IND vs ENG: चौथे टी20 में भारत की करारी हार, श्रेयस अय्यर ने अकेले संभाली पारी लेकिन गेंदबाज भी रहे बेअसर।
नई दिल्ली। इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज के चौथे मुकाबले में भारतीय टीम को एक और निराशाजनक हार का सामना करना पड़ा। ब्रिस्टल में खेले गए इस मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को 9 विकेट से हराकर सीरीज पर 3-0 की अजेय बढ़त बना ली। भारतीय टीम की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही विभागों में कमजोर प्रदर्शन देखने को मिला। हालांकि कप्तान श्रेयस अय्यर ने शानदार नाबाद 80 रन बनाकर अकेले मोर्चा संभाले रखा, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने भी मैच के बाद भारतीय टीम के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि कप्तान श्रेयस अय्यर को इस हार का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि उन्होंने अकेले संघर्ष किया जबकि बाकी बल्लेबाज पूरी तरह फ्लॉप साबित हुए।
अकेले श्रेयस ने दिखाई लड़ने की हिम्मत।
भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 158 रन बनाए। इस स्कोर में सबसे बड़ा योगदान कप्तान श्रेयस अय्यर का रहा, जिन्होंने 49 गेंदों में नाबाद 80 रन बनाए। उनकी इस पारी में धैर्य और आक्रामकता दोनों का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला।
आकाश चोपड़ा ने कहा कि यदि श्रेयस अय्यर के 80 रन निकाल दिए जाएं तो बाकी पूरी भारतीय टीम मिलकर सिर्फ 78 रन ही बना सकी। यह आंकड़ा साफ बताता है कि भारतीय बल्लेबाजी किस तरह पूरी तरह एक खिलाड़ी पर निर्भर रही।
उन्होंने कहा कि जब एक कप्तान इस तरह अकेले टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने की कोशिश करे, तो हार का दोष उसी के सिर मढ़ना उचित नहीं होगा। टीम के अन्य बल्लेबाजों को भी जिम्मेदारी लेनी होगी।
मध्यक्रम और निचला क्रम रहा पूरी तरह नाकाम।
भारतीय बल्लेबाजी की सबसे बड़ी कमजोरी साझेदारियों का अभाव रहा। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के बाद किसी भी बल्लेबाज ने श्रेयस अय्यर का लंबे समय तक साथ नहीं दिया। नतीजा यह रहा कि भारत 180 या उससे अधिक के स्कोर तक पहुंचने के बजाय 158 रन पर ही सिमट गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि टी20 क्रिकेट में केवल एक बल्लेबाज के दम पर मैच जीतना बेहद मुश्किल होता है। जब तक दूसरे छोर से सहयोग नहीं मिलता, बड़ा स्कोर खड़ा करना संभव नहीं होता।
अगर बल्लेबाजी कमजोर रही तो गेंदबाजी उससे भी अधिक निराशाजनक साबित हुई। जिस पिच पर भारतीय बल्लेबाज रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, उसी विकेट पर इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने बेहद आसानी से बल्लेबाजी की।
हैरी ब्रूक और फिल सॉल्ट ने भारतीय गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए नाबाद 146 रनों की साझेदारी कर इंग्लैंड को सिर्फ 13.5 ओवर में जीत दिला दी। इंग्लैंड ने 159 रनों का लक्ष्य केवल एक विकेट खोकर हासिल कर लिया।
गेंदबाजों की रणनीति पर उठे सवाल।
आकाश चोपड़ा ने कहा कि जिस विकेट पर भारतीय बल्लेबाज संघर्ष कर रहे थे, उसी पिच पर भारतीय गेंदबाज भी बिल्कुल असर नहीं छोड़ सके। न तो नई गेंद से दबाव बनाया गया और न ही बीच के ओवरों में विकेट निकालने की कोशिश सफल रही।
भारतीय गेंदबाज लगातार सही लाइन और लेंथ बनाए रखने में असफल रहे। इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने खराब गेंदों का पूरा फायदा उठाया और भारतीय टीम को मैच में वापसी का कोई अवसर नहीं दिया।
इस हार के बाद भारतीय टीम की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कप्तान श्रेयस अय्यर का व्यक्तिगत प्रदर्शन सराहनीय रहा, लेकिन बाकी बल्लेबाजों और गेंदबाजों के प्रदर्शन ने टीम की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।
अब टीम प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि अंतिम मुकाबले में बेहतर संयोजन के साथ मैदान पर उतरे और खिलाड़ियों का आत्मविश्वास वापस लौटाए।
श्रेयस पर नहीं, पूरी टीम पर जिम्मेदारी।
चौथे टी20 से इतना स्पष्ट हो गया कि हार का ठीकरा केवल कप्तान श्रेयस अय्यर के सिर फोड़ना उचित नहीं होगा। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाई, लेकिन क्रिकेट टीम गेम है और जीत के लिए सभी खिलाड़ियों का योगदान जरूरी होता है।

यदि भारत को भविष्य में ऐसी हार से बचना है तो बल्लेबाजी में साझेदारियां बनानी होंगी और गेंदबाजों को विपक्षी बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाने की कला फिर से हासिल करनी होगी। इंग्लैंड ने इस मुकाबले में हर विभाग में बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि भारत को अपनी कमजोरियों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।