20 साल की उम्र में खुद को बताया ब्रिगेडियर, कार पर लगवाया सेना का झंडा और स्टार, आखिरकार खुल गई पोल।
शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां महज 20 वर्षीय युवक ने खुद को भारतीय सेना का ब्रिगेडियर बताकर लोगों को लंबे समय तक भ्रमित करने की कोशिश की। युवक ने न केवल सेना के वरिष्ठ अधिकारी होने का दावा किया, बल्कि अपनी पहचान को वास्तविक दिखाने के लिए कार किराए पर ली, उस पर सेना से जुड़े प्रतीक चिह्न और स्टार लगवाए, यहां तक कि दो बाउंसर भी साथ रख लिए। लेकिन उसकी यह कहानी ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकी और आखिरकार दो रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों की सतर्कता से उसका भंडाफोड़ हो गया।

जानकारी के अनुसार शाहजहांपुर निवासी पवन नामक युवक ने अपने परिवार और आसपास के लोगों को बताया कि उसका चयन भारतीय सेना में हुआ है और वह ब्रिगेडियर के पद पर तैनात है। युवक के इस दावे पर परिवार ने भी भरोसा कर लिया। बताया जा रहा है कि पवन ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) की तैयारी की थी, लेकिन दो बार परीक्षा में सफल नहीं हो सका। इसके बावजूद उसने अपने परिजनों और परिचितों के बीच खुद को एक उच्च सैन्य अधिकारी के रूप में प्रस्तुत करना शुरू कर दिया।
आरोप है कि युवक ने अपनी झूठी पहचान को मजबूत करने के लिए एक कार किराए पर ली और उस पर सेना से जुड़े प्रतीक, झंडा और स्टार लगवा दिए। इसके बाद वह शहर में उसी वाहन से घूमने लगा। उसके साथ दो बाउंसर भी रहते थे, जिससे लोगों को उसकी बातों पर विश्वास होने लगा। कई स्थानों पर लोग उसे सैन्य अधिकारी समझकर सम्मान भी देते थे और कुछ लोग तो उसे सैल्यूट तक करते थे।
हालांकि उसकी कहानी में कई ऐसी बातें थीं, जिन पर सैन्य पृष्ठभूमि रखने वाले लोगों को संदेह होने लगा। बताया जाता है कि शाहजहांपुर में रहने वाले दो रिटायर्ड सेना अधिकारियों की नजर जब युवक पर पड़ी तो उन्हें उसकी उम्र और पद को लेकर शक हुआ। दरअसल भारतीय सेना में ब्रिगेडियर का पद बेहद वरिष्ठ रैंक माना जाता है और वहां तक पहुंचने के लिए वर्षों की सेवा और अनुभव की आवश्यकता होती है। सामान्य परिस्थितियों में इतनी कम उम्र में किसी व्यक्ति का ब्रिगेडियर बनना संभव नहीं है।
रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों ने युवक से बातचीत की और उसके दावों की जांच-पड़ताल शुरू की। पूछताछ के दौरान युवक के जवाबों में कई विरोधाभास सामने आए। इसके बाद संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों को सूचना दी गई। जांच में पता चला कि युवक का भारतीय सेना से कोई संबंध नहीं है और वह झूठी पहचान के सहारे लोगों को गुमराह कर रहा था।
मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी चर्चा का माहौल बन गया। लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था कि इतनी कम उम्र का युवक इस तरह का झूठा दावा कर सकता है और इतने लोगों को भ्रमित कर सकता है। कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर परिवार ने बिना किसी आधिकारिक प्रमाण के युवक की बातों पर कैसे भरोसा कर लिया।
बताया जा रहा है कि युवक के पिता सरकारी विभाग में बागवानी निरीक्षक हैं, जबकि उसकी मां सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। परिवार शिक्षित होने के बावजूद बेटे के दावों पर विश्वास कर बैठा। मामले के उजागर होने के बाद परिवार भी असहज स्थिति में आ गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सेना जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम और पदों का गलत इस्तेमाल न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि इससे समाज में भ्रम की स्थिति भी पैदा होती है। ऐसे मामलों में संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि युवक ने केवल लोगों को प्रभावित करने के लिए यह झूठ बोला था या इसके पीछे कोई अन्य उद्देश्य भी था। वहीं यह घटना सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

यह मामला एक बार फिर यह संदेश देता है कि किसी भी व्यक्ति के दावों पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय तथ्यों की जांच करना जरूरी है। वरना कभी-कभी एक झूठ इतनी दूर तक पहुंच जाता है कि उसकी सच्चाई सामने आने पर हर कोई हैरान रह जाता है।
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JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।