प्रयागराज में निकला 72 ताबूत का जुलूस, इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को नम आंखों से किया गया याद।

प्रयागराज में निकला 72 ताबूत का जुलूस, इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को नम आंखों से किया गया याद।

27वें वर्ष आयोजित हुआ पारंपरिक जुलूस, हजारों अकीदतमंद हुए शामिल।

प्रयागराज। माहे मोहर्रम के बाद 15 सफर के मौके पर प्रयागराज में अकीदत, गम और कुर्बानी की यादों से जुड़ा 72 ताबूत का पारंपरिक जुलूस पूरे श्रद्धा और सम्मान के साथ निकाला गया। यह ऐतिहासिक जुलूस अपने 27वें वर्ष में आयोजित किया गया, जिसमें शहर ही नहीं बल्कि दूर-दराज़ क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। जुलूस के दौरान पूरे माहौल में “या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं और कर्बला के शहीदों की याद में लोगों की आंखें नम हो गईं।

जुलूस की शुरुआत इमामबाड़ा छम्मन खां से हुई। सबसे पहले अंजुमन मजलूमियां की ओर से नौहाख्वानी और सीना-जनी का आयोजन किया गया। अंजुमन के साहिबे बयाज़ जनाब राजन साहब, अरशद, आरिश सहित अन्य अकीदतमंदों ने दर्दभरे नौहे पढ़े और शहीद-ए-कर्बला की याद में मातम किया। नौहों की आवाज़ से पूरा वातावरण गमगीन हो उठा और मौजूद लोगों ने पूरी अकीदत के साथ इस रस्म में हिस्सा लिया।

इसके बाद जुलूस में अलम, 72 ताबूत और शबीहे जुलजनाह निकाले गए। यह जुलूस कर्बला की उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है, जब हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने इंसानियत, न्याय और सच्चाई की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। इस अवसर पर लोगों ने इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश किया।

जुलूस का सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला, जब छोटे-छोटे बच्चों ने पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ 72 ताबूतों को अपने कंधों पर उठाया। बच्चों ने इन ताबूतों को इमामबाड़ा छम्मन खां से उठाकर इमामबाड़ा मीर हुसैनी तक पहुंचाया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने बच्चों का हौसला बढ़ाया और कर्बला की कुर्बानी को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के इस प्रयास की सराहना की।

जुलूस में हजारों की संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर दुआएं मांगीं और अपनी-अपनी मन्नतें पूरी होने की दुआ की। पूरे मार्ग पर धार्मिक अनुशासन और आपसी भाईचारे का सुंदर दृश्य देखने को मिला। जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत किया और अकीदतमंदों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गईं।

माहे मोहर्रम और 15 सफर का यह आयोजन केवल शोक का प्रतीक नहीं, बल्कि इंसानियत, सब्र, कुर्बानी और सत्य के लिए संघर्ष का संदेश भी देता है। कर्बला की घटना आज भी पूरी दुनिया को अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े रहने और मानवता की रक्षा के लिए हर बलिदान देने की प्रेरणा देती है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस जुलूस में शामिल होकर इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानी को याद करते हैं।

आयोजकों ने बताया कि पिछले 27 वर्षों से यह परंपरा लगातार निभाई जा रही है और हर साल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को कर्बला की शहादत और उसके संदेश से अवगत कराना है, ताकि इंसानियत, भाईचारे और न्याय की भावना समाज में बनी रहे।

जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के भी व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरे मार्ग पर तैनात रहे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। अकीदतमंदों ने भी प्रशासन के सहयोग की सराहना की और पूरे अनुशासन के साथ जुलूस में भाग लिया।

15 सफर के इस अवसर पर निकला 72 ताबूत का जुलूस एक बार फिर प्रयागराज की गंगा-जमुनी तहजीब, धार्मिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल बनकर सामने आया। कर्बला के शहीदों की याद में निकले इस जुलूस ने हर अकीदतमंद को भावुक कर दिया और इंसानियत के लिए दी गई महान कुर्बानी को फिर से जीवंत कर दिया।

रिपोर्ट: आमिर मिर्ज़ा

जनपद न्यूज़ 24 यूपी | प्रयागराज

Leave a Comment