मंदिर से चोरी हुए चांदी के जेवर ढाई साल बाद मंदिर परिसर में मिले, थैली में रखे थे आभूषण और दो हजार रुपये।

मंदिर से चोरी हुए चांदी के जेवर ढाई साल बाद मंदिर परिसर में मिले, थैली में रखे थे आभूषण और दो हजार रुपये।

चोर ने पत्र लिखकर मांगी माफी, कहा- शराब के नशे में की थी चोरी; मंदिर के सामान की मरम्मत के लिए छोड़े 2 हजार रुपये।

झालावाड़/बकानी। राजस्थान के झालावाड़ जिले के बकानी क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। करीब ढाई साल पहले नरसिंह मंदिर से चोरी हुए चांदी के आभूषण और अन्य सामान अचानक मंदिर परिसर में ही मिल गया। चोरी के सामान के साथ एक पत्र और दो हजार रुपये नकद भी मिले हैं। पत्र में चोरी करने वाले व्यक्ति ने शराब के नशे में वारदात करने की बात स्वीकार करते हुए माफी मांगी है। साथ ही मंदिर के सामान की मरम्मत के लिए दो हजार रुपये छोड़ने की बात भी पत्र में लिखी है।

जानकारी के अनुसार गांव के बीच स्थित नरसिंह मंदिर में करीब ढाई वर्ष पहले चोरी हुई थी। अज्ञात चोर मंदिर से चांदी के तीन मुकुट, एक छत्र, करीब 400 ग्राम चांदी के आभूषण, पीतल का सिंहासन और आरती का सामान चोरी कर ले गया था। घटना के बाद ग्रामीणों ने पुलिस से कई बार चोरी का खुलासा करने की मांग की थी, लेकिन लंबे समय तक मामले का पता नहीं चल सका।

सफाई के दौरान दिखाई दी थैली।

मंदिर के पुजारी मोहनलाल बैरागी के मुताबिक इन दिनों मंदिर में कथा का आयोजन चल रहा है। मंगलवार रात भजन संध्या के बाद बुधवार सुबह ग्रामीण देव-देवी का विमान लेकर बाहर गए थे। इसी दौरान मंदिर परिसर की सफाई की जा रही थी। सफाई के दौरान एक थैली दिखाई दी।

थैली को देखकर ग्रामीणों ने पहले उसे प्रसादी समझ लिया और एक ओर रख दिया। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि थैली के अंदर मंदिर से वर्षों पहले चोरी हुआ सामान हो सकता है। शाम करीब पांच बजे पूजा की तैयारी के दौरान थैली दोबारा नजर आई। इसके बाद जब थैली खोलकर देखी गई तो उसमें मंदिर से चोरी हुए चांदी के सामान के टुकड़े मिले।

थैली में चांदी के जेवरों के टुकड़ों के अलावा दो हजार रुपये नकद और एक पत्र भी रखा हुआ था। पत्र सामने आने के बाद पूरा मामला और भी चौंकाने वाला हो गया।

पत्र में लिखा- मुझे माफ कर देना।

पत्र में चोरी करने वाले व्यक्ति ने कथित तौर पर मंदिर में चोरी करने की बात स्वीकार की है। उसने लिखा कि उसने शराब के नशे में चोरी की वारदात की थी। इसके लिए उसने माफी मांगी। पत्र में मंदिर के सामान की मरम्मत के लिए दो हजार रुपये छोड़ने की बात भी लिखी गई है।

चोरी के सामान को इतने लंबे समय बाद उसी मंदिर परिसर में वापस रखे जाने से ग्रामीण भी हैरान हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर चोर कौन था और ढाई साल तक चोरी का सामान उसके पास कहां रहा। उसने पहचान सामने क्यों नहीं की और अब अचानक चोरी के सामान को मंदिर परिसर में वापस रखने का फैसला क्यों किया?

पहले चोरी में लाखों का सामान ले गया था चोर।

करीब ढाई साल पहले हुई चोरी में अज्ञात चोर मंदिर से चांदी के तीन मुकुट, एक छत्र और करीब 400 ग्राम चांदी के आभूषणों के अलावा पीतल का सिंहासन और आरती का सामान भी ले गया था। घटना के बाद ग्रामीणों में काफी नाराजगी थी और पुलिस से चोरी का जल्द खुलासा करने की मांग की गई थी।

हालांकि समय बीतने के बावजूद चोरी का राज नहीं खुल पाया। अब अचानक मंदिर परिसर में चोरी का सामान मिलने से पुराना मामला फिर चर्चा में आ गया है।

पुलिस जांच से सामने आ सकता है पूरा सच।

मंदिर परिसर में चोरी का सामान मिलने और उसके साथ पत्र मिलने के बाद अब यह जांच का विषय है कि पत्र किसने लिखा और वास्तव में चोरी करने वाला व्यक्ति कौन है। पत्र में शराब के नशे में चोरी करने की बात स्वीकार किए जाने के बावजूद उसकी पहचान अभी सामने नहीं आई है।

यदि पुलिस पत्र और बरामद सामान के आधार पर जांच आगे बढ़ाती है तो ढाई साल पुराने चोरी के मामले की कड़ियां जुड़ सकती हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा सकता है कि चोरी के बाद सामान इतने लंबे समय तक कहां रखा गया था और किस परिस्थिति में उसे वापस मंदिर में पहुंचाया गया।

फिलहाल मंदिर से चोरी हुआ सामान वापस मिलना ग्रामीणों के लिए राहत की बात है, लेकिन चोर की पहचान और चोरी की पूरी कहानी अभी भी रहस्य बनी हुई है। ढाई साल बाद मंदिर परिसर में चांदी के जेवर, नकदी और माफी मांगने वाला पत्र मिलने की घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

संपादक नवीन गोस्वामी।

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