एआई से फर्जी आधार बनाकर ऑनलाइन लोन घोटाला: जनसेवा केंद्र संचालक गिरफ्तार, पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे।

एआई से फर्जी आधार बनाकर ऑनलाइन लोन घोटाला: जनसेवा केंद्र संचालक गिरफ्तार, पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे।

फतेहगंज पश्चिमी (बरेली)।

उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध और एआई तकनीक के दुरुपयोग का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बाराबंकी पुलिस ने स्थानीय पुलिस की मदद से फतेहगंज पश्चिमी क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए एक ऐसे जनसेवा केंद्र संचालक को हिरासत में लिया है, जिस पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल कर फर्जी आधार कार्ड बनाने और उसके जरिए ऑनलाइन लोन हासिल करने का गंभीर आरोप है।

पकड़े गए आरोपी की पहचान सोमेश यदुवंशी के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने बेहद शातिर तरीके से एक व्यक्ति के नाम पर हूबहू फर्जी आधार कार्ड तैयार किया, उसमें नया मोबाइल नंबर अपडेट कराया और फिर बैंक खाता खुलवाकर ऑनलाइन लोन स्वीकृत करा लिया।

इस पूरे मामले ने साइबर सुरक्षा, डिजिटल दस्तावेजों की विश्वसनीयता और एआई तकनीक के गलत इस्तेमाल को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों ने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है।

बाराबंकी पुलिस की बड़ी कार्रवाई।

जानकारी के अनुसार बाराबंकी पुलिस लंबे समय से ऑनलाइन लोन फ्रॉड और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह की तलाश में जुटी हुई थी। जांच के दौरान पुलिस को कुछ डिजिटल सुराग मिले, जिनके आधार पर टीम बरेली जिले के फतेहगंज पश्चिमी पहुंची।

शुक्रवार शाम बाराबंकी पुलिस टीम के प्रभारी सुब्बा सिंह चौहान अपनी टीम के साथ स्थानीय पुलिस के सहयोग से आरोपी के ठिकाने पर पहुंचे और उसे हिरासत में ले लिया।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी लंबे समय से जनसेवा केंद्र संचालित कर रहा था और वहीं से डिजिटल दस्तावेजों से जुड़ा काम किया जाता था। प्रारंभिक जांच में कई संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले हैं।

एआई तकनीक से तैयार किया गया फर्जी आधार कार्ड

पुलिस जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल कर फर्जी आधार कार्ड तैयार किया।

अधिकारियों के अनुसार अपराधियों ने पहले किसी व्यक्ति की मूल पहचान संबंधी जानकारी जुटाई। इसके बाद एआई आधारित एडिटिंग और डिजिटल मॉर्फिंग तकनीक का इस्तेमाल कर एक ऐसा आधार कार्ड तैयार किया गया, जो देखने में बिल्कुल असली लग रहा था।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेज इतने पेशेवर तरीके से तैयार किए गए थे कि पहली नजर में असली और नकली के बीच फर्क करना बेहद मुश्किल था।

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने साइबर अपराधियों को नए हथियार दे दिए हैं। अब अपराधी बेहद कम समय में ऐसे दस्तावेज तैयार कर लेते हैं, जिन्हें पहचान पाना आम लोगों के लिए ही नहीं बल्कि कई बार संस्थाओं के लिए भी चुनौती बन जाता है।

एक ही दिन में पूरा खेल।

जांच में सामने आया कि अपराधियों ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से इस फ्रॉड को अंजाम दिया।

सबसे पहले फर्जी आधार कार्ड तैयार किया गया। इसके बाद उसी दिन उस आधार कार्ड में नया मोबाइल नंबर अपडेट कराया गया। मोबाइल नंबर अपडेट होने के तुरंत बाद बैंक में नया खाता खुलवाया गया।

इसके बाद आरोपी ने ऑनलाइन लोन के लिए आवेदन किया। चूंकि सभी दस्तावेज सिस्टम में वैध दिखाई दे रहे थे, इसलिए लोन तुरंत स्वीकृत हो गया।

