उझानी में कूड़ा निस्तारण व्यवस्था ध्वस्त, MRF सेंटर ने कूड़ा लेने से किया इनकार; पालिका परिसर में खड़े हुए कूड़े से लदे वाहन।

उझानी में कूड़ा निस्तारण व्यवस्था ध्वस्त, MRF सेंटर ने कूड़ा लेने से किया इनकार; पालिका परिसर में खड़े हुए कूड़े से लदे वाहन।

उझानी (बदायूं), 15 जून। नगर में कूड़ा निस्तारण व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है। नगर पालिका द्वारा प्रतिदिन घर-घर से कूड़ा एकत्रित किया जा रहा है, लेकिन उसके निस्तारण की समुचित व्यवस्था न होने के कारण समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। सोमवार को स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब कूड़े से लदे नगर पालिका के कई वाहन MRF सेंटर पर पहुंचे, लेकिन वहां जगह न होने की बात कहकर कूड़ा लेने से मना कर दिया गया। इसके बाद मजबूरी में सभी वाहन पालिका परिसर में ही खड़े कर दिए गए।

इस घटनाक्रम ने नगर की सफाई व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर प्रशासन स्वच्छता और साफ-सफाई के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित दिखाई दे रही है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में शहर को गंभीर स्वच्छता और स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।

महीनों से बनी हुई है समस्या।

स्थानीय लोगों के अनुसार नगर में कूड़ा निस्तारण की समस्या कोई नई नहीं है। पिछले कई महीनों से यह मुद्दा लगातार बना हुआ है। नगर पालिका द्वारा प्रतिदिन टनों कूड़ा एकत्रित किया जाता है, लेकिन उसके निस्तारण के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से हालात बिगड़ते जा रहे हैं।

कई बार ऐसा देखा गया है कि जब कूड़े के निस्तारण की व्यवस्था नहीं हो पाती तो उसे शहर के बाहरी क्षेत्रों या खाली पड़ी जमीनों पर डाल दिया जाता है। इससे आसपास रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बदबू, गंदगी और प्रदूषण के कारण लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।

नागरिकों का फूटता है गुस्सा।

जानकारी के अनुसार जब 8 से 10 दिनों तक कूड़ा इधर-उधर जमा रहता है तो स्थिति और भी खराब हो जाती है। कूड़े के ढेरों से उठने वाली दुर्गंध और फैलती गंदगी से परेशान नागरिकों का गुस्सा अक्सर नगर पालिका के कर्मचारियों और वाहन चालकों पर निकलता है।

कई बार ऐसी नौबत आ चुकी है कि नाराज लोगों ने कूड़ा लेकर पहुंचे वाहनों को वहां से भगा दिया। वाहन चालकों का कहना है कि वे केवल अपना काम करते हैं, लेकिन निस्तारण की व्यवस्था न होने के कारण उन्हें जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ता है। इससे कर्मचारियों में भी असुरक्षा की भावना बनी रहती है।

ईओ ने कहा— जानकारी नहीं, करेंगे समाधान का प्रयास।

जब इस पूरे मामले को लेकर नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी (ईओ) मणि सैनी से बात की गई तो उन्होंने मामले की जानकारी होने से इनकार किया। उनका कहना था कि उन्हें इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी स्थिति है तो जानकारी लेकर समस्या के समाधान का प्रयास किया जाएगा।

हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर की सबसे बड़ी समस्याओं में शामिल कूड़ा निस्तारण के मुद्दे से यदि जिम्मेदार अधिकारी ही अनभिज्ञ हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का मानना है कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

बरसात से पहले बढ़ी चिंता।

नगरवासियों की सबसे बड़ी चिंता आगामी बरसात को लेकर है। यदि यही स्थिति कुछ दिन और बनी रही तो शहर के विभिन्न मोहल्लों में कूड़े के ढेर लगना तय माना जा रहा है। बारिश के दौरान कूड़े से निकलने वाला दूषित पानी नालियों और सड़कों पर फैल सकता है, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि खुले में पड़े कूड़े के ढेर मच्छरों और मक्खियों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं। इससे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, डायरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में प्रशासन को समय रहते प्रभावी कदम उठाने होंगे।

स्थायी समाधान की मांग।

नगर के सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि कूड़ा निस्तारण की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। उनका कहना है कि केवल कूड़ा एकत्रित कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके वैज्ञानिक और व्यवस्थित निस्तारण की भी मजबूत व्यवस्था होनी चाहिए।

फिलहाल नगर पालिका परिसर में खड़े कूड़े से लदे वाहन इस बात की गवाही दे रहे हैं कि उझानी की सफाई व्यवस्था गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और नगर पालिका पर टिकी हैं कि वह इस समस्या का समाधान कितनी जल्दी निकाल पाती है, ताकि नगरवासियों को गंदगी और संभावित बीमारियों के खतरे से राहत मिल सके।

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JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।

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