एनएच-30 पर अज्ञात वाहन की टक्कर से बछड़े की मौत, सूचना मिलते ही सक्रिय हुए गौ रक्षक और पुलिस, सम्मानपूर्वक कराया गया अंतिम संस्कार।

एनएच-30 पर अज्ञात वाहन की टक्कर से बछड़े की मौत, सूचना मिलते ही सक्रिय हुए गौ रक्षक और पुलिस, सम्मानपूर्वक कराया गया अंतिम संस्कार।

बरेली। फतेहगंज पूर्वी थाना क्षेत्र के तिसुआ चौराहे के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-30) पर शनिवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से एक बछड़ा गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना मिलने के बाद गौ रक्षक, पशु चिकित्सक और पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। घायल बछड़े को बचाने का हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन उपचार शुरू होने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस और गौ रक्षकों की मौजूदगी में पूरे सम्मान के साथ बछड़े का अंतिम संस्कार कराया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गौ रक्षक विकास ठाकुर, निवासी फरीदपुर तहसील, ने बताया कि उन्हें देर रात पत्रकार अनूप तिवारी द्वारा सूचना दी गई कि फतेहगंज पूर्वी थाना क्षेत्र के तिसुआ चौराहे के पास एनएच-30 पर एक बछड़ा सड़क दुर्घटना का शिकार होकर गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ा है। सूचना मिलते ही विकास ठाकुर बिना समय गंवाए पशु चिकित्सक के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए।

मौके पर पहुंचने पर देखा गया कि बछड़ा सड़क किनारे गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ा हुआ था। पशु चिकित्सक ने उसकी स्थिति का परीक्षण किया और उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन चोटें अत्यधिक गंभीर होने के कारण बछड़े ने कुछ ही देर में अंतिम सांस ले ली। इस घटना से मौके पर मौजूद लोगों में भी संवेदना का माहौल बन गया।

घटना की जानकारी तत्काल फतेहगंज पूर्वी के थाना प्रभारी निरीक्षक राजकुमार को दी गई। सूचना मिलते ही उन्होंने आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। कुछ ही समय में पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस टीम में हेड कांस्टेबल नीरज और दीवान गौतम राजपूत शामिल थे, जो जेसीबी मशीन के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस और गौ रक्षकों ने मिलकर पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ बछड़े का अंतिम संस्कार कराया।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हादसा किसी तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की टक्कर से हुआ। दुर्घटना के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। देर रात होने के कारण वाहन की पहचान नहीं हो सकी। स्थानीय लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज गति से दौड़ने वाले वाहनों के कारण अक्सर निराश्रित गोवंश दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। कई बार ऐसी घटनाओं में वाहन चालक बिना रुके मौके से निकल जाते हैं, जिससे घायल पशुओं को समय पर उपचार नहीं मिल पाता।

गौ रक्षक विकास ठाकुर ने कहा कि निराश्रित गोवंश की सुरक्षा समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही वह और उनकी टीम हमेशा मौके पर पहुंचकर घायल गोवंश की सहायता का प्रयास करती है। यदि पशु की जान नहीं बच पाती तो उसका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया जाता है, ताकि उसका उचित सम्मान बना रहे।

उन्होंने वाहन चालकों से भी अपील की कि विशेष रूप से रात के समय राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहन सावधानीपूर्वक चलाएं। सड़क पर अचानक पशु आ जाने की संभावना रहती है, इसलिए गति नियंत्रित रखने से दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मांग की है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास निराश्रित गोवंश की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि यदि गोवंश के लिए सुरक्षित आश्रय और नियमित निगरानी की व्यवस्था हो तो इस प्रकार की दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। साथ ही हाईवे पर चेतावनी संकेत और संवेदनशील स्थानों पर आवश्यक सुरक्षा उपाय भी किए जाने चाहिए।

घटना के दौरान पुलिस की तत्परता और गौ रक्षकों की सक्रियता की स्थानीय लोगों ने सराहना की। लोगों का कहना है कि सूचना मिलते ही संबंधित सभी लोग मौके पर पहुंचे और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए आवश्यक कार्रवाई की। इससे यह संदेश जाता है कि दुर्घटना के बाद भी मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन करना बेहद आवश्यक है।

यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा और निराश्रित पशुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन, स्थानीय निकायों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से ही ऐसी घटनाओं को कम किया जा सकता है। साथ ही वाहन चालकों को भी यातायात नियमों का पालन करते हुए सतर्कता के साथ वाहन चलाना चाहिए, ताकि मानव जीवन के साथ-साथ बेजुबान पशुओं की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।

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