ताजमहल को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अहम सुनवाई: सर्वे और अंदरूनी हिस्सों के निरीक्षण की मांग पर केंद्र, यूपी सरकार व ASI से मांगा जवाब।

ताजमहल को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अहम सुनवाई: सर्वे और अंदरूनी हिस्सों के निरीक्षण की मांग पर केंद्र, यूपी सरकार व ASI से मांगा जवाब।

प्रयागराज/आगरा | जनपद न्यूज़ 24 यूपी | विशेष रिपोर्ट।

ताजमहल को लेकर लंबे समय से चल रही बहस एक बार फिर न्यायिक दायरे में पहुंच गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर एक महत्वपूर्ण याचिका पर सोमवार, 6 जुलाई को सुनवाई हुई, जिसमें ताजमहल परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराने, उसके अंदरूनी हिस्सों का निरीक्षण करने तथा तस्वीरें लेने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किए जाने की मांग की गई है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) तथा अन्य संबंधित पक्षों से जवाब तलब करते हुए उन्हें काउंटर एफिडेविट (प्रत्युत्तर शपथपत्र) दाखिल करने का निर्देश दिया है।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस स्तर पर मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है और न ही याचिका में किए गए दावों को सही या गलत माना है। अदालत ने फिलहाल सभी संबंधित पक्षों से उनका पक्ष प्रस्तुत करने को कहा है।

याचिका में क्या की गई है मांग?

याचिका में मांग की गई है कि ताजमहल परिसर का विस्तृत सर्वे कराया जाए। इसके साथ ही परिसर के अंदरूनी हिस्सों का निरीक्षण कर वहां की तस्वीरें लेने के लिए अदालत की निगरानी में एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया जाए।

याचिकाकर्ता का दावा है कि ताजमहल मूल रूप से भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर था, जिसे “तेजो महालय” के नाम से जाना जाता था। याचिका में कहा गया है कि इस दावे की सत्यता की जांच के लिए निष्पक्ष और वैज्ञानिक सर्वे कराया जाना आवश्यक है, ताकि ऐतिहासिक तथ्यों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

निचली अदालत के आदेश को दी गई चुनौती।

यह याचिका आगरा की निचली अदालतों के उन आदेशों को चुनौती देते हुए दायर की गई है, जिनमें विवादित परिसर के सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने से इनकार कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि विवाद से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो ऐतिहासिक और पुरातात्विक पहलुओं पर स्पष्टता आ सकती है। इसी आधार पर हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

अदालत ने फिलहाल क्या कहा?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने किसी भी दावे पर अपनी राय व्यक्त नहीं की। अदालत ने केवल इतना कहा कि संबंधित पक्ष अपना-अपना जवाब दाखिल करें। इसके बाद अगली सुनवाई में प्रस्तुत दस्तावेजों, अभिलेखों और कानूनी दलीलों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

इसका अर्थ यह है कि फिलहाल न तो सर्वे कराने का आदेश दिया गया है और न ही याचिका में किए गए दावों की पुष्टि हुई है। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।

ताजमहल को लेकर पहले भी उठते रहे हैं विवाद।

ताजमहल को लेकर समय-समय पर विभिन्न दावे और विवाद सामने आते रहे हैं। कुछ लोग इसे मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा निर्मित मकबरा मानते हैं, जबकि कुछ पक्ष ऐतिहासिक आधार पर अलग-अलग दावे करते रहे हैं। हालांकि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और अधिकांश इतिहासकार ताजमहल को मुगलकालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण मानते हैं।

इसी कारण ऐसे मामलों में न्यायालय तथ्यों, दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय लेने की प्रक्रिया अपनाता है।

सभी की नजर अगली सुनवाई पर।

हाईकोर्ट द्वारा केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और ASI से जवाब मांगे जाने के बाद अब इस मामले की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संबंधित पक्षों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अदालत आगे की प्रक्रिया तय करेगी।

यदि भविष्य में अदालत किसी प्रकार के सर्वे, निरीक्षण या अन्य जांच का आदेश देती है, तो उसका प्रभाव इस मामले की दिशा पर पड़ सकता है। फिलहाल न्यायालय ने केवल जवाब तलब किया है और किसी भी पक्ष के दावों को स्वीकार या अस्वीकार नहीं किया है।

न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान जरूरी।

यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में याचिका में किए गए दावे याचिकाकर्ता के दावे हैं, जिनकी पुष्टि न्यायालय द्वारा अभी नहीं की गई है। अंतिम निर्णय अदालत की आगामी सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।

जनपद न्यूज़ 24 यूपी अपने पाठकों से अपील करता है कि इस मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले न्यायालय के अंतिम फैसले की प्रतीक्षा करें और केवल प्रमाणित एवं आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।

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JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।

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