‘चवन्नी से रुपया’ बयान पर गरमाई यूपी की सियासत, मायावती ने अखिलेश यादव से मांगी माफी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के राष्ट्रीय लोकदल (RLD) और उसके प्रमुख जयंत चौधरी को लेकर दिए गए ‘चवन्नी से रुपया बना दिया’ वाले बयान पर विवाद बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख जयंत चौधरी के पलटवार के बाद अब बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती भी खुलकर उनके समर्थन में उतर आई हैं। मायावती ने अखिलेश यादव के बयान को अमर्यादित, अशोभनीय और अहंकारी बताते हुए उनसे जयंत चौधरी, उनके परिवार और जाट समाज से माफी मांगने की मांग की है।
मायावती ने अखिलेश पर साधा निशाना।

बसपा प्रमुख मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट के जरिए समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर कई गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। मायावती ने कहा कि अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल और उसके नेता के बारे में इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं है।
मायावती के मुताबिक, अखिलेश यादव को न केवल राष्ट्रीय लोकदल और उसके नेता से माफी मांगनी चाहिए, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री एवं किसान नेता स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान करने के लिए जाट समाज से भी माफी मांगनी चाहिए।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। ऐसे में नेताओं के बीच बढ़ती बयानबाजी को चुनावी रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या था अखिलेश यादव का ‘चवन्नी’ वाला बयान?।
दरअसल, अखिलेश यादव ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान पुराने राजनीतिक सहयोगियों का जिक्र करते हुए कहा था कि गठबंधन में कई ऐसे लोग उनके साथ आए, जिन्हें समाजवादी पार्टी ने आगे बढ़ाया। इसी दौरान उन्होंने कहा था कि “हमने चवन्नी का रुपया बना दिया था, तब भी हमें छोड़कर चले गए।” इस टिप्पणी को राष्ट्रीय लोकदल और जयंत चौधरी से जोड़कर देखा गया।
इसके बाद RLD प्रमुख जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव पर पलटवार किया। जयंत चौधरी ने कहा कि यदि सियासी लड़ाई में सस्ते शब्द बोलने थे तो उनका नाम लेकर बोलते, लेकिन जाट समाज को इसमें क्यों घसीटा गया। उन्होंने इस तरह के रवैये को अहंकार बताते हुए कहा कि ऐसा आचरण राजनीतिक पतन की ओर ले जाता है।
मायावती ने सपा के पुराने गठबंधनों का भी किया जिक्र।
मायावती ने अपने बयान में केवल मौजूदा विवाद तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाजवादी पार्टी के साथ बसपा के पुराने राजनीतिक संबंधों और गठबंधनों का भी जिक्र किया।
उन्होंने वर्ष 1993 में उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन बनने और उसके बाद गठबंधन टूटने का उल्लेख करते हुए 2 जून 1995 के लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड को भी याद किया। मायावती ने आरोप लगाया कि सपा के कथित अहंकारी राजनीतिक रवैये के कारण उस समय गठबंधन टूट गया था और बाद में स्टेट गेस्ट हाउस कांड जैसी गंभीर घटना सामने आई।
मायावती ने आगे अखिलेश यादव के नेतृत्व में हुए सपा-बसपा गठबंधन का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव के बाद यह गठबंधन भी अधिक समय तक नहीं चल सका और दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए।
‘गठबंधन में अपना काम निकालना जानती है सपा’।
बसपा प्रमुख ने समाजवादी पार्टी पर गठबंधन की राजनीति को लेकर भी निशाना साधा। मायावती का आरोप है कि सपा राजनीतिक जरूरत के मुताबिक सहयोगी दलों के साथ संबंध बनाती है और काम निकलने के बाद उनका रवैया बदल जाता है।
उन्होंने सपा पर दूसरी पार्टियों के नेताओं के लिए आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया। मायावती ने सर्वसमाज के लोगों से समाजवादी पार्टी की राजनीति को लेकर सावधान रहने की अपील की।
हालांकि, मायावती के इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से इस खबर के लिखे जाने तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए उनके आरोपों को राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
PDA को लेकर भी मायावती का हमला।
मायावती ने अखिलेश यादव के PDA राजनीतिक फॉर्मूले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार PDA में ‘P’ का अलग-अलग अर्थ बताते हैं। मायावती ने दावा किया कि सपा पिछड़े वर्गों में अपनी जाति के अलावा अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और सवर्ण समाज, विशेष रूप से ब्राह्मण समाज की वास्तविक हितैषी नहीं रही है।
बसपा प्रमुख ने सपा की पिछली सरकारों को लेकर भी कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सपा सरकारों के दौरान दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और सवर्ण समाज के लोगों के साथ उत्पीड़न हुआ तथा कानून-व्यवस्था को लेकर भी गंभीर स्थिति रही। ये दावे मायावती के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और इनके संबंध में सपा की ओर से अलग पक्ष सामने आना बाकी है।
2027 चुनाव से पहले सियासी समीकरणों पर नजर।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। ऐसे में सपा, बसपा और RLD के बीच सामने आ रही बयानबाजी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट राजनीति का अपना अलग प्रभाव है। जयंत चौधरी की ओर से अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया और अब मायावती के समर्थन ने इस विवाद को और राजनीतिक रंग दे दिया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस घटनाक्रम के बीच सपा विरोधी राजनीतिक खेमे में भी हलचल बढ़ी है।
मायावती ने अपने बयान के अंत में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर लोगों से समाजवादी पार्टी को सत्ता में नहीं आने देने की अपील की। वहीं दूसरी ओर सपा और उसके समर्थक इस पूरे राजनीतिक विवाद को अलग नजरिए से देख सकते हैं।
फिलहाल ‘चवन्नी से रुपया’ वाला बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब देखना होगा कि अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से मायावती और जयंत चौधरी के आरोपों पर क्या जवाब दिया जाता है और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह विवाद राजनीतिक समीकरणों को किस दिशा में प्रभावित करता है।

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