बरेली-मथुरा नेशनल हाईवे का चौड़ीकरण बना मुसीबत, बरेली से उझानी तक सफर हुआ जोखिम भरा।

बरेली-मथुरा नेशनल हाईवे का चौड़ीकरण बना मुसीबत, बरेली से उझानी तक सफर हुआ जोखिम भरा।

बदायूं। बरेली-मथुरा नेशनल हाईवे पर चल रहे चौड़ीकरण कार्य ने यात्रियों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। विकास और बेहतर यातायात व्यवस्था के उद्देश्य से शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट फिलहाल आम लोगों के लिए मुसीबत का कारण बनता जा रहा है। बरेली से उझानी तक करीब एक घंटे में पूरा होने वाला सफर अब दो से तीन घंटे तक खिंच रहा है। जगह-जगह बनाए गए डायवर्जन, अधूरी सर्विस लेन, सड़क पर फैली मिट्टी और गिट्टी तथा सुरक्षा इंतजामों की कमी के कारण यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार हाईवे चौड़ीकरण के चलते बरेली से उझानी के बीच 12 से अधिक स्थानों पर डायवर्जन बनाए गए हैं। इन डायवर्जनों पर पर्याप्त सुरक्षा संकेतक, रिफ्लेक्टर, बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। रात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब वाहन चालक सही मार्ग का अंदाजा नहीं लगा पाते और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार वाहन चालक अचानक डायवर्जन आने से संतुलन खो बैठते हैं, जिससे हादसे होते हैं और लोग चोटिल हो जाते हैं।

हाईवे पर कई स्थानों पर सड़क निर्माण के लिए डाली गई मिट्टी और गिट्टी भी परेशानी का बड़ा कारण बनी हुई है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग बेहद जोखिम भरा हो गया है। सड़क पर बिखरी गिट्टी के कारण बाइक और स्कूटी फिसलने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। रोजाना हजारों लोग इस मार्ग से आवागमन करते हैं, जिनमें नौकरीपेशा लोग, छात्र, व्यापारी और ग्रामीण क्षेत्र के निवासी शामिल हैं। ऐसे में खराब यातायात व्यवस्था लोगों की दिनचर्या को भी प्रभावित कर रही है।

कई स्थानों पर निर्माण कार्य के कारण एक ही लेन पर दोनों दिशाओं का ट्रैफिक संचालित किया जा रहा है। इससे वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और घंटों तक जाम की स्थिति बनी रहती है। सुबह और शाम के व्यस्त समय में समस्या और अधिक बढ़ जाती है। कई बार एंबुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं के वाहन भी जाम में फंस जाते हैं, जिससे लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निर्माण एजेंसी द्वारा कार्य तो किया जा रहा है, लेकिन सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा। जहां-जहां सड़क खोदी गई है या डायवर्जन बनाया गया है, वहां पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और चेतावनी संकेत नहीं हैं। इससे रात में सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। कई जगहों पर सड़क की ऊंचाई और डायवर्जन की सतह में अंतर होने से वाहन उछल जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

व्यापारियों और नियमित यात्रियों का कहना है कि पहले बरेली से उझानी तक का सफर लगभग एक घंटे में पूरा हो जाता था, लेकिन अब दो से तीन घंटे तक लग रहे हैं। इससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है। ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि वाहनों की आवाजाही धीमी हो गई है और समय पर माल पहुंचाने में कठिनाई हो रही है।

क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से मांग की है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। डायवर्जन स्थलों पर पर्याप्त बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही जहां संभव हो, अधूरी सर्विस लेन को जल्द पूरा कराया जाए ताकि मुख्य मार्ग पर यातायात का दबाव कम हो सके।

लोगों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन निर्माण कार्य के दौरान यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ सकती है और लोगों की परेशानियां और अधिक गंभीर हो सकती हैं।

फिलहाल बरेली-मथुरा नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। वाहन चालकों को गति नियंत्रित रखने, डायवर्जन पर सावधानी बरतने और यातायात नियमों का पालन करने की सलाह दी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। वहीं क्षेत्रीय नागरिकों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग जल्द ही इस समस्या का समाधान करेगा और हाईवे पर सुरक्षित एवं सुगम यातायात व्यवस्था बहाल होगी।

JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।

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