उझानी नगर पालिका में फर्जी मार्कशीट से पदोन्नति का मामला: लिपिक नफीस अहमद सैफी गिरफ्तार, न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुआ था मुकदमा।
उझानी (बदायूं) | जनपद न्यूज़ 24 यूपी | विशेष रिपोर्ट।
बदायूं जिले की उझानी नगर पालिका परिषद में फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र के आधार पर पदोन्नति हासिल करने के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पुलिस ने नगर पालिका परिषद में कार्यरत लिपिक नफीस अहमद सैफी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे नगर में मामले की व्यापक चर्चा है।
आरोप है कि नफीस अहमद सैफी ने फर्जी हाईस्कूल मार्कशीट के आधार पर चौकीदार के पद से लिपिक पद पर पदोन्नति प्राप्त की थी। जांच के दौरान संबंधित शैक्षणिक प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने के बाद उनके खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई की गई।

फर्जी मार्कशीट के आधार पर मिली थी पदोन्नति।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नफीस अहमद सैफी नगर पालिका परिषद उझानी में पहले चौकीदार के पद पर कार्यरत था। आरोप है कि उसने दयानंद इंटर कॉलेज, भरतोली, जनपद एटा के नाम से जारी हाईस्कूल की मार्कशीट प्रस्तुत कर विभागीय नियमों के तहत लिपिक पद पर पदोन्नति प्राप्त कर ली।
बाद में संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई गई तो प्रस्तुत की गई मार्कशीट फर्जी पाई गई। इसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया और कार्रवाई की मांग तेज हो गई।
समाजसेवी ने न्यायालय की ली शरण।
बताया जा रहा है कि इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर चर्चा का विषय बनी हुई थी। हालांकि आरोप है कि इसके बावजूद लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
इसके बाद समाजसेवी सिपट्टर सिंह ने मामले को न्यायालय में उठाया और वाद दायर किया। न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए। न्यायालय के आदेश के बाद संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया और जांच आगे बढ़ाई गई।
पुलिस द्वारा मामले की जांच पूरी करने के बाद आरोपी नफीस अहमद सैफी को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में उपलब्ध दस्तावेजों, जांच रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विधिक कार्रवाई की गई है। यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नगर में चर्चा का विषय बना मामला।
नगर पालिका के कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद पूरे उझानी नगर में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी या पदोन्नति प्राप्त की है, तो मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं, कई लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि यदि कथित फर्जीवाड़े की जानकारी पहले से थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई। हालांकि इस संबंध में संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
अन्य मामलों की भी हो सकती है जांच।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति या पदोन्नति प्राप्त करने की पुष्टि होती है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं तथा सरकारी सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती हैं कि कहीं इस प्रकार के अन्य मामले भी तो नहीं हैं। यदि ऐसे मामले सामने आते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।
पुलिस का कहना है कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में मुकदमा दर्ज कर विवेचना की गई। विवेचना में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की गिरफ्तारी की गई है। मामले की जांच अभी भी जारी है और यदि अन्य किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल आरोपी नफीस अहमद सैफी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। मामले में आगे की सुनवाई न्यायालय में होगी। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर लिया जाएगा।
नोट: यह समाचार उपलब्ध पुलिस कार्रवाई और न्यायालय के आदेश से संबंधित जानकारी पर आधारित है। मामले में आरोपों का अंतिम सत्यापन और दोष-निर्दोष का निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
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JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।