बदायूँ: प्रशासन की सख्ती बेअसर, सड़क पर सूख रही मक्का बनी हादसे की वजह, दारानगर में स्कूल बस बिजली के खंभे से टकराई।
बदायूँ। जनपद में प्रशासन द्वारा लगातार चेतावनी और कार्रवाई किए जाने के बावजूद सड़कों पर मक्का सुखाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसका नतीजा अब सड़क हादसों के रूप में सामने आने लगा है। ताजा मामला बदायूँ जिले के ग्राम दारानगर का है, जहां सड़क पर फैली मक्का के कारण एक स्कूल बस अनियंत्रित होकर सड़क से उतर गई और बिजली के खंभे से जा टकराई। गनीमत रही कि बस में सवार सभी बच्चे, चालक और परिचालक सुरक्षित रहे तथा कोई जनहानि नहीं हुई। हालांकि यह घटना प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी और लोगों की लापरवाही का बड़ा उदाहरण बन गई है।

जानकारी के अनुसार, स्कूल बस रोज की तरह बच्चों को लेकर अपने निर्धारित मार्ग से गुजर रही थी। दारानगर के पास सड़क पर बड़ी मात्रा में मक्का फैलाई गई थी। मक्का के दानों की वजह से सड़क फिसलन भरी हो गई, जिससे बस चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। देखते ही देखते बस सड़क से नीचे उतर गई और बिजली के खंभे से टकरा गई। हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बस में बैठे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के बाद कुछ देर तक क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन कई बार सड़कों पर मक्का सुखाने पर रोक लगाने के निर्देश जारी कर चुका है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने अभियान चलाकर लोगों को चेतावनी भी दी थी कि सार्वजनिक सड़कों पर फसल फैलाना कानूनन गलत है और इससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद कई गांवों में लोग बेखौफ होकर मुख्य सड़कों और संपर्क मार्गों पर मक्का सुखा रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या केवल दारानगर तक सीमित नहीं है। जिले के कई ग्रामीण इलाकों में कटाई के बाद किसान सड़क को ही मक्का सुखाने का सबसे आसान साधन मान रहे हैं। इससे सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है और वाहन चालकों को निकलने में भारी परेशानी होती है। खासकर बाइक और स्कूटी सवार सबसे ज्यादा जोखिम उठाते हैं। मक्का के दानों पर टायर फिसलने से कई छोटे हादसे पहले भी हो चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क पर अनाज या मक्का सुखाना बेहद खतरनाक है। इससे वाहनों की पकड़ कमजोर हो जाती है और अचानक ब्रेक लगाने या मोड़ लेने पर वाहन असंतुलित हो सकता है। बरसात या नमी की स्थिति में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्कूल बस जैसे बड़े वाहनों के लिए भी ऐसी सड़कें दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।
दारानगर में हुई घटना ने यह साफ कर दिया है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। जिस बस में स्कूली बच्चे सवार हों, वहां जरा सी चूक भी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। सौभाग्य से इस बार कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन इसे चेतावनी के रूप में देखने की जरूरत है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क पर मक्का सुखाने वालों के खिलाफ जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही राजस्व, पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीमें नियमित निरीक्षण करें ताकि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक सड़क का दुरुपयोग न कर सके। लोगों का यह भी कहना है कि गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को वैकल्पिक स्थानों पर मक्का सुखाने के लिए प्रेरित किया जाए।
सड़कें आम जनता की सुविधा और सुरक्षित आवागमन के लिए होती हैं, न कि फसल सुखाने के लिए। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह अपने आदेशों का कड़ाई से पालन कराए, वहीं आम नागरिकों का भी कर्तव्य है कि वे नियमों का पालन करें और दूसरों की जान को जोखिम में न डालें।
दारानगर की यह घटना भले ही बिना जनहानि के समाप्त हो गई हो, लेकिन यह पूरे जिले के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि अब भी लापरवाही जारी रही, तो अगला हादसा कहीं अधिक भयावह हो सकता है। ऐसे में प्रशासन और आमजन दोनों को मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना होगा, ताकि सड़कें सुरक्षित रहें और भविष्य में किसी मासूम की जान खतरे में न पड़े।

JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।