भारतीय स्क्वैश में इतिहास: अनाहत सिंह बनीं विश्व जूनियर चैंपियन, पहली भारतीय खिलाड़ी के नाम दर्ज हुई स्वर्णिम उपलब्धि।
नई दिल्ली। भारतीय खेल जगत के लिए शनिवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब युवा स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप 2026 के महिला सिंगल्स वर्ग का खिताब जीतकर देश का नाम रोशन कर दिया। उन्होंने फाइनल मुकाबले में मिस्र की प्रतिभाशाली खिलाड़ी रुकैया सलेम को लगातार तीन गेमों में हराकर न केवल विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया, बल्कि इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का खिताब जीतने वाली भारत की पहली खिलाड़ी भी बन गईं।

विश्व रैंकिंग में 20वें स्थान पर काबिज और टूर्नामेंट की शीर्ष वरीयता प्राप्त अनाहत सिंह ने फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से सीधे गेमों में मात दी। पूरे मुकाबले के दौरान भारतीय खिलाड़ी का दबदबा साफ दिखाई दिया। उन्होंने बेहतरीन तकनीक, तेज़ रफ्तार और सटीक शॉट्स के दम पर अपने प्रतिद्वंद्वी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया।
पिछले वर्ष के कांस्य से इस बार स्वर्ण तक का सफर।
अनाहत सिंह का यह सफर लगातार मेहनत और उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम है। वर्ष 2025 में उन्होंने इसी विश्व जूनियर चैंपियनशिप में सेमीफाइनल तक पहुंचकर कांस्य पदक अपने नाम किया था। उस समय भी उनके खेल की काफी सराहना हुई थी, लेकिन इस बार उन्होंने अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाते हुए सीधे खिताब पर कब्जा कर लिया।
एक वर्ष के भीतर अपने खेल में उल्लेखनीय सुधार करते हुए उन्होंने यह साबित कर दिया कि निरंतर अभ्यास, आत्मविश्वास और समर्पण से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। उनकी यह उपलब्धि भारत में स्क्वैश जैसे खेल के विकास के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
21 साल पुराना इंतजार हुआ खत्म।
भारतीय स्क्वैश इतिहास में इससे पहले 2005 में जोशना चिनप्पा विश्व जूनियर चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंची थीं। हालांकि वह खिताब जीतने से चूक गई थीं और उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा था।
करीब दो दशक बाद अनाहत सिंह ने इस अधूरे सपने को पूरा कर दिया। उन्होंने न केवल फाइनल तक पहुंचने का कारनामा दोहराया बल्कि स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय स्क्वैश के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया।
पूरे टूर्नामेंट में रहा शानदार प्रदर्शन।
अनाहत सिंह ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने शुरुआती दौर से लेकर फाइनल तक लगातार प्रभावशाली जीत दर्ज की और किसी भी मुकाबले में दबाव में नजर नहीं आईं। उनकी फिटनेस, मानसिक मजबूती और आक्रामक खेल शैली ने उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग पहचान दिलाई।
फाइनल मुकाबले में पहले गेम को 11-3 से आसानी से जीतने के बाद उन्होंने दूसरे गेम में भी लय बरकरार रखी और 11-7 से जीत हासिल की। तीसरे गेम में मिस्र की खिलाड़ी ने संघर्ष जरूर किया, लेकिन अनाहत ने संयम बनाए रखते हुए 11-9 से मुकाबला अपने नाम कर लिया।
भारतीय खेलों के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि।
अनाहत सिंह की यह जीत केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि भारतीय खेल जगत के लिए भी गर्व का विषय है। हाल के वर्षों में भारत ने बैडमिंटन, शतरंज, एथलेटिक्स, निशानेबाजी और क्रिकेट के साथ-साथ स्क्वैश में भी लगातार अपनी पहचान मजबूत की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अनाहत की यह उपलब्धि देश के हजारों युवा खिलाड़ियों को स्क्वैश जैसे खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। इससे भारत में इस खेल की लोकप्रियता बढ़ने की भी उम्मीद है।
कम उम्र में विश्व जूनियर चैंपियन बनने के बाद अब अनाहत सिंह से सीनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीदें बढ़ गई हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह इसी तरह मेहनत और अनुशासन बनाए रखती हैं तो आने वाले वर्षों में भारत के लिए राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और ओलंपिक स्तर पर भी पदक जीतने की प्रबल दावेदार बन सकती हैं।
उनकी सफलता यह संदेश देती है कि प्रतिभा, समर्पण और निरंतर मेहनत के बल पर भारतीय खिलाड़ी विश्व स्तर पर किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं।
भारत की इस युवा स्टार ने विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का खिताब जीतकर न केवल इतिहास रचा है, बल्कि देश के खेल इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय भी जोड़ दिया है। पूरे देश को उनकी इस शानदार उपलब्धि पर गर्व है और खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में अनाहत सिंह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए कई और बड़ी सफलताएं हासिल करेंगी।

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