क्या उद्धव ठाकरे की शिवसेना फिर टूटने की कगार पर? सांसदों के पार्टी छोड़ने की अटकलों के बीच संजय राउत का बड़ा दावा
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को लेकर नए राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि पार्टी के कई सांसद शिवसेना (यूबीटी) का साथ छोड़कर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। इन अटकलों ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों ने हाल ही में दिल्ली में एकनाथ शिंदे से मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि यह मुलाकात 7 जून को हुई थी और इसमें भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं पर चर्चा की गई। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन खबरों ने उद्धव ठाकरे खेमे की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी का कोई भी सांसद शिवसेना (यूबीटी) छोड़ने वाला नहीं है और सभी सांसद पूरी मजबूती के साथ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में काम कर रहे हैं।
संजय राउत ने इन खबरों को राजनीतिक साजिश करार देते हुए भाजपा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह सब एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।
पत्रकारों से बातचीत में राउत ने कहा कि पहले राजनीतिक माहौल में भ्रम पैदा किया जाता है और फिर पार्टी में टूट की अफवाहें फैलाई जाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह रणनीति विपक्षी दलों को कमजोर करने के उद्देश्य से अपनाई जा रही है।
राउत ने कहा कि उनके सभी सांसद लगातार पार्टी नेतृत्व के संपर्क में हैं और किसी भी सांसद के पार्टी छोड़ने की बात पूरी तरह निराधार है।
उद्धव ठाकरे लगातार सांसदों के संपर्क में।
संजय राउत ने कहा कि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे लगातार सांसदों और वरिष्ठ नेताओं से संपर्क बनाए हुए हैं। पार्टी संगठन को मजबूत करने और भविष्य की रणनीति को लेकर नियमित बैठकें हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को पार्टी छोड़नी थी, वे पहले ही जा चुके हैं। वर्तमान में पार्टी के भीतर किसी तरह का असंतोष नहीं है और सभी नेता आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।
राउत ने यह भी कहा कि अभी न तो महाराष्ट्र में कोई बड़ा चुनाव होने वाला है और न ही लोकसभा चुनाव निकट हैं। ऐसे में सांसदों के टूटने की चर्चाओं का कोई राजनीतिक आधार नजर नहीं आता।
संजय राउत ने पार्टी छोड़ चुके नेताओं पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब किसी नेता के मन में निष्ठा की जगह स्वार्थ आ जाता है तो वह वर्षों पुराने राजनीतिक संबंधों और विचारधारा को भी भूल जाता है।
उन्होंने कहा कि जिसे जाना होता है, वह किसी भी परिस्थिति में चला जाता है। ऐसे लोगों को न पद रोक पाता है और न सम्मान। राउत के अनुसार, राजनीतिक निष्ठा और विचारधारा से समझौता करने वाले नेता अंततः अपने स्वार्थ के आधार पर फैसले लेते हैं।
2022 की बगावत की यादें फिर ताजा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई बगावत के बाद से ही शिवसेना (यूबीटी) लगातार राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। उस समय पार्टी के कई विधायक और सांसद उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर शिंदे गुट में शामिल हो गए थे, जिसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला था।
इसी वजह से जब भी पार्टी के भीतर असंतोष या टूट की कोई चर्चा सामने आती है तो उसे गंभीरता से देखा जाता है। हालांकि इस बार उद्धव ठाकरे गुट इन खबरों को पूरी तरह अफवाह बता रहा है।
टीएमसी की चर्चाओं से बढ़ी राजनीतिक बहस।
इसी बीच कुछ राजनीतिक हलकों में पश्चिम बंगाल की राजनीति का भी जिक्र किया जा रहा है। चर्चा यह है कि यदि किसी बड़े दल में लगातार असंतोष बढ़ता है तो उसका असर संगठनात्मक मजबूती पर पड़ सकता है। हालांकि विभिन्न राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक तथ्यों का इंतजार करना आवश्यक माना जा रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले महीनों में कई नए समीकरण बन सकते हैं। ऐसे में शिवसेना (यूबीटी), भाजपा, शिंदे गुट और अन्य दलों की रणनीतियों पर सभी की नजर बनी हुई है।
आगे क्या।
फिलहाल शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व सांसदों के टूटने की सभी खबरों को खारिज कर रहा है। वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। यदि आने वाले दिनों में किसी सांसद या नेता की ओर से कोई बड़ा बयान सामने आता है तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार शिवसेना (यूबीटी) के सभी सांसद पार्टी के साथ होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि राजनीतिक घटनाक्रम किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।