तिसुआ में मानवता को झकझोर देने वाला दृश्य: कुत्तों के हमले से घायल गौवंश के बछड़े ने उपचार के दौरान तोड़ा दम, नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई।

तिसुआ में मानवता को झकझोर देने वाला दृश्य: कुत्तों के हमले से घायल गौवंश के बछड़े ने उपचार के दौरान तोड़ा दम, नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई।

फतेहगंज पूर्वी (बरेली)। थाना क्षेत्र फतेहगंज पूर्वी के ग्राम तिसुआ में एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने वहां मौजूद लोगों की आंखों को नम कर दिया। हाईवे किनारे एक नन्हा गौवंशीय बछड़ा कई दिनों से गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ा हुआ था। बताया जा रहा है कि आवारा कुत्तों ने उस पर हमला कर उसे बुरी तरह नोच डाला था। घायल बछड़ा दर्द और तड़प के बीच जीवन के लिए संघर्ष कर रहा था, लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था।

मिली जानकारी के अनुसार शाम के समय स्थानीय गौसेवकों और समाजसेवियों को सूचना मिली कि तिसुआ गांव के पास हाईवे किनारे एक छोटा बछड़ा गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ा है। सूचना मिलते ही गौसेवा से जुड़े लोग तत्काल मौके पर पहुंचे और स्थिति देखकर स्तब्ध रह गए। बछड़े की हालत इतनी खराब थी कि उसके शरीर पर सैकड़ों मक्खियां और कीड़े लगे हुए थे। कुत्तों के हमले से उसके शरीर के कई हिस्से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बछड़ा पिछले तीन-चार दिनों से उसी स्थान पर पड़ा हुआ था और असहनीय दर्द सह रहा था। उसकी उम्र इतनी कम थी कि वह ठीक से चलना भी नहीं सीख पाया था, लेकिन उसे जिस पीड़ा से गुजरना पड़ा, उसने सभी का दिल दहला दिया। मौके पर पहुंचे लोगों ने बताया कि नन्हा बछड़ा लगातार दर्द से कराह रहा था और सहायता की प्रतीक्षा कर रहा था।

सूचना मिलते ही गौसेवकों ने बिना समय गंवाए पशु चिकित्सक को मौके पर बुलाया। इस दौरान उनके साथ अखिलेश बाजपेई, हेड कांस्टेबल नीरज कुमार, पुष्पेंद्र गंगवार तथा उनके साथी वीरेश यादव सहित अन्य लोग मौजूद रहे। जब सभी ने बछड़े की स्थिति देखी तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। उपस्थित लोगों ने बताया कि इतनी छोटी उम्र में किसी जीव को इतनी भयानक पीड़ा सहते देखना अत्यंत दुखद था।

पशु चिकित्सक ने मौके पर पहुंचकर तत्काल उपचार शुरू किया। बछड़े को पानी पिलाया गया, दवाइयां दी गईं और ग्लूकोज चढ़ाने की व्यवस्था की गई। सभी लोग पूरी कोशिश कर रहे थे कि किसी तरह उसकी जान बच जाए। उपचार के दौरान लोग उसके सिर पर हाथ फेरकर उसे सहारा देने का प्रयास करते रहे। हर कोई यही उम्मीद कर रहा था कि शायद समय रहते उपचार मिलने से उसकी जान बच जाए।

हालांकि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। काफी प्रयासों और उपचार के बावजूद नन्हा बछड़ा जीवन की जंग हार गया और उसने अंतिम सांस ले ली। बछड़े की मौत होते ही वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। कई लोगों ने कहा कि यदि समय रहते उसकी सूचना मिल जाती और उपचार उपलब्ध हो जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।

बछड़े की मृत्यु के बाद उपस्थित लोगों ने उसे सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देने का निर्णय लिया। अखिलेश बाजपेई, विकास ठाकुर, पुष्पेंद्र गंगवार तथा अन्य सहयोगियों ने स्वयं फावड़ा लेकर गड्ढा खोदा और पूरे सम्मान के साथ बछड़े का अंतिम संस्कार किया। इस दौरान वहां मौजूद सभी लोगों ने मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

घटना ने एक बार फिर आवारा पशुओं और पशु क्रूरता के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घायल और असहाय पशुओं की समय पर देखभाल और उपचार के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही लोगों ने समाज से भी अपील की है कि यदि कहीं कोई घायल पशु दिखाई दे तो उसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग या गौसेवकों को दें।

तिसुआ की यह घटना केवल एक बछड़े की मौत की कहानी नहीं है, बल्कि यह मानवता, संवेदनशीलता और पशु संरक्षण की जिम्मेदारी का भी संदेश देती है। नन्हे बछड़े की दर्दनाक मौत ने हर संवेदनशील व्यक्ति को भावुक कर दिया और यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि मूक पशुओं की सुरक्षा और देखभाल के लिए समाज को और अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है।

JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।

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