रजनीकांत की राजनीतिक ताकत के आगे झुकेंगे विजय? तमिलनाडु की सियासत में फिर तेज हुई ‘थलाइवा’ बनाम ‘थलपति’ चर्चा।

रजनीकांत की राजनीतिक ताकत के आगे झुकेंगे विजय? तमिलनाडु की सियासत में फिर तेज हुई ‘थलाइवा’ बनाम ‘थलपति’ चर्चाचेन्नई।

तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर सिनेमा और सियासत का संगम चर्चा का विषय बना हुआ है। सुपरस्टार थलपति विजय की राजनीतिक सफलता और मुख्यमंत्री पद की ओर बढ़ते कदमों के बीच अब रजनीकांत की राजनीतिक ताकत और प्रभाव को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

तमिलनाडु में सिनेमा और राजनीति का रिश्ता दशकों पुराना रहा है। एमजीआर, जयललिता और करुणानिधि जैसे नेताओं ने फिल्मों से राजनीति तक का सफर तय कर राज्य की सत्ता पर लंबे समय तक प्रभाव बनाए रखा।

अब इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अभिनेता विजय भी तेजी से राजनीतिक केंद्र में आते दिखाई दे रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता युवाओं और पहली बार वोट करने वाले मतदाताओं के बीच तेजी से बढ़ी है।

अपनी फिल्मों में सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने वाले विजय अब तमिल राजनीति के बड़े चेहरे के रूप में उभर रहे हैं। उनके समर्थकों का दावा है कि विजय आने वाले समय में राज्य की सत्ता बदलने की क्षमता रखते हैं।

हालांकि, तमिल राजनीति में रजनीकांत का प्रभाव अब भी बेहद मजबूत माना जाता है। भले ही उन्होंने सक्रिय राजनीति में पूरी तरह कदम नहीं रखा हो, लेकिन उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक पकड़ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि क्या विजय अपनी बढ़ती राजनीतिक ताकत के बावजूद रजनीकांत के प्रभाव से आगे निकल पाएंगे।इसी बीच 1996 का वह चर्चित किस्सा भी फिर सुर्खियों में आ गया है।

जब रजनीकांत ने तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता सरकार के खिलाफ खुलकर बयान दिया था। माना जाता है कि उस समय उनके एक बयान ने तमिलनाडु की राजनीति की दिशा बदल दी थी।

अब विजय की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बाद तमिलनाडु में ‘थलाइवा बनाम थलपति’ की चर्चा तेज हो गई है। सिनेमा से राजनीति तक पहुंचे इन दोनों बड़े चेहरों को लेकर राज्य की जनता और राजनीतिक दलों की नजरें आने वाले चुनावों पर टिकी हुई हैं।

रजनीकांत की राजनीतिक ताकत के आगे झुकेंगे विजय? तमिलनाडु की सियासत में फिर तेज हुई ‘थलाइवा’ बनाम ‘थलपति’ चर्चा।

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