अद्भुत इंजीनियरिंग का कमाल: बिना तोड़े 18 हजार वर्गफीट का भवन 3 फीट ऊंचा उठाया, 90 दिन में पूरा हुआ चुनौतीपूर्ण काम।
जैसलमेर। तकनीक और आधुनिक इंजीनियरिंग के इस दौर में अब वह काम भी संभव हो रहे हैं, जिन्हें कभी असंभव माना जाता था। राजस्थान के जैसलमेर जिले के प्रसिद्ध धार्मिक कस्बे रामदेवरा में इंजीनियरों ने ऐसा ही एक अनोखा और हैरतअंगेज कारनामा कर दिखाया है। यहां लगभग 18 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल में बने एक विशाल निजी भवन परिसर को बिना तोड़े और बिना किसी बड़े नुकसान के करीब 3 फीट तक ऊंचा उठाया गया है। यह कार्य न केवल तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण था, बल्कि इंजीनियरिंग कौशल और टीमवर्क की एक शानदार मिसाल भी बन गया है।
जानकारी के अनुसार रामदेवरा स्थित इस भवन परिसर में बरसात के दिनों में जलभराव की गंभीर समस्या बनी रहती थी। भवन का स्तर आसपास की सड़क और भूमि के मुकाबले नीचे होने के कारण बारिश का पानी परिसर में भर जाता था, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। कई बार स्थिति इतनी खराब हो जाती थी कि भवन परिसर में प्रवेश करना भी मुश्किल हो जाता था।
भवन मालिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि यदि पूरे भवन को तोड़कर दोबारा निर्माण कराया जाता तो इसमें करोड़ों रुपये का खर्च आता और काफी समय भी लगता। ऐसे में उन्होंने हरियाणा के अनुभवी इंजीनियर प्रवीण कुमार से संपर्क किया और भवन को बिना तोड़े ऊंचा उठाने की संभावनाओं पर चर्चा की।
इंजीनियर प्रवीण कुमार ने अपनी टीम के साथ रामदेवरा पहुंचकर भवन का विस्तृत निरीक्षण किया। तकनीकी अध्ययन और मुआयना करने के बाद उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण कार्य को स्वीकार कर लिया। इसके बाद भवन को लगभग 3 फीट ऊंचा उठाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू किया गया।
इस विशेष परियोजना के लिए हरियाणा से 80 से अधिक इंजीनियरों और श्रमिकों की टीम रामदेवरा पहुंची। टीम ने अत्याधुनिक तकनीकों और विशेष हाइड्रोलिक जैक सिस्टम की मदद से पूरे भवन को एक समान स्तर पर उठाने की प्रक्रिया शुरू की। यह कार्य बेहद सावधानी और सटीकता की मांग करता था, क्योंकि जरा सी चूक से भवन की संरचना को नुकसान पहुंच सकता था।
इंजीनियरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि पूरे भवन को बिना किसी दरार या क्षति के सुरक्षित तरीके से ऊपर उठाया जाए। इसके लिए भवन के विभिन्न हिस्सों में विशेष सपोर्ट सिस्टम लगाए गए और चरणबद्ध तरीके से उसे ऊपर उठाया गया। हर स्तर पर इंजीनियर लगातार निगरानी करते रहे ताकि भवन का संतुलन बना रहे।
बताया जा रहा है कि इस परियोजना को रिकॉर्ड 90 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लगातार मेहनत, बेहतर योजना और तकनीकी दक्षता के दम पर टीम ने निर्धारित समय सीमा के भीतर इस लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया। भवन को लगभग 3 फीट ऊंचा उठाने के बाद उसके नीचे नई संरचना और मजबूत आधार तैयार किया गया, जिससे भविष्य में जलभराव की समस्या से स्थायी समाधान मिल सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहली बार किसी पूरे भवन को बिना तोड़े इस तरह ऊपर उठते देखा है। यह दृश्य अपने आप में आश्चर्यजनक था और क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इंजीनियरों की इस उपलब्धि की जमकर सराहना कर रहे हैं।
इंजीनियर प्रवीण कुमार ने बताया कि यह काम आसान नहीं था, लेकिन उनकी टीम ने हौसले, मेहनत और तकनीकी अनुभव के दम पर इस चुनौती को स्वीकार किया और सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि आधुनिक इंजीनियरिंग में अब ऐसी तकनीकें उपलब्ध हैं जिनकी मदद से बड़े-बड़े भवनों को बिना नुकसान पहुंचाए ऊंचा उठाया जा सकता है।

रामदेवरा में संपन्न हुआ यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग जगत के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है। इस सफलता ने साबित कर दिया है कि यदि तकनीक, अनुभव और मजबूत इच्छाशक्ति का सही मेल हो तो असंभव दिखने वाले कार्य भी संभव बनाए जा सकते हैं। यह परियोजना आने वाले समय में देशभर में इसी तरह की समस्याओं के समाधान के लिए एक मॉडल के रूप में देखी जा सकती है।
JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।