गंगा दशहरा पर कछला घाट अलर्ट: डूबने की घटनाओं के बाद सुरक्षा दावों पर उठे सवाल, लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को लेकर प्रशासन सतर्क
उझानी/बदायूं, 24 मई।
गंगा दशहरा के पावन अवसर पर बदायूं जनपद के प्रसिद्ध कछला गंगा घाट पर एक बार फिर लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना जताई जा रही है। श्रद्धालु मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के लिए दूर-दराज के जिलों से पहुंचेंगे, लेकिन पर्व से ठीक पहले घाट पर लगातार सामने आ रही डूबने की घटनाओं ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सुरक्षा दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिला प्रशासन और तहसील प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि हर बड़े पर्व पर व्यवस्थाओं की बातें तो खूब होती हैं, मगर जमीन पर हालात अक्सर कमजोर दिखाई देते हैं। यही कारण है कि इस बार श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा को लेकर चिंता साफ दिखाई दे रही है।
लगातार हादसों ने बढ़ाई चिंता
कछला गंगा घाट पर बीते कुछ समय में डूबने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें कई लोगों की जान तक जा चुकी है। हर हादसे के बाद प्रशासन द्वारा जांच, सुरक्षा बढ़ाने और सतर्कता के निर्देशों की बातें जरूर की जाती हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद हालात फिर पुराने जैसे हो जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घाट पर कई ऐसे स्थान हैं जहां पानी अधिक गहरा है, लेकिन वहां पर्याप्त चेतावनी बोर्ड या मजबूत बैरिकेडिंग नहीं की जाती। भीड़ अधिक होने के कारण श्रद्धालु अनजाने में खतरनाक हिस्सों तक पहुंच जाते हैं और हादसे हो जाते हैं।
गंगा दशहरा जैसे बड़े पर्व पर जब लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, तब यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और तैरना न जानने वाले लोगों के लिए स्थिति गंभीर हो सकती है।
प्रशासनिक दावों की खुल रही पोल?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हर बार पर्व से पहले अधिकारी घाट का निरीक्षण करते हैं, अधीनस्थ कर्मचारियों को दिशा-निर्देश दिए जाते हैं और मीडिया में सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही होती है।
लोगों का कहना है कि कई बार घाटों पर पर्याप्त पुलिस बल नहीं होता, गोताखोर सीमित संख्या में तैनात किए जाते हैं और भीड़ नियंत्रण के इंतजाम भी कमजोर साबित होते हैं।
कुछ स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि पर्व के दौरान घाट पर अव्यवस्थित भीड़, वाहनों का दबाव और नावों की अधिक आवाजाही से हालात और बिगड़ जाते हैं। यदि समय रहते प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
नाव संचालन को लेकर भी उठी मांग
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से नाव संचालन को लेकर सख्त नियम लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि कई नाविक बिना सुरक्षा उपकरणों के ही नाव चलाते हैं, जो यात्रियों की जान के साथ बड़ा खिलवाड़ है।
लोगों ने मांग की है कि बिना लाइफ जैकेट, रस्सी, ट्यूब और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरणों के किसी भी नाव को संचालन की अनुमति न दी जाए। साथ ही नावों की क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पर्व के समय कुछ नाविक अधिक कमाई के लालच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर देते हैं। ऐसे में प्रशासन को विशेष निगरानी रखने की जरूरत है।
गहराई वाले क्षेत्रों में हो बैरिकेडिंग
श्रद्धालुओं ने मांग की है कि घाट के गहरे और खतरनाक हिस्सों में मजबूत बैरिकेडिंग की जाए ताकि कोई भी व्यक्ति गलती से वहां तक न पहुंच सके।
कई लोगों का कहना है कि घाट पर स्पष्ट संकेतक बोर्ड लगाए जाने चाहिए, जिन पर लिखा हो कि कौन सा क्षेत्र सुरक्षित है और कौन सा क्षेत्र खतरनाक। इससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को भी जानकारी मिल सकेगी।
इसके अलावा घाट पर लगातार माइकिंग कर श्रद्धालुओं को सतर्क किया जाना भी जरूरी बताया जा रहा है।
गोताखोर और जल पुलिस की संख्या बढ़ाने की मांग
गंगा दशहरा के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए स्थानीय लोगों ने गोताखोरों, जल पुलिस और एसडीआरएफ टीमों की संख्या बढ़ाने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि कई बार हादसे के बाद बचाव दल देर से पहुंचता है, जिससे जान बचाने का मौका कम हो जाता है। यदि घाट पर पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित गोताखोर मौजूद रहें तो हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़ वाले पर्वों में रेस्क्यू टीमों की तैनाती सबसे अहम होती है। ऐसे आयोजनों में हर समय अलर्ट मोड पर रहने वाली टीमों की जरूरत होती है।
जाम और अव्यवस्था भी बड़ी चुनौती
गंगा दशहरा के दौरान कछला घाट क्षेत्र में भारी भीड़ के चलते भीषण जाम की स्थिति बन जाती है। दूर-दूर तक वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कई बार एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को भी रास्ता नहीं मिल पाता।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस बार ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर पहले से ठोस प्लान तैयार किया जाए।
रूट डायवर्जन, अस्थायी पार्किंग स्थल और अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था की जाए ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़े।
व्यापारियों का कहना है कि अव्यवस्थित पार्किंग और सड़क किनारे खड़े वाहनों की वजह से हालात और बिगड़ जाते हैं। ऐसे में पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना बेहद जरूरी है।
घाट पर सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई है। पर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से घाट पर गंदगी फैल जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को सफाई कर्मियों की अतिरिक्त तैनाती करनी चाहिए और घाट क्षेत्र में लगातार सफाई अभियान चलाना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण मिल सके।
इसके अलावा श्रद्धालुओं से भी अपील की जा रही है कि वे गंगा नदी को प्रदूषित न करें और प्लास्टिक या अन्य कचरा नदी में न फेंकें।
श्रद्धालुओं ने प्रशासन से की ठोस कार्रवाई की मांग
श्रद्धालुओं का कहना है कि इस बार सिर्फ कागजी खानापूर्ति न हो, बल्कि जमीन पर प्रभावी इंतजाम दिखाई दें।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि—
घाट पर मजबूत बैरिकेडिंग की जाए
पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए
गोताखोर और जल पुलिस की संख्या बढ़ाई जाए
नाव संचालन पर सख्ती की जाए
घाट पर लगातार निगरानी रखी जाए
ट्रैफिक और पार्किंग की बेहतर व्यवस्था हो
श्रद्धालुओं के लिए मेडिकल कैंप लगाए जाएं
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम उठाए गए तो पर्व सकुशल संपन्न कराया जा सकता है।
प्रशासन के सामने बड़ी परीक्षा
गंगा दशहरा जैसे बड़े धार्मिक आयोजन प्रशासन के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होते। लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण, सफाई व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होती है।
इस बार कछला घाट पर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लगातार सामने आ रही डूबने की घटनाओं के बाद लोग प्रशासनिक दावों से ज्यादा जमीन पर कार्रवाई देखना चाहते हैं।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और तहसील प्रशासन इस बार कितनी गंभीरता से तैयारियां करता है और श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने में कितना सफल होता है।
गंगा दशहरा आस्था का महापर्व है और श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन और स्नान के लिए बड़ी श्रद्धा के साथ घाट पर पहुंचते हैं। ऐसे में जरूरी है कि सुरक्षा और व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए, ताकि पर्व शांतिपूर्ण और सकुशल संपन्न हो सके।
JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।