15 साल की उम्र में 7 करोड़ की नेटवर्थ! वैभव सूर्यवंशी की सफलता के पीछे पिता का त्याग और मां का संघर्ष बना मिसाल।
पटना/समस्तीपुर। कहते हैं कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती और सफलता किसी बड़े शहर या अमीर परिवार की मोहताज नहीं होती। अगर इरादे मजबूत हों, मेहनत में ईमानदारी हो और परिवार का साथ मिले, तो छोटी सी शुरुआत भी एक दिन बड़ी मंजिल तक पहुंचा देती है। बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड के मोतीपुर गांव के 15 वर्षीय युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है।
महज 15 साल की उम्र में करोड़ों रुपये की नेटवर्थ, देश-दुनिया में पहचान और क्रिकेट जगत में तेजी से उभरते सितारे के रूप में वैभव का नाम आज हर किसी की जुबान पर है। लेकिन इस चमकदार सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष, माता-पिता का त्याग और पूरे परिवार का अटूट विश्वास छिपा हुआ है।
छोटे गांव से बड़े सपनों तक का सफर।
समस्तीपुर के ताजपुर प्रखंड के मोतीपुर गांव में जन्मे वैभव सूर्यवंशी ने बचपन से ही क्रिकेट के प्रति गहरी रुचि दिखाई। गांव की गलियों से शुरू हुआ उनका सफर आज राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों से समझौता नहीं किया।
वैभव की सफलता यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। यदि मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन मिले तो छोटे गांव का बेटा भी देश का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।
पिता ने बेच दी जमीन, ताकि बेटे का सपना पूरा हो सके।
वैभव की सफलता में सबसे बड़ा योगदान उनके पिता संजीव सूर्यवंशी का रहा है। संजीव स्वयं भी क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन उस समय बिहार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से पूर्ण मान्यता नहीं मिलने के कारण उनका सपना अधूरा रह गया।
जीवनयापन के लिए उन्होंने कई तरह के काम किए। कभी बंदरगाह पर मजदूरी की, तो कभी नाइट क्लब में बाउंसर की नौकरी भी की। बाद में वह अपने गांव लौट आए और परिवार की ज्वेलरी की दुकान संभालने लगे। लेकिन अपने बेटे के सपनों को कभी मरने नहीं दिया।
बेटे की क्रिकेट ट्रेनिंग, किट, टूर्नामेंट और यात्रा का खर्च उठाने के लिए उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन का एक हिस्सा तक बेच दिया। इतना ही नहीं, घर के पास ही कंक्रीट पिच और टर्फ विकेट वाला क्रिकेट नेट तैयार कराया, ताकि वैभव मैच जैसी परिस्थितियों में अभ्यास कर सकें।।
मां ने छोड़ी अपनी नींद, बेटे के सपनों को दिया सहारा।
जहां पिता आर्थिक रूप से बेटे का साथ दे रहे थे, वहीं मां ने अपने त्याग और समर्पण से इस सफर को आसान बनाया। वैभव की मां रोज सुबह करीब तीन बजे उठ जाती थीं, ताकि अभ्यास पर जाने से पहले बेटे के लिए भोजन तैयार कर सकें।
उन्होंने कभी अपने आराम की चिंता नहीं की। बेटे की सफलता ही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी बन गई। परिवार के इसी त्याग और समर्पण ने वैभव को मानसिक रूप से मजबूत बनाया।
महज 15 साल में करोड़पति बने वैभव।
बाएं हाथ के बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी आज क्रिकेट जगत का उभरता हुआ नाम हैं। विभिन्न क्रिकेट प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन, आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट और ब्रांड एंडोर्समेंट्स के चलते उनकी अनुमानित नेटवर्थ करीब 7 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पुश्तैनी घर का भी नवीनीकरण किया गया है। अब उनका घर आकर्षक गुलाबी रंग में दिखाई देता है और इसकी अनुमानित कीमत 40 से 60 लाख रुपये के बीच मानी जाती है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने वैभव।
वैभव सूर्यवंशी की कहानी केवल क्रिकेट में सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, परिवार के त्याग और अटूट विश्वास की मिसाल भी है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर मेहनत सच्ची हो, लक्ष्य स्पष्ट हो और परिवार का साथ मिले तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।

आज वैभव हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी सफलता हर उस परिवार के लिए उम्मीद की किरण है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों के सपनों को उड़ान देना चाहता है। वैभव की उपलब्धि यह संदेश देती है कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जो कठिनाइयों से घबराते नहीं, बल्कि उन्हें अपनी ताकत बना लेते हैं।
JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।