संजू सैमसन को बाहर करने का फैसला बना गौतम गंभीर के लिए सबसे मुश्किल, बोले- वह इकलौती रात थी जब मैं सो नहीं पाया।

संजू सैमसन को बाहर करने का फैसला बना गौतम गंभीर के लिए सबसे मुश्किल, बोले- वह इकलौती रात थी जब मैं सो नहीं पाया

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर अपने कार्यकाल के दौरान कई बड़े और चुनौतीपूर्ण फैसलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। मैदान पर टीम के प्रदर्शन के साथ-साथ उनकी चयन संबंधी रणनीति भी लगातार सुर्खियों में रहती है। हालांकि गंभीर आमतौर पर अपने फैसलों को लेकर काफी स्पष्ट दिखाई देते हैं, लेकिन उन्होंने अब खुलासा किया है कि एक चयन ऐसा भी था जिसने उन्हें रातभर परेशान किया और वह ठीक से सो नहीं पाए।

यह मामला युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को भारतीय टी20 टीम में मौका देने और अनुभवी बल्लेबाज संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने से जुड़ा है। गंभीर ने बताया कि यह फैसला उनके टी20 कोचिंग करियर के सबसे कठिन फैसलों में से एक था। उन्होंने यह बात खुद संजू सैमसन से भी साझा की थी।

इंग्लैंड दौरे पर लिया गया था बड़ा फैसला

भारतीय टीम के इंग्लैंड दौरे के दौरान पांच मैचों की टी20 सीरीज में यह चयन चर्चा का केंद्र बना। इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआती मुकाबले के बाद भारतीय टीम प्रबंधन ने वैभव सूर्यवंशी को मौका देने का फैसला किया। इसके साथ ही संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठना पड़ा।

वैभव सूर्यवंशी के लिए यह मौका बेहद खास था, क्योंकि उन्होंने इसी मुकाबले में भारत के लिए अपना टी20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले वैभव को लेकर पहले से ही क्रिकेट जगत में काफी चर्चा थी। टीम प्रबंधन के सामने एक तरफ युवा खिलाड़ी का शानदार फॉर्म और दूसरी तरफ अनुभवी खिलाड़ी संजू सैमसन का प्रदर्शन व अनुभव था।

गौतम गंभीर ने जियोस्टार से बातचीत में इस फैसले को याद करते हुए बताया कि उनके दो साल के कोचिंग सफर में यह ऐसी रात थी जब वह सो नहीं पाए थे। गंभीर के मुताबिक, उन्होंने संजू को भी बताया था कि यह टी20 फॉर्मेट में उनके कोचिंग कार्यकाल का शायद सबसे कठिन फैसला था।

संजू सैमसन को बाहर करना आसान नहीं थाइस फैसले को कठिन बनाने की एक बड़ी वजह संजू सैमसन का हालिया प्रदर्शन और टीम में उनकी भूमिका थी। गंभीर के मुताबिक, एक ऐसे खिलाड़ी को बाहर करना मुश्किल था जिसे हाल ही में टी20 विश्व कप में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था।

गंभीर ने कहा कि जब किसी खिलाड़ी ने बड़े टूर्नामेंट में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो और उसके बाद कुछ ही मुकाबलों के बाद उसे बाहर करना पड़े, तो कोच के लिए यह आसान फैसला नहीं होता। यही वजह थी कि इस निर्णय ने उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशान किया।

गंभीर ने बताया कि उन्होंने संजू सैमसन से इस विषय पर सीधे और ईमानदारी से बातचीत की। उनका कहना था कि टीम में वैभव सूर्यवंशी की शानदार फॉर्म को नजरअंदाज करना उस समय मुश्किल था। टीम को सीरीज जीतने के लिए शीर्ष क्रम में रन बनाने वाले बल्लेबाज की जरूरत थी और टीम प्रबंधन को लगा कि वैभव उस समय यह भूमिका निभाने में सक्षम थे।

गंभीर ने संजू से की थी सीधी बातचीत

गौतम गंभीर ने इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह बताई कि उन्होंने संजू सैमसन को फैसले की वजह सीधे बताई थी। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच बेहद ईमानदार बातचीत हुई और संजू ने भी परिस्थितियों को समझा।

गंभीर के अनुसार, टीम में जब भी किसी एक खिलाड़ी को जगह मिलती है तो किसी दूसरे खिलाड़ी को बाहर बैठना पड़ता है। ऐसे में कोच और कप्तान के लिए फैसला लेना आसान नहीं होता। लेकिन भारतीय टीम के लिए खेलते या कोचिंग करते समय लक्ष्य हर सीरीज में बेहतर प्रदर्शन और जीत हासिल करना होता है।

गंभीर ने कहा कि उन्होंने संजू को बताया था कि वैभव उस समय जिस तरह की फॉर्म में थे, उसे देखते हुए यह फैसला लेना पड़ा। उनके मुताबिक संजू ने इस बातचीत को अच्छे भाव से लिया और परिस्थितियों को समझा।

वैभव की प्रतिभा और अनुभव के बीच बना संतुलन

वैभव सूर्यवंशी को लेकर टीम प्रबंधन का रुख भी दिलचस्प रहा है। युवा खिलाड़ी को मौका देने के साथ-साथ गंभीर ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल उम्र या प्रतिभा के आधार पर किसी खिलाड़ी की जगह स्थायी नहीं होती।

हाल ही में अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज में वैभव को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली। गंभीर ने कहा कि युवा खिलाड़ी को अपने मौके का इंतजार करना होगा। उनका जोर इस बात पर रहा कि लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के योगदान और निरंतरता को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

इससे साफ है कि टीम प्रबंधन के सामने केवल युवा प्रतिभा को आगे बढ़ाने का सवाल नहीं है, बल्कि अनुभवी खिलाड़ियों और उभरते सितारों के बीच सही संयोजन तैयार करने की चुनौती भी है।

सोशल मीडिया नहीं, टीम की जरूरत तय करती है प्लेइंग इलेवन

गौतम गंभीर ने यह भी स्पष्ट किया कि टीम की प्लेइंग इलेवन सोशल मीडिया की चर्चाओं या बाहरी दबाव के आधार पर तय नहीं होती। उनके अनुसार, ड्रेसिंग रूम में कप्तान और कोच मिलकर यह देखते हैं कि किसी मुकाबले को जीतने के लिए उस समय सबसे बेहतर संयोजन क्या हो सकता है।

गंभीर का कहना है कि जब कोई एक खिलाड़ी प्लेइंग इलेवन में आता है तो किसी दूसरे खिलाड़ी को बाहर बैठना ही पड़ता है। इसलिए हर चयन के पीछे टीम की जरूरत, खिलाड़ी की मौजूदा फॉर्म और मुकाबले की परिस्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं।

संजू की वापसी ने बढ़ाई प्रतिस्पर्धा

संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी के बीच यह प्रतिस्पर्धा भारतीय टी20 टीम में जगह के लिए जारी चर्चा का हिस्सा बन चुकी है। हालिया मुकाबलों में टीम प्रबंधन ने दोनों खिलाड़ियों को अलग-अलग परिस्थितियों में अवसर दिए हैं।

गंभीर के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि भारतीय टीम में किसी खिलाड़ी का नाम या पिछला प्रदर्शन अपने आप प्लेइंग इलेवन की गारंटी नहीं है। खिलाड़ियों को अपनी मौजूदा फॉर्म और टीम की जरूरत के मुताबिक लगातार प्रदर्शन करना होगा।

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा गंभीर के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि संजू सैमसन को बाहर कर वैभव सूर्यवंशी को मौका देने का फैसला उनके लिए इतना कठिन था कि उस रात उन्हें नींद नहीं आई। एक कोच के तौर पर मैदान पर लिए जाने वाले फैसलों के पीछे कितना दबाव और जिम्मेदारी होती है, गंभीर का यह खुलासा उसी का उदाहरण माना जा रहा है।

फिलहाल भारतीय क्रिकेट में संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी दोनों को लेकर चर्चाएं जारी हैं। एक ओर अनुभव और बड़े मुकाबलों में प्रदर्शन का महत्व है, तो दूसरी ओर युवा प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की चुनौती है। आने वाले मुकाबलों में टीम प्रबंधन इन दोनों खिलाड़ियों के बीच किस तरह संतुलन बनाता है, यह भारतीय टी20 क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण विषय बना रहेगा।

स्रोत: JioStar बातचीत के आधार पर प्रकाशित रिपोर्टें

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