जंतर-मंतर पर 11वें दिन भी जारी रहा CJP का धरना, भूख हड़ताल के तीसरे दिन सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का धरना मंगलवार को लगातार 11वें दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं, उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। अनशन के तीसरे दिन उनकी स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट सामने आने के बाद डॉक्टरों और समर्थकों ने उनकी स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है।

जानकारी के अनुसार, लगातार भूख हड़ताल पर रहने के कारण सोनम वांगचुक का ब्लड शुगर लेवल सामान्य से काफी नीचे गिरकर 66 पर पहुंच गया है। डॉक्टरों का कहना है कि यह स्तर सामान्य सीमा से कम है और लंबे समय तक इसी स्थिति में रहने पर स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। उनकी जांच के दौरान ब्लड प्रेशर 117/60, ऑक्सीजन लेवल 96 प्रतिशत और पल्स रेट 92 प्रति मिनट दर्ज की गई। हालांकि अन्य जीवनरक्षक संकेत फिलहाल स्थिर बताए जा रहे हैं, लेकिन ब्लड शुगर का लगातार गिरना चिंता का विषय माना जा रहा है।
धरना स्थल पर मौजूद चिकित्सक ने बताया कि दिल्ली की भीषण गर्मी में बिना भोजन और पर्याप्त तरल पदार्थ लिए लगातार अनशन करना शरीर के लिए बेहद कठिन होता है। उन्होंने कहा कि यदि लंबे समय तक ऐसी स्थिति बनी रहती है तो कमजोरी, चक्कर आना, बेहोशी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। डॉक्टरों ने वांगचुक के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी जारी रखी है।
इस पूरे घटनाक्रम पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाए और जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जाए ताकि उनकी जान को किसी प्रकार का खतरा न हो।
धरना स्थल पर मौजूद समर्थकों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। समर्थकों ने दावा किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन व्यक्त किया।
जंतर-मंतर लंबे समय से देश में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां समय-समय पर अलग-अलग संगठन अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे हैं। वर्तमान में जारी यह धरना भी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, खासकर सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत के कारण यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल शरीर की ऊर्जा प्रणाली पर सीधा प्रभाव डालती है। शरीर में ग्लूकोज की कमी होने से ब्लड शुगर तेजी से गिर सकता है, जिससे व्यक्ति को अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, बेहोशी और अन्य चिकित्सकीय समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सकीय निगरानी बेहद आवश्यक मानी जाती है।
फिलहाल धरना स्थल पर चिकित्सा टीम लगातार सोनम वांगचुक की निगरानी कर रही है। समर्थकों की ओर से भी उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े लोग सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं। हालांकि समाचार लिखे जाने तक आंदोलन जारी था और भूख हड़ताल समाप्त करने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी।
सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत के बीच अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत किस दिशा में बढ़ती है। यदि जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है तो स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और बढ़ सकती हैं। फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से जारी है और आंदोलनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं।
JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।