
यूपी में स्मार्ट प्रीपेड मीटर जांच पर बड़ा सवाल! बिना सुविधा वाली लैब में हो रही जांच, बिलिंग में गड़बड़ी का आरोपउत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मीटरों की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे फर्जीवाड़ा करार दिया है।परिषद का कहना है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की जांच जिस लेसा लैब में कराई जा रही है, वहां पर्याप्त हाईटेक सुविधाएं ही मौजूद नहीं हैं। इतना ही नहीं, एमडीएम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की जांच के लिए वहां कोई विशेषज्ञ भी उपलब्ध नहीं है।परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा के अनुसार, तकनीकी जांच कमेटी गुपचुप तरीके से काम कर रही है, जो पूरी तरह पारदर्शिता के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जांच में स्मार्ट मीटर के सभी महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स—एमडीएम, एचईएस, आईटी-ओटी सिस्टम, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर की गहन जांच जरूरी है।साथ ही, मीटर की कार्यक्षमता को परखने के लिए 45 डिग्री तापमान, वोल्टेज के उतार-चढ़ाव और 35 केवी सर्ज टेस्ट जैसे जरूरी परीक्षण भी किए जाने चाहिए।अवधेश वर्मा ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2012 में आईआईटी कानपुर में हुई जांच में दो कंपनियों के मीटर फेल हो चुके हैं, और वही कंपनियां आज स्मार्ट प्रीपेड मीटर बना रही हैं। ऐसे में पावर कॉरपोरेशन की अपनी लैब में निष्पक्ष जांच पर सवाल उठना स्वाभाविक है।हालांकि, पावर कॉरपोरेशन लगातार यह दावा करता रहा है कि सभी स्मार्ट मीटर सही तरीके से काम कर रहे हैं और चेक मीटर व स्मार्ट मीटर की रीडिंग में कोई अंतर नहीं है।फिलहाल, उपभोक्ता परिषद ने पूरे मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम से कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।यूपी में स्मार्ट प्रीपेड मीटर जांच पर बड़ा सवाल! बिना सुविधा वाली लैब में हो रही जांच, बिलिंग में गड़बड़ी का आरोप।