पुलिस के अनुसार अपराधियों की तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस दिन मोबाइल नंबर अपडेट हुआ, उसी दिन लोन की रकम खाते से निकाल भी ली गई।

बैंकिंग सिस्टम पर भी उठे सवाल।

इस मामले ने बैंकिंग और डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी आधार कार्ड में अचानक मोबाइल नंबर अपडेट हो और उसी दिन बैंक खाता खुलकर ऑनलाइन लोन स्वीकृत हो जाए, तो ऐसी गतिविधियों को हाई रिस्क कैटेगरी में रखकर अतिरिक्त जांच होनी चाहिए।

हालांकि कई डिजिटल प्लेटफॉर्म तेजी से लोन स्वीकृत करने की होड़ में गहन जांच प्रक्रिया को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका फायदा साइबर अपराधी उठा रहे हैं।

पुलिस को मिले अहम डिजिटल सुराग।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान कई डिजिटल उपकरण भी खंगाले जा रहे हैं। कंप्यूटर, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके साथ कोई संगठित गिरोह भी जुड़ा हुआ है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि अब तक कितने लोगों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और कितने ऑनलाइन लोन फ्रॉड किए गए।

पुलिस का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे बड़ा नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका है।

जनसेवा केंद्रों की भूमिका पर उठे सवाल।

घटना सामने आने के बाद जनसेवा केंद्रों की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगह जनसेवा केंद्रों पर पहचान संबंधी दस्तावेजों का काम होता है और यदि वहां गलत हाथों में तकनीक पहुंच जाए तो उसका दुरुपयोग आसानी से किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और प्रशासन को ऐसे केंद्रों की नियमित जांच करनी चाहिए और डिजिटल गतिविधियों की मॉनिटरिंग बढ़ानी चाहिए।

साइबर अपराध का बदलता स्वरूप।

यह मामला इस बात का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है कि अब साइबर अपराध पारंपरिक तरीकों से कहीं आगे बढ़ चुका है।

पहले जहां अपराधी फर्जी दस्तावेज हाथ से तैयार करते थे, वहीं अब एआई तकनीक की मदद से बेहद वास्तविक दिखने वाले डिजिटल दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं।

साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में ऐसे अपराध और बढ़ सकते हैं, इसलिए बैंकिंग संस्थाओं, सरकारी एजेंसियों और आम नागरिकों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

लोगों को किया जा रहा जागरूक।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लोगों को भी अपने दस्तावेजों और मोबाइल नंबर से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति के आधार कार्ड या बैंक खाते में बिना जानकारी के बदलाव होता है तो तुरंत संबंधित विभाग और पुलिस को सूचना देनी चाहिए।

विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे अपने आधार कार्ड को अनजान लोगों के साथ साझा न करें और समय-समय पर आधार की अपडेट हिस्ट्री भी चेक करते रहें।

आरोपी से पूछताछ जारी।

फिलहाल पुलिस आरोपी सोमेश यदुवंशी से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

संभावना जताई जा रही है कि आरोपी ने कई अन्य लोगों के नाम पर भी फर्जी दस्तावेज तैयार किए हो सकते हैं।

पुलिस जल्द ही मामले में और खुलासे कर सकती है।

एआई तकनीक का गलत इस्तेमाल बना चुनौती।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक आज जहां लोगों की जिंदगी आसान बना रही है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल कानून व्यवस्था और साइबर सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई से फोटो, दस्तावेज और आवाज तक को बेहद वास्तविक तरीके से तैयार किया जा सकता है। यही वजह है कि साइबर अपराधी अब नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सरकार और साइबर एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि तकनीक के सकारात्मक उपयोग को बढ़ावा दिया जाए और उसके दुरुपयोग पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए।

पुलिस ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील।

पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के ऑनलाइन लोन, बैंकिंग कॉल या दस्तावेज संबंधी गतिविधियों में सावधानी बरतें।

यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत करें।

फिलहाल इस पूरे मामले ने प्रदेशभर में हलचल मचा दी है और लोग यह जानकर हैरान हैं कि अब एआई तकनीक का इस्तेमाल फर्जी आधार कार्ड बनाकर बैंक लोन ठगी में भी किया जाने लगा है।

JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।

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