बिजली संकट से बेहाल बदायूं, अघोषित विद्युत कटौती से जनता परेशान; 2027 चुनाव में पड़ सकता है असर।

बिजली संकट से बेहाल बदायूं, अघोषित विद्युत कटौती से जनता परेशान; 2027 चुनाव में पड़ सकता है असर।

बदायूं। जनपद में लगातार हो रही विद्युत कटौती ने आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर नगर इलाकों तक लोग बार-बार बिजली गुल होने और लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने से परेशान हैं। दिन हो या रात, कई क्षेत्रों में अचानक बिजली कट जाने के कारण लोगों के घरेलू कामकाज से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित हो रही है। गर्मी और उमस के बीच बिजली की अनियमित आपूर्ति ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित घंटों तक और शहरी क्षेत्रों में लगभग 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन कई इलाकों में जमीनी स्थिति इन दावों से अलग नजर आ रही है। उपभोक्ताओं के मुताबिक बिजली कटौती का कोई स्पष्ट शेड्यूल दिखाई नहीं देता। कभी दिन में कई बार बिजली चली जाती है तो कभी रात के समय लंबे अंतराल तक आपूर्ति बंद रहती है।

बार-बार बिजली जाने से घरेलू काम प्रभावित।

विद्युत कटौती का सीधा असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में घरेलू कामकाज के अलावा पानी की मोटर, छोटे कारोबार और कृषि से जुड़े कार्य भी बिजली पर निर्भर हैं। ऐसे में लंबे समय तक बिजली न आने से लोगों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कई ग्रामीणों का कहना है कि रात में भोजन के समय अचानक बिजली गुल हो जाती है। इसके बाद परिवारों को अंधेरे में समय गुजारना पड़ता है। जिन घरों में इन्वर्टर या जनरेटर की सुविधा नहीं है, वहां समस्या और गंभीर हो जाती है। बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को उमस भरी रातों में विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी असर।

बिजली कटौती का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी दिखाई दे रहा है। परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का कहना है कि रात में बिजली चले जाने पर पढ़ाई बाधित हो जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों के पास वैकल्पिक रोशनी और बिजली की व्यवस्था सीमित होने के कारण बच्चों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है।

अभिभावकों का कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा की अनियमितता का असर सीधे बच्चों की शिक्षा और परिवार की दिनचर्या पर पड़ता है। उनका कहना है कि यदि विद्युत आपूर्ति निर्धारित समय के अनुसार रहे तो विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिल सकता है।

फीडर और अधिकारियों से संपर्क में भी परेशानी।

उपभोक्ताओं की एक बड़ी शिकायत यह भी है कि बिजली जाने के बाद उन्हें यह जानकारी नहीं मिल पाती कि आपूर्ति कब तक बहाल होगी। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार फीडर या संबंधित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन फोन व्यस्त मिलने, बंद होने या संपर्क नहीं हो पाने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती।

लोगों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में तकनीकी खराबी के कारण बिजली आपूर्ति बाधित है तो विभाग की ओर से उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी मिलनी चाहिए। इससे लोगों को कम से कम यह पता रहेगा कि समस्या कब तक दूर होने की उम्मीद है। सूचना के अभाव में उपभोक्ताओं की परेशानी और नाराजगी दोनों बढ़ती हैं।

बढ़ती कटौती बनी राजनीतिक चर्चा का विषय।

बिजली आपूर्ति को लेकर बढ़ता असंतोष अब स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चा का विषय भी बनने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली, सड़क, पानी और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं सीधे आम जनता के जीवन से जुड़ी हैं। ऐसे मुद्दों पर लंबे समय तक परेशानी बनी रहने पर इसका असर जनता के बीच स्वाभाविक रूप से दिखाई देता है।

कई ग्रामीणों ने कहा कि यदि विद्युत व्यवस्था में समय रहते सुधार नहीं किया गया तो आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर भी पड़ सकता है। कुछ लोगों का कहना है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में बिजली आपूर्ति जैसे स्थानीय और बुनियादी मुद्दे मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बन सकते हैं।

हालांकि, चुनाव पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा, यह भविष्य की राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल लोगों की प्राथमिक मांग बेहतर और नियमित विद्युत आपूर्ति है।

बढ़े विद्युत भार और तकनीकी कारणों का हवाला।

वहीं विद्युत विभाग की ओर से आपूर्ति में व्यवधान के पीछे तकनीकी कारणों और बढ़े हुए विद्युत भार को प्रमुख वजह बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने से कई क्षेत्रों में विद्युत व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर फॉल्ट, ट्रांसफार्मर की समस्या, लाइन में खराबी और अन्य तकनीकी कारणों से भी आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

विभागीय स्तर पर इन समस्याओं को दूर करने के प्रयास किए जाने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जहां भी तकनीकी समस्या सामने आती है, उसे ठीक करने के लिए संबंधित टीमों को लगाया जाता है।

उपभोक्ताओं को स्थायी समाधान का इंतजार।

बदायूं के उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि विद्युत आपूर्ति में स्थायी सुधार चाहिए। लोगों की मांग है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार बिजली उपलब्ध कराई जाए तथा अनावश्यक और अघोषित कटौती को कम किया जाए।

ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए बिजली की नियमित आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं नगर क्षेत्रों में घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ दुकानदार और अन्य व्यवसायी भी बिजली पर निर्भर हैं। ऐसे में लगातार बिजली कटौती का असर आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।

लोगों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में तकनीकी खराबी या आपात स्थिति के कारण बिजली बंद करनी पड़े तो विभाग की ओर से उपभोक्ताओं को समय रहते सूचना दी जानी चाहिए। शिकायतों के त्वरित निस्तारण और अधिकारियों से बेहतर संवाद की व्यवस्था भी जरूरी है।

फिलहाल बदायूं में बिजली कटौती को लेकर लोगों में नाराजगी बनी हुई है। उपभोक्ता उम्मीद कर रहे हैं कि विद्युत विभाग जल्द ही आपूर्ति व्यवस्था में सुधार करेगा और बार-बार होने वाली कटौती से राहत मिलेगी। अब देखना होगा कि विभाग बढ़ते विद्युत भार और तकनीकी समस्याओं से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है और उपभोक्ताओं को नियमित बिजली आपूर्ति कब तक मिल पाती है।

जनपद न्यूज़ 24 यूपी।

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