भीषण गर्मी में प्यासा बदायूं! जगह-जगह बंद पड़े शीतल जल फ्रीजर, जनता बोली – “सिर्फ दिखावे के लिए लगाए गए हैं मशीन”
50 फीसदी से ज्यादा वाटर फ्रीजर खराब, राहगीर और आमजन बूंद-बूंद पानी को तरस रहे।

Badaun जिले में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी पीने के ठंडे पानी की हो रही है। नगर पालिका और प्रशासन की ओर से शहर और कस्बों में लगाए गए शीतल जल प्याऊ और वाटर फ्रीजर अधिकतर जगहों पर बंद पड़े हैं। हालात यह हैं कि जिन मशीनों को जनता की सुविधा के लिए लगाया गया था, वे अब सिर्फ शोपीस बनकर रह गई हैं।
जिले के कई प्रमुख चौराहों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे फ्रीजर या तो खराब पड़े हैं या फिर उनमें पानी की सप्लाई ही नहीं है। गर्मी का पारा लगातार बढ़ रहा है और दूसरी तरफ लोगों को ठंडा पानी तक नसीब नहीं हो पा रहा। इससे आमजन में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
रूपापुर चौराहे की तस्वीर ने खोली व्यवस्था की पोल।
ताजा मामला Badaun जनपद के उझानी थाना क्षेत्र स्थित ककराला रोड के रूपापुर चौराहे का है, जहां जनसुविधा के लिए लगाया गया शीतल जल प्याऊ महीनों से बंद पड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मशीन लगने के बाद आज तक ठीक तरीके से चालू नहीं हो सकी।
भीषण गर्मी में राहगीरों, मजदूरों, रिक्शा चालकों और स्थानीय लोगों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने केवल मशीन लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली, लेकिन उसके संचालन और रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
जिलेभर में यही हाल, 50 प्रतिशत से ज्यादा फ्रीजर खराब।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक जिले में लगाए गए लगभग 50 फीसदी से ज्यादा वाटर फ्रीजर खराब पड़े हैं। शहर से लेकर कस्बों तक कई प्रमुख स्थानों पर शीतल जल व्यवस्था पूरी तरह ठप है।
उझानी क्षेत्र में बड़ा बाईपास, जैन मंदिर, कछला नाका चौकी सहित कई जगहों पर लगे फ्रीजर बंद पड़े हैं। कई मशीनों में बिजली कनेक्शन नहीं है तो कहीं मोटर खराब हो चुकी है। कुछ जगहों पर पाइपलाइन की समस्या के कारण पानी नहीं पहुंच रहा।
लोगों का कहना है कि हर साल गर्मियों में लाखों रुपये खर्च कर शीतल जल प्याऊ लगाए जाते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में यह मशीनें खराब होकर बंद हो जाती हैं और फिर उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता।
भीषण गर्मी में बढ़ी लोगों की परेशानी।
इस समय जिले में तापमान लगातार 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है। दोपहर के समय सड़कों पर चलना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में राहगीरों को सबसे ज्यादा जरूरत पीने के ठंडे पानी की होती है।
बस स्टैंड, बाजार, अस्पताल, सरकारी दफ्तर और चौराहों पर प्रतिदिन हजारों लोग गुजरते हैं। लेकिन पानी की उचित व्यवस्था न होने के कारण उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
रिक्शा चालक, दिहाड़ी मजदूर और गरीब तबके के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि वे महंगे बोतलबंद पानी खरीदने में सक्षम नहीं हैं।
“सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए लगते हैं फ्रीजर”
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पालिका और प्रशासन केवल दिखावे के लिए शीतल जल फ्रीजर लगवा देता है। उद्घाटन और फोटो सेशन के बाद इन मशीनों की कोई देखरेख नहीं होती।
लोगों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी कभी इन मशीनों की स्थिति जांचने तक नहीं आते। कई जगहों पर महीनों से मशीनें खराब पड़ी हैं लेकिन मरम्मत तक नहीं कराई गई।
स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन मशीनों की मरम्मत कर दी जाए तो हजारों लोगों को राहत मिल सकती है।
नगर पालिका और प्रशासन पर उठ रहे सवाल।
जिलेभर में बंद पड़े फ्रीजरों को लेकर अब नगर पालिका और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जब सरकार जनता को गर्मी से राहत देने के लिए योजनाएं चला रही है तो जमीनी स्तर पर उनका लाभ क्यों नहीं मिल पा रहा।
कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से मांग की है कि जिले के सभी बंद पड़े शीतल जल फ्रीजरों का सर्वे कराया जाए और तत्काल उन्हें चालू कराया जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की योजनाएं यदि रखरखाव के अभाव में बेकार हो जाएं तो इसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है।
पानी की समस्या बन सकती है गंभीर संकट।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ी तो पीने के पानी की समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर शीतल जल व्यवस्था का सुचारु रूप से चलना बेहद जरूरी है।
डॉक्टरों के अनुसार तेज गर्मी में शरीर में पानी की कमी होने से डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और चक्कर आने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर ज्यादा होता है।
इसीलिए प्रशासन द्वारा लगाए गए वाटर फ्रीजर और प्याऊ आम जनता के लिए बेहद जरूरी सुविधा माने जाते हैं।
जनता ने उठाई तत्काल कार्रवाई की मांग।
उझानी और बदायूं के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी खराब पड़े शीतल जल फ्रीजरों को तत्काल ठीक कराया जाए। साथ ही नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी बनाई जाए ताकि मशीनें दोबारा खराब होने पर तुरंत मरम्मत कराई जा सके।
लोगों ने यह भी मांग की कि गर्मी के मौसम में प्रमुख बाजारों, बस स्टैंडों और चौराहों पर अस्थायी प्याऊ की व्यवस्था भी शुरू की जाए ताकि राहगीरों को राहत मिल सके।
सोशल मीडिया पर भी उठ रहा मुद्दा।
बंद पड़े फ्रीजरों की तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग प्रशासन से सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर जनता की सुविधा के लिए लगाए गए उपकरण काम क्यों नहीं कर रहे।
कई लोगों ने इसे सरकारी लापरