
बदायूं सिंचाई परियोजना अब लागत बढ़ने और मंजूरी के अभाव में फंसी हुई है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद किसानों को अभी तक इसका फायदा नहीं मिला, जिससे यह योजना सवालों के घेरे में आ गई है।

14 साल बाद भी अधूरी बदायूं सिंचाई परियोजना — 630 करोड़ से बढ़कर 2184 करोड़, फिर भी काम ठप बरेली और बदायूं के सैकड़ों गांवों को सिंचाई के लिए भरपूर पानी देने का सपना दिखाने वाली बदायूं सिंचाई परियोजना आज भी अधूरी पड़ी है। करीब 14 साल पहले शुरू हुई यह परियोजना अब तक पूरी नहीं हो सकी, जबकि इस पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं।बताया जा रहा है कि वर्ष 2019 से इस परियोजना का काम पूरी तरह ठप पड़ा है। बाढ़ खंड के अधिकारियों के अनुसार, बजट न मिलने के कारण निर्माण कार्य रुक गया। परियोजना के लिए 2184.54 करोड़ रुपये का पुनरीक्षित बजट प्रस्ताव तैयार कर केंद्रीय जल आयोग को भेजा गया, लेकिन अब तक उसे मंजूरी नहीं मिल सकी।शुरुआत में इस परियोजना की लागत करीब 630 करोड़ रुपये थी, लेकिन समय के साथ यह बढ़ते-बढ़ते 2184 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। 14 साल बाद भी अधूरी बदायूं सिंचाई परियोजना — 630 करोड़ से बढ़कर 2184 करोड़, फिर भी काम ठपलागत बढ़ने के पीछे भूमि अधिग्रहण सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है। 2015 में किसानों ने मुआवजे की दर चार गुना बढ़ाने की मांग की, जिसके बाद परियोजना की लागत में भारी इजाफा हुआ।2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद सिंचाई मंत्री रहे धर्मपाल सिंह के कार्यकाल में रिवाइज्ड एस्टिमेट तैयार किया गया, जिससे लागत कई गुना बढ़ गई। 2019 में वित्त समिति और कैबिनेट स्तर पर मंजूरी मिलने के दावे भी किए गए, लेकिन इसके बावजूद जमीन पर काम शुरू नहीं हो सका।वर्तमान स्थिति यह है कि करीब 1250 किसानों से लगभग 900 हेक्टेयर जमीन खरीदने के लिए 1554 करोड़ रुपये की जरूरत है। परियोजना का प्रस्ताव एक बार फिर केंद्र को भेजा गया, लेकिन मंजूरी न मिलने के कारण मामला अटका हुआ है।इस परियोजना से बरेली और बदायूं के करीब साढ़े तीन सौ गांवों को सिंचाई की सुविधा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वर्षों बाद भी किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है।
14 साल बाद भी अधूरी बदायूं सिंचाई परियोजना — 630 करोड़ से बढ़कर 2184 करोड़, फिर भी काम ठप बदायूं सिंचाई परियोजना अब लागत बढ़ने और मंजूरी के अभाव में फंसी हुई है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद किसानों को अभी तक इसका फायदा नहीं मिला, जिससे यह योजना सवालों के घेरे में आ गई है।