लागत भी नहीं निकल रही—किसानों में सरकार के फैसले को लेकर नाराजगी बदायूं से बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां आलू किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। आलू की गिरती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने 6.5 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद को मंजूरी दी है, लेकिन इस फैसले से किसानों को राहत के बजाय नुकसान की आशंका बढ़ गई है।मंडियों में पहले से ही आलू के दाम 600 से 800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहे थे। ऐसे में सरकार द्वारा 650 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय करने के बाद बाजार में कीमतें और गिरकर 600-700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं।किसानों का कहना है कि उनकी लागत ही 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक आती है। वहीं कोल्ड स्टोरेज, बोरियों और ढुलाई का खर्च अलग से उठाना पड़ता है, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है।जानकारों के मुताबिक इस साल आलू का बंपर उत्पादन हुआ है, जिससे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, गुजरात और कर्नाटक में भी कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। बाजार में गिरते दाम, लागत भी नहीं निकल रही—किसानों में सरकार के फैसले को लेकर नाराजगी हालात ऐसे हैं कि फरवरी में ही कई जगह आलू के दाम 200 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गए थे।किसान संगठनों ने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए मांग की है कि खरीद दर कम से कम 10 से 12 रुपये प्रति किलो तय की जाए, ताकि किसानों को कुछ राहत मिल सके।फिलहाल अधिकांश आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा जा चुका है और बाजार में अधिक आपूर्ति के चलते कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार किसानों को राहत देने के लिए दर बढ़ाएगी या फिर किसानों को नुकसान झेलना पड़ेगा।बाजार में गिरते दाम, लागत भी नहीं निकल रही—किसानों में सरकार के फैसले को लेकर नाराजगी

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