बरेली के आंवला में बड़ा फर्जीवाड़ा! जिंदा अच्छन मियां को कागजों में मृत दिखाकर तीन महिलाओं ने ली विधवा पेंशन, जांच के बाद मचा हड़कंप।
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद के आंवला क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक जीवित व्यक्ति को सरकारी अभिलेखों में मृत दर्शाकर वर्षों तक विधवा पेंशन का लाभ लिया जाता रहा। मामला तब उजागर हुआ जब संबंधित व्यक्ति, अच्छन मियां, स्वयं अधिकारियों के सामने पहुंच गए। इसके बाद पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई और सरकारी रिकॉर्ड की सत्यता पर भी सवाल उठने लगे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अच्छन मियां पूरी तरह जीवित हैं, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया था। इसी आधार पर उनकी पत्नी अन्नी बेगम कथित रूप से विधवा पेंशन प्राप्त कर रही थीं। इतना ही नहीं, आरोप है कि उनकी दो बेटियों – सुआलीन बी और शन्नो बी – ने भी दस्तावेजों में अच्छन मियां को अपना पति दर्शाकर विधवा पेंशन का लाभ लिया। यदि यह आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जाएगा।
बताया जा रहा है कि जब संबंधित विभाग द्वारा रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा था, उसी दौरान अच्छन मियां स्वयं सामने आ गए। उनके जीवित होने की पुष्टि के बाद अधिकारियों में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, उनके नाम को मतदाता सूची से हटाने तथा आधार से संबंधित रिकॉर्ड में भी आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन समय रहते सच्चाई सामने आ गई।
मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने संबंधित अभिलेखों और पेंशन स्वीकृति प्रक्रिया की जांच शुरू कर दी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि आखिर किन दस्तावेजों के आधार पर पेंशन स्वीकृत हुई और सत्यापन के दौरान इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। यदि जांच में फर्जी दस्तावेज, गलत जानकारी या किसी सरकारी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे मामले के बाद स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्टों में दावा किया गया है कि जांच के बाद संबंधित पक्ष प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है और राजनीतिक आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक पात्र व्यक्तियों तक पहुंचना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पेंशन या अन्य सरकारी सहायता प्राप्त करता है, तो इससे सरकारी धन का दुरुपयोग होता है और वास्तविक जरूरतमंद लोग अपने अधिकार से वंचित रह जाते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई आवश्यक है।
यह मामला एक बार फिर सरकारी रिकॉर्ड के सत्यापन तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है। यदि कोई जीवित व्यक्ति सरकारी कागजों में मृत दर्ज हो जाए, तो इससे न केवल उसकी पहचान और अधिकार प्रभावित होते हैं बल्कि कई महत्वपूर्ण सरकारी सेवाओं से भी वह वंचित हो सकता है। इसलिए समय-समय पर अभिलेखों का सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड की सटीकता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस स्तर पर गड़बड़ी हुई, किन लोगों की भूमिका रही और क्या वास्तव में फर्जी तरीके से विधवा पेंशन प्राप्त की गई। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ धन की वसूली के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

(नोट: यह समाचार उपलब्ध दावों और प्रारंभिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम प्रशासनिक जांच के बाद ही मानी जाएगी।)
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