विकास” के नाम पर उझानी बेहाल: जल निगम की खुदाई से सड़कें बनीं मौत का रास्ता, धूल और गड्ढों में फंसी जनता।

“विकास” के नाम पर उझानी बेहाल: जल निगम की खुदाई से सड़कें बनीं मौत का रास्ता, धूल और गड्ढों में फंसी जनता

उझानी (बदायूं)। शहर में जल निगम की ओर से डाली जा रही पाइपलाइन अब लोगों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि मुसीबत का दूसरा नाम बनती जा रही है। “विकास होगा” के दावे के साथ शुरू हुआ पाइपलाइन प्रोजेक्ट अब उझानी शहर के लिए धूल, गड्ढों और हादसों की बड़ी वजह बन चुका है। कछला रोड से लेकर साहूकारा, गौतमपुरी, घंटाघर चौराहा, पंखा रोड और पुरानी अनाज मंडी तक शायद ही कोई ऐसी सड़क बची हो जहां खुदाई के बाद हालात सामान्य हों। जगह-जगह सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं, मिट्टी के ढेर लगे हैं और लोगों की जिंदगी रोज जोखिम में गुजर रही है।

शहरवासियों का कहना है कि पाइपलाइन डालने के नाम पर सड़कें तोड़ दी गईं, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उन्हें ठीक नहीं कराया गया। सुबह से शाम तक उड़ती धूल ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। हालात इतने खराब हैं कि दोपहिया वाहन चालकों को सड़क पर निकलना खतरे से खाली नहीं लग रहा। कई स्थानों पर बाइक और स्कूटी सवार फिसलकर घायल हो चुके हैं, जबकि पैदल चलने वाले लोग भी मिट्टी और गड्ढों से परेशान हैं।

धूल का गुबार बना बीमारी की वजह।

उझानी के कई मोहल्लों में दिनभर उड़ती धूल अब लोगों के स्वास्थ्य पर असर डालने लगी है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि दुकानों में सामान से ज्यादा धूल जमा हो रही है। दुकानदारों को मजबूरी में आधे शटर गिराकर बैठना पड़ रहा है। राहगीरों को मुंह पर कपड़ा बांधकर निकलना पड़ रहा है।

घंटाघर और पंखा रोड क्षेत्र के लोगों ने बताया कि जब कोई बड़ा वाहन गुजरता है तो उसके पीछे धूल का इतना बड़ा गुबार उठता है कि कुछ सेकंड तक सामने का रास्ता दिखाई नहीं देता। बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान हैं। कई लोगों को खांसी, सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन की शिकायत होने लगी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि “पानी आए न आए, लेकिन बीमारी जरूर आ जाएगी।” लोगों ने आरोप लगाया कि जल निगम ने पाइपलाइन डालने के बाद सड़क की मरम्मत की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया।

हर दिन हो रहे हादसे।

खुदाई के बाद छोड़े गए गड्ढे और मिट्टी के ढेर अब दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। बदायूं रोड पर हाल ही में एक छात्रा साइकिल समेत मिट्टी में धंस गई, जिससे वह घायल हो गई। स्थानीय लोगों ने उसे बाहर निकाला। इसके अलावा कई बाइक सवार रोजाना फिसलकर चोटिल हो रहे हैं।

लोगों का कहना है कि सड़कें अब सड़क कम और युद्ध क्षेत्र ज्यादा दिखाई देने लगी हैं। बारिश से पहले ही हालात इतने खराब हैं, तो मानसून में स्थिति और भयावह होने की आशंका जताई जा रही है। नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द सड़कें दुरुस्त नहीं हुईं तो बड़े हादसे हो सकते हैं।

बारिश में “कीचड़ ताल” बनने का खतरा।

शहरवासियों को अब बारिश का डर सताने लगा है। लोगों का कहना है कि अभी तो धूल उड़ रही है, लेकिन बारिश शुरू होते ही यही सड़कें दलदल में बदल जाएंगी। स्कूल जाने वाले बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

रिक्शा चालकों ने भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि टूटी और कीचड़ भरी सड़कों पर रिक्शा चलाना मुश्किल हो जाएगा। कई रिक्शा चालकों ने कहा कि अगर जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो वे इन रास्तों पर सवारी ले जाना बंद कर देंगे।

व्यापारियों और नागरिकों में भारी आक्रोश।

साहूकारा और पुरानी अनाज मंडी क्षेत्र के व्यापारियों ने जल निगम और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। व्यापारियों का कहना है कि जिस तेजी से सड़कें खोदी गईं, उसी तेजी से उन्हें दोबारा ठीक क्यों नहीं किया जा रहा। लोगों ने आरोप लगाया कि काम अधूरा छोड़ दिया गया है और जनता को परेशानी में डाल दिया गया है।

स्थानीय नागरिकों ने कहा कि नगर पालिका और जल निगम दोनों जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं। एक तरफ जल निगम “समय से काम पूरा होने” की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर नगर पालिका इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बता रही है। इस खींचतान का खामियाजा आम जनता भुगत रही है।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग।

उझानी के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पाइपलाइन कार्य के बाद सड़कों की मरम्मत जल्द कराई जाए। साथ ही उड़ती धूल को रोकने के लिए नियमित पानी का छिड़काव कराया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्य जनता की सुविधा के लिए होते हैं, लेकिन यदि वही काम लोगों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बन जाए तो उस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। उझानी की जनता अब यही सवाल पूछ रही है कि आखिर “विकास” के नाम पर उन्हें कब तक धूल और गड्ढों का दर्द झेलना पड़ेगा।

JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।

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