एजी ऑफिस गेट के पास बुलडोजर कार्रवाई पर हंगामा, गरीब महिला दुकानदार की दुकान ढहाने का आरोप; नगर निगम पर भेदभाव के सवाल।
रोती-बिलखती रही महिला, सामान हटाने की मांग के बावजूद कार्रवाई का आरोप; स्थानीय लोगों ने कहा- बड़े अतिक्रमणों पर चुप्पी, छोटे दुकानदारों पर ही क्यों कार्रवाई।

प्रयागराज। सरोजिनी नायडू मार्ग स्थित महालेखाकार कार्यालय (एजी ऑफिस) के गेट के पास सोमवार को नगर निगम के अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब एक गरीब महिला दुकानदार की दुकान पर कार्रवाई की गई। स्थानीय लोगों और चश्मदीदों के मुताबिक, नगर निगम के अतिक्रमण विरोधी दस्ते ने कार्रवाई करते हुए दुकान का ढांचा ध्वस्त कर दिया और वहां रखा सामान भी जब्त कर लिया। कार्रवाई के दौरान महिला दुकानदार अधिकारियों और कर्मचारियों से कुछ समय की मोहलत देने की गुहार लगाती रही, लेकिन आरोप है कि उसकी एक नहीं सुनी गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान महिला काफी परेशान नजर आई और अपनी दुकान तथा सामान को बचाने के लिए हाथ जोड़कर अधिकारियों से अपील करती रही। महिला का कहना था कि यदि उसे कुछ समय दे दिया जाता तो वह अपना सामान स्वयं हटा लेती। इसके बावजूद कार्रवाई आगे बढ़ाई गई और दुकान को ढहा दिया गया। सामान जब्त किए जाने के बाद महिला की परेशानी और बढ़ गई।
कार्रवाई के बाद मौके पर जुटे लोग।
नगर निगम की कार्रवाई की जानकारी मिलते ही आसपास के दुकानदार, राहगीर और स्थानीय नागरिक मौके पर जुटने लगे। कार्रवाई को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर नगर निगम की कार्रवाई में समानता नहीं दिखाई दे रही है। उनका कहना था कि यदि सड़क और यातायात को सुचारु रखने के लिए अतिक्रमण हटाना जरूरी है तो कार्रवाई सभी अवैध कब्जों के खिलाफ एक समान तरीके से होनी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, जिस दुकान पर कार्रवाई की गई, वह मुख्य सड़क से काफी पीछे स्थित थी। लोगों का दावा है कि दुकान सड़क से लगभग 30 से 40 फीट पीछे थी और वहां से यातायात के आवागमन में किसी तरह की बड़ी बाधा नहीं हो रही थी। इसी बात को लेकर लोगों ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए।
‘गरीब की दुकान पर ही क्यों कार्रवाई।
मौके पर मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि सरोजिनी नायडू मार्ग पर कई स्थानों पर बड़े स्तर पर कब्जे और अस्थायी ढांचे मौजूद हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के बड़े कंटेनर और अन्य निर्माण लंबे समय से सड़क के आसपास दिखाई देते हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।
लोगों का सवाल है कि यदि नगर निगम का अभियान वास्तव में अतिक्रमण हटाने के लिए है तो फिर छोटे दुकानदारों के साथ-साथ बड़े और प्रभावशाली लोगों के कब्जों पर भी समान कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों ने आरोप लगाया कि गरीब और छोटे दुकानदारों को हटाना आसान समझकर कार्रवाई की जा रही है, जबकि प्रभावशाली लोगों के कब्जों को लेकर प्रशासन का रवैया अलग दिखाई देता है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और नगर निगम की ओर से इस विशेष कार्रवाई तथा लगाए गए भेदभाव के आरोपों पर आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। नगर निगम का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
महिला दुकानदार के सामने रोजी-रोटी का संकट।
कार्रवाई का सबसे अधिक असर उस महिला दुकानदार पर दिखाई दिया, जिसकी दुकान को तोड़े जाने का आरोप है। दुकान के ढहने और सामान जब्त होने के बाद उसके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा होने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, महिला छोटे स्तर पर दुकान चलाकर अपना और अपने परिवार का गुजारा करती थी।
लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी हो सकती है, लेकिन कार्रवाई के दौरान गरीब दुकानदारों के पुनर्वास, सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय और मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया कि यदि महिला को कुछ मिनट या निर्धारित समय देकर सामान हटाने का अवसर दिया जाता तो उसके सामान के नुकसान और जब्ती से बचा जा सकता था।
स्थानीय लोगों ने उठाए कई सवाल।
घटना के बाद स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं। लोगों का कहना है कि क्या नगर निगम की कार्रवाई से पहले संबंधित दुकानदार को पर्याप्त नोटिस दिया गया था? क्या दुकान को हटाने के लिए पहले कोई चेतावनी दी गई थी? यदि दुकान अतिक्रमण की श्रेणी में थी तो क्या दुकानदार को अपना सामान सुरक्षित रूप से हटाने का अवसर दिया गया?
इसके साथ ही स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि आसपास अन्य बड़े अतिक्रमण मौजूद हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई कब होगी? नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति या प्रभाव को देखकर नहीं, बल्कि नियमों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में नगर निगम के खिलाफ नाराजगी देखने को मिली। लोगों ने कहा कि अतिक्रमण हटाने के अभियान का उद्देश्य सड़क को अतिक्रमण मुक्त कर यातायात व्यवस्था बेहतर बनाना होना चाहिए। यदि अभियान के दौरान केवल छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई होती है और बड़े कब्जों को नजरअंदाज किया जाता है तो इससे लोगों में प्रशासन के प्रति असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की कि पूरे सरोजिनी नायडू मार्ग का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए और जहां भी अवैध अतिक्रमण पाया जाए, वहां नियमों के तहत समान कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि कार्रवाई में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल, जवाब का इंतजार।
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल नगर निगम की कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर है। क्या महिला दुकानदार को पर्याप्त समय और अवसर दिया गया था, क्या जब्त किए गए सामान की नियमानुसार कार्रवाई की गई और क्या सड़क पर मौजूद अन्य कथित अतिक्रमणों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी—इन सवालों के जवाब नगर निगम के आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेंगे।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर प्रशासन और आम जनता के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण मुक्त करना जरूरी है, लेकिन साथ ही छोटे दुकानदारों और गरीब परिवारों की आजीविका से जुड़े मानवीय पहलुओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

एजी ऑफिस गेट के पास हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर अतिक्रमण हटाओ अभियान के तौर-तरीकों और कार्रवाई में समानता को लेकर बहस छेड़ दी है। अब स्थानीय लोगों की नजर नगर निगम के अगले कदम और इस मामले में उसके आधिकारिक स्पष्टीकरण पर है।

प्रयागराज संवाददाता — आमिर मिर्जा की रिपोर्ट
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