क्रिकेट जगत को बड़ा झटका: महान ऑलराउंडर सर गारफील्ड सोबर्स का 89 वर्ष की आयु में निधन, 68 साल पुराना रिकॉर्ड आज भी अटूट।
स्पोर्ट्स डेस्क। क्रिकेट इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में शुमार वेस्टइंडीज के दिग्गज ऑलराउंडर सर गारफील्ड “गैरी” सोबर्स का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने बारबाडोस स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से विश्व क्रिकेट में शोक की लहर दौड़ गई है। क्रिकेट प्रेमी, पूर्व खिलाड़ी और विभिन्न क्रिकेट बोर्ड उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। महज दो सप्ताह बाद, 28 जुलाई 2026 को वह अपना 90वां जन्मदिन मनाने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही क्रिकेट जगत ने अपने सबसे महान सितारों में से एक को हमेशा के लिए खो दिया।
सर गारफील्ड सोबर्स अपने पीछे दो बेटे डेनियल और मैथ्यू तथा गोद ली हुई बेटी जिनीवी को छोड़ गए हैं। उनका पूरा जीवन क्रिकेट को समर्पित रहा और उन्होंने अपने खेल से करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी।
20 वर्षों तक वेस्टइंडीज की शान रहे सोबर्स।
सर गैरी सोबर्स ने वर्ष 1954 से 1974 तक वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने 93 टेस्ट मैच खेले और अपने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन से दुनिया भर के बल्लेबाजों और गेंदबाजों को प्रभावित किया। उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं। उनकी फील्डिंग भी इतनी शानदार थी कि उन्हें क्रिकेट इतिहास के सर्वश्रेष्ठ फील्डरों में भी गिना जाता है।
सोबर्स ऐसे खिलाड़ी थे, जो अकेले दम पर मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते थे। यही वजह थी कि उन्हें क्रिकेट इतिहास का सबसे संपूर्ण ऑलराउंडर माना जाता है।
डॉन ब्रैडमैन भी थे उनके प्रशंसक।
ऑस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन भी सर गैरी सोबर्स की प्रतिभा के कायल थे। ब्रैडमैन उन्हें “फाइव इन वन क्रिकेटर” कहा करते थे। इसका कारण यह था कि सोबर्स केवल बेहतरीन बल्लेबाज ही नहीं थे, बल्कि वे कई तरह की गेंदबाजी करने में भी माहिर थे।
वह बाएं हाथ से तेज गेंदबाजी कर सकते थे, बाएं हाथ से स्पिन गेंदबाजी करते थे और जरूरत पड़ने पर कलाई से स्पिन भी फेंक लेते थे। इतनी विविधता किसी एक खिलाड़ी में बेहद दुर्लभ मानी जाती है। उनकी इसी बहुमुखी प्रतिभा के कारण वेस्टइंडीज टीम को अतिरिक्त बल्लेबाज खिलाने का अवसर मिल जाता था, क्योंकि अकेले सोबर्स कई भूमिकाएं निभा लेते थे।
68 साल पुराना रिकॉर्ड आज भी कायम।
सर गैरी सोबर्स का एक ऐसा रिकॉर्ड है, जो करीब 68 वर्षों बाद भी अटूट बना हुआ है। उन्होंने वर्ष 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ किंग्स्टन टेस्ट में नाबाद 365 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी। यह पारी कई मायनों में ऐतिहासिक थी।
सबसे बड़ी बात यह रही कि यह उनके टेस्ट करियर का पहला शतक था और उन्होंने उसे सीधे तिहरे शतक में बदल दिया। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में आज तक कोई भी बल्लेबाज अपने पहले टेस्ट शतक को तिहरे शतक में नहीं बदल पाया है। यही कारण है कि यह उपलब्धि आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे अनोखे रिकॉर्डों में गिनी जाती है।
जब सर गैरी सोबर्स ने 365 रन की वह ऐतिहासिक पारी खेली थी, तब उनकी उम्र केवल 21 वर्ष और 213 दिन थी। इसी के साथ वह टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले दुनिया के सबसे युवा बल्लेबाज बन गए। इतने वर्षों बाद भी कोई बल्लेबाज इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ पाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक क्रिकेट के व्यस्त कार्यक्रम, तेज गति वाले खेल और बदलती रणनीतियों के कारण इस रिकॉर्ड का टूटना बेहद कठिन नजर आता है। यही वजह है कि सोबर्स का यह कीर्तिमान क्रिकेट इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।
ब्रायन लारा ने तोड़ा था सर्वोच्च स्कोर का रिकॉर्ड।
सर गैरी सोबर्स का 365 रन का व्यक्तिगत सर्वोच्च टेस्ट स्कोर लगभग 36 वर्षों तक विश्व रिकॉर्ड बना रहा। आखिरकार वर्ष 1994 में वेस्टइंडीज के ही महान बल्लेबाज ब्रायन लारा ने इंग्लैंड के खिलाफ 375 रन बनाकर यह रिकॉर्ड अपने नाम किया। हालांकि व्यक्तिगत सर्वोच्च स्कोर का रिकॉर्ड टूट गया, लेकिन सबसे कम उम्र में तिहरा शतक लगाने और पहले टेस्ट शतक को तिहरे शतक में बदलने का उनका रिकॉर्ड आज भी अटूट है।
सर गारफील्ड सोबर्स के निधन की खबर सामने आते ही दुनिया भर के क्रिकेट खिलाड़ियों, पूर्व कप्तानों, क्रिकेट बोर्डों और प्रशंसकों ने गहरा दुख व्यक्त किया। सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला लगातार जारी है। क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि सोबर्स केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि खेल भावना, अनुशासन और प्रतिभा के अद्भुत प्रतीक थे।
उनके योगदान ने आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। दुनिया भर के युवा ऑलराउंडर आज भी उनके खेल को आदर्श मानते हैं और उनकी उपलब्धियों से सीख लेते हैं।
हमेशा अमर रहेगा गैरी सोबर्स का नाम।

क्रिकेट इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहते बल्कि खेल की पहचान बन जाते हैं। सर गारफील्ड सोबर्स भी उन्हीं महान खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने अपने शानदार खेल, असाधारण प्रतिभा और विनम्र व्यक्तित्व से क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
आज भले ही सर गैरी सोबर्स हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके रिकॉर्ड, उनकी ऐतिहासिक पारियां और क्रिकेट के प्रति उनका समर्पण हमेशा याद किया जाएगा। क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में उनका नाम सदैव सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा। उनके निधन से विश्व क्रिकेट ने एक ऐसा सितारा खो दिया है, जिसकी भरपाई शायद कभी संभव नहीं हो सकेगी।
