NEET पेपर लीक आंदोलन पर पहली बार बोलीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, कहा- सरकार ने युवाओं की आवाज का किया सम्मान।

NEET पेपर लीक आंदोलन पर पहली बार बोलीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, कहा- सरकार ने युवाओं की आवाज का किया सम्मान।

नई दिल्ली। देशभर में नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों और युवाओं द्वारा किए गए लंबे आंदोलन के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का पहला विस्तृत बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार ने छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को कभी दबाने या रोकने का प्रयास नहीं किया। सरकार ने युवाओं की भावनाओं को समझते हुए उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया और नियमों के अनुरूप प्रदर्शन की अनुमति भी दी।

एक समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार में वित्त मंत्री ने कहा कि देश का युवा हमेशा से परिवर्तन का वाहक रहा है। जब भी व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी या अनियमितता सामने आती है, तब युवा वर्ग सबसे पहले अपनी आवाज बुलंद करता है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा का हिस्सा है और सरकार इसे सकारात्मक दृष्टि से देखती है।

युवा हमेशा बदलाव की ताकत रहे हैं।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि हर पीढ़ी के युवाओं में समाज और व्यवस्था को बेहतर बनाने की इच्छा होती है। युवाओं का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं होता, बल्कि वे व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस भावना को समझती है और उसका सम्मान करती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की सक्रिय भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी परीक्षा प्रणाली या सरकारी व्यवस्था को लेकर छात्रों के मन में सवाल उठते हैं तो उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। सरकार का दायित्व है कि वह उनकी बात सुने और उचित कार्रवाई करे।

जेएनयू के छात्र जीवन को किया याद।

वित्त मंत्री ने अपने छात्र जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पढ़ाई कर रही थीं, तब भी छात्र विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखते थे और सामाजिक बदलाव की मांग करते थे। उन्होंने कहा कि युवा स्वभाव से संवेदनशील होते हैं और समाज में मौजूद कमियों को दूर करने की इच्छा रखते हैं।

उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में उन्होंने भी महसूस किया था कि युवा वर्ग व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर कार्रवाई चाहता है। यही कारण है कि जब भी कोई बड़ा मुद्दा सामने आता है, तब युवा सबसे पहले प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की यही सोच देश के लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।

सरकार ने प्रदर्शन रोकने की कोशिश नहीं की।

निर्मला सीतारमण ने उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन को गंभीरता से नहीं लिया या उसे दबाने का प्रयास किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ।

उनके अनुसार, सरकार ने शुरुआत से ही छात्रों की भावनाओं को समझने का प्रयास किया। शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और सरकार ने किसी भी स्तर पर छात्रों के आंदोलन को रोकने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा कि जहां-जहां आवश्यक अनुमति की जरूरत थी, वहां नियमों के तहत प्रदर्शन की अनुमति दी गई।

युवाओं की भावनाओं का सम्मान जरूरी।

वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी सरकार के लिए युवाओं की भावनाओं को समझना बेहद आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि जब छात्र किसी मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरते हैं तो उनके पीछे एक चिंता और उम्मीद दोनों होती हैं। सरकार का प्रयास रहता है कि उनकी बात सुनी जाए और समस्याओं का समाधान निकाला जाए।

उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के साथ संवाद में विश्वास रखती है और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप उनकी बात सुनना अपनी जिम्मेदारी मानती है।

NEET पेपर लीक बना था बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा।

गौरतलब है कि नीट पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद देशभर के छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी। कई राज्यों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, दोषियों पर सख्त कार्रवाई तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस व्यवस्था की मांग की थी। इस मुद्दे पर विपक्ष ने भी केंद्र सरकार को घेरा था और संसद से लेकर सड़कों तक इस विषय पर बहस हुई थी।

इसी बीच छात्रों के आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का रूप ले लिया। कई छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने भी परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग का समर्थन किया। अब आंदोलन के बाद पहली बार वित्त मंत्री का विस्तृत बयान सामने आने से इस मुद्दे पर नई राजनीतिक और सामाजिक चर्चा शुरू हो गई है।

लोकतंत्र में संवाद सबसे अहम।

निर्मला सीतारमण ने अपने बयान के अंत में कहा कि लोकतंत्र में संवाद सबसे महत्वपूर्ण होता है। सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि हर वर्ग की बात सुनी जाए। उन्होंने दोहराया कि युवा देश का भविष्य हैं और उनकी सकारात्मक ऊर्जा तथा सुझावों का सम्मान किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हमेशा यही रहा है कि युवाओं को बेहतर अवसर मिलें, परीक्षा प्रणाली निष्पक्ष और पारदर्शी बने तथा छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सरकार इस अधिकार का सम्मान करती है।

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