गणपति बप्पा मोरया के जयघोष से गूंजा कछला गंगा घाट, श्रद्धालुओं ने नम आंखों से दी विदाई
बदायूं। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर घरों और पूजा पंडालों में विराजमान भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन-अर्चन करने के बाद श्रद्धालुओं ने उन्हें भावपूर्ण विदाई दी। गणपति विसर्जन के अवसर पर कछला गंगा घाट पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमाओं को लेकर गंगा तट पहुंचे, जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती के बाद गणपति बप्पा की प्रतिमाओं का गंगा में विसर्जन किया गया।

गणपति विसर्जन के दौरान पूरा कछला गंगा घाट ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया’ के जयघोष से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं में भगवान श्री गणेश के प्रति गहरी आस्था और उत्साह दिखाई दिया। इस दौरान महिलाओं, बच्चों और युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। गणपति की विदाई के समय कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और उन्होंने अगले वर्ष भगवान गणेश के पुनः आगमन की कामना की।
श्री गणेश चतुर्थी के अवसर पर नगर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं ने अपने घरों तथा विभिन्न पंडालों में भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना की थी। कई दिनों तक श्रद्धालुओं द्वारा भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की गई। अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर विधि-विधान से पूजा करने के बाद श्रद्धालुओं ने प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए कछला गंगा घाट पहुंचाया।
गंगा तट पर पूजा-अर्चना के बाद हुआ विसर्जन

कछला गंगा घाट पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने सबसे पहले गंगा मैया की पूजा-अर्चना की। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमाओं के समक्ष आरती की गई और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति एवं मंगल की कामना की गई। पूजा-अर्चना और आरती के पश्चात श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन किया।
इस दौरान गंगा घाट पर भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की धुन पर गणपति बप्पा के जयकारे लगाते हुए नजर आए। विसर्जन यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चे और महिलाएं भी पूरे उत्साह के साथ गणपति बप्पा की विदाई में शामिल हुए।
यज्ञाचार्य गायत्री परिवार ने दिया पर्यावरण और स्वच्छता का संदेश

इस अवसर पर यज्ञाचार्य गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने भगवान श्री गणेश के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के प्रतीक हैं तथा उन्हें प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है। उन्होंने कहा कि श्री गणेश उत्सव श्रद्धा और आस्था के साथ-साथ पर्यावरण, स्वच्छता और सामाजिक सद्भाव का संदेश भी देता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्री गणेश के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प निरंतर बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के साथ समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को भी ध्यान में रखना चाहिए। स्वच्छता बनाए रखना और पर्यावरण की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
गाजे-बाजे के साथ निकली गणेश विसर्जन यात्रा
नगर के मुहल्ला नझियाई से श्री गणेश विसर्जन यात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। यात्रा में श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। वातावरण में गणपति बप्पा मोरया के जयकारे गूंजते रहे। ढोल-नगाड़ों की धुन पर श्रद्धालु भक्ति में झूमते हुए नजर आए।

विसर्जन यात्रा के दौरान भगवान श्री गणेश की प्रतिमा को श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक लेकर कछला गंगा घाट पहुंचे। यात्रा के दौरान लोगों में उत्साह और भक्ति का भाव दिखाई दिया। महिलाओं और बच्चों ने भी यात्रा में सहभागिता की।
कछला गंगा घाट पर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की प्रतिमा की पूजा-अर्चना की और आरती उतारी। इसके बाद परिवार में सुख-समृद्धि, शांति और मंगल की प्रार्थना करते हुए प्रतिमा का श्रद्धापूर्वक विसर्जन किया गया।
महिलाओं और बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
गणपति विसर्जन कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों की भी सक्रिय सहभागिता रही। महिलाएं भक्ति गीतों और जयकारों के बीच भगवान गणेश की विदाई में शामिल हुईं, वहीं बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ यात्रा का हिस्सा बने। श्रद्धालुओं के चेहरे पर भगवान गणेश की विदाई का भावुक असर साफ दिखाई दे रहा था।
गणपति विसर्जन के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री गणेश से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की प्रार्थना की तथा अगले वर्ष फिर से भगवान गणेश के आगमन की कामना की।
श्रद्धा और उल्लास के बीच हुआ प्रतिमा विसर्जन
गणपति विसर्जन के अवसर पर कछला गंगा तट पर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला। एक ओर जहां श्रद्धालु भगवान गणेश की विदाई को लेकर भावुक दिखाई दिए, वहीं दूसरी ओर ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच उत्सव का माहौल भी बना रहा।
इस अवसर पर उमाशंकर शर्मा, रिंकू शर्मा, टूविकल, मोहित, धर्मेंद्र शर्मा, अजीत, हृदेश, सोना तिवारी, सोनू गुड्डू, श्रद्धा, सृष्टि, अनिल, वीरेंद्र, जूही, रमन, संतोष आदि मौजूद रहे।
श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन करने के बाद गंगा में विसर्जन किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा से अपने परिवार और समाज के लिए सुख-समृद्धि, शांति और मंगल की कामना की।
अगले वर्ष फिर आगमन की कामना
गणपति विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्री गणेश को भावपूर्ण विदाई देते हुए अगले वर्ष पुनः उनके आगमन की कामना की। श्रद्धालुओं ने कहा कि भगवान गणेश की आराधना से उन्हें सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक शांति की अनुभूति होती है।
गणपति बप्पा की विदाई के साथ ही कछला गंगा घाट पर धार्मिक आयोजन का समापन हुआ, लेकिन श्रद्धालुओं के मन में भगवान गणेश के प्रति आस्था और भक्ति का भाव बना रहा। ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश को विदाई दी।
गणेश उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने जहां धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया, वहीं स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव का संदेश भी दिया। कछला गंगा घाट पर आयोजित गणपति विसर्जन श्रद्धा, भक्ति और सामूहिक सहभागिता का यादगार अवसर बन गया।
