उझानी में इंसानियत की मिसाल: मुस्लिम भाई ने निभाया कन्यादान का फर्ज, दीपिका की शादी बन गई बदायूं जिले में हिंदू-मुस्लिम एकता की।

उझानी में इंसानियत की मिसाल: मुस्लिम भाई ने निभाया कन्यादान का फर्ज, दीपिका की शादी बन गई बदायूं जिले में हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी पहचान

उझानी (बदायूं)। ऐसे समय में जब समाज में अक्सर धर्म और जाति के नाम पर दूरियां बढ़ने की खबरें सुर्खियां बनती हैं, वहीं बदायूं जिले के उझानी कस्बे से सामने आई एक प्रेरणादायक घटना ने इंसानियत, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की नई मिसाल पेश कर दी। यहां एक मुस्लिम युवक ने अपनी मुंहबोली हिंदू बहन की शादी न केवल पूरे रीति-रिवाज और सम्मान के साथ कराई, बल्कि कन्यादान की रस्म निभाकर यह साबित कर दिया कि रिश्ते खून से ही नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अपनत्व से भी बनते हैं।

उझानी के प्रतिष्ठित पहलवान बच्चन सिद्दीकी के तहेरे भाई रियासत हुसैन उर्फ बब्लू सिद्दीकी ने अपनी मुंहबोली बहन दीपिका (कुछ स्थानों पर दीपाली नाम से भी जानी जाती हैं) का विवाह नगर के प्रसिद्ध एसएस ग्रीन मैरिज हॉल में पूरे हर्षोल्लास और सम्मान के साथ संपन्न कराया। विवाह समारोह में सभी आवश्यक हिंदू रीति-रिवाजों का पालन किया गया और बब्लू सिद्दीकी ने स्वयं भाई बनकर कन्यादान की रस्म निभाई। विवाह के दौरान उन्होंने बारातियों और घरातियों के स्वागत-सत्कार में भी कोई कमी नहीं छोड़ी।

लॉकडाउन में शुरू हुआ भाई-बहन का रिश्ता

बातचीत के दौरान बब्लू सिद्दीकी ने बताया कि कोरोना लॉकडाउन के कठिन दौर में दीपिका की मां का निधन हो गया था। इससे पहले उनके पिता का भी देहांत हो चुका था। माता-पिता के साये के बिना दीपिका पूरी तरह अकेली पड़ गई थीं। उस कठिन समय में बब्लू सिद्दीकी ने आगे बढ़कर उन्हें अपनी बहन का दर्जा दिया और हर सुख-दुख में साथ निभाने का संकल्प लिया।

उन्होंने बताया कि समय के साथ यह रिश्ता और मजबूत होता गया। जब दीपिका के विवाह का समय आया तो उन्होंने एक सगे भाई की तरह सारी जिम्मेदारियां अपने कंधों पर उठाईं। शादी की तैयारियों से लेकर विवाह की प्रत्येक रस्म तक वह पूरे समय अपनी बहन के साथ खड़े रहे।

कन्यादान कर निभाया भाई का धर्म

विवाह समारोह में सबसे भावुक पल वह रहा जब बब्लू सिद्दीकी ने अपनी मुंहबोली बहन का कन्यादान किया। यह दृश्य वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर गया। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए किसी एहसान का काम नहीं, बल्कि एक भाई का फर्ज था।

बब्लू सिद्दीकी ने कहा, “मैंने सिर्फ अपना भाई होने का कर्तव्य निभाया है। दीपिका मेरी बहन है और उसके जीवन के हर सुख-दुख में मैं हमेशा उसके साथ खड़ा रहूंगा। रिश्तों की असली पहचान धर्म नहीं, बल्कि इंसानियत और विश्वास है।”

समाज को दिया भाईचारे का संदेश

इस अनूठी शादी की चर्चा अब पूरे उझानी ही नहीं, बल्कि बदायूं जिले में भी हो रही है। लोग बब्लू सिद्दीकी के इस कदम की खुले दिल से सराहना कर रहे हैं। सामाजिक संगठनों और नगरवासियों का कहना है कि यह घटना उन लोगों के लिए एक सकारात्मक संदेश है जो धर्म के आधार पर समाज को बांटने की कोशिश करते हैं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे उदाहरण समाज में आपसी प्रेम, विश्वास और सौहार्द को मजबूत करते हैं। शादी समारोह में शामिल लोगों ने कहा कि इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता और बब्लू सिद्दीकी ने इसे अपने व्यवहार से साबित कर दिया।

दिल की दौलत सबसे बड़ी

समाज में एक कहावत प्रचलित है कि “दौलत से कोई भी मालामाल हो सकता है, लेकिन दिल से मालामाल होना हर किसी के बस की बात नहीं।” उझानी के युवा बब्लू सिद्दीकी ने इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है। उन्होंने यह साबित किया कि किसी जरूरतमंद का सहारा बनना ही सबसे बड़ी इंसानियत है।

विवाह समारोह में मौजूद लोगों ने नवदंपति को शुभकामनाएं देते हुए बब्लू सिद्दीकी के इस कार्य को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उनका कहना था कि यदि हर व्यक्ति धर्म और जाति से ऊपर उठकर इंसानियत को प्राथमिकता दे, तो समाज में नफरत की जगह प्रेम और भाईचारे का माहौल और मजबूत होगा।

पूरे जिले में बनी चर्चा का विषय

दीपिका और कमलकांत का यह विवाह अब बदायूं जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस अनूठी पहल की सराहना कर रहे हैं। नगरवासियों का कहना है कि यह केवल एक शादी नहीं थी, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता, सामाजिक समरसता और मानवता का ऐसा संदेश था, जो लंबे समय तक लोगों के दिलों में याद रखा जाएगा।

उझानी की इस घटना ने यह संदेश दिया है कि रिश्तों की नींव धर्म या जाति पर नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, अपनापन और जिम्मेदारी पर टिकी होती है। बब्लू सिद्दीकी द्वारा निभाया गया भाई का यह फर्ज निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और समाज को यह याद दिलाएगा कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।

JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।

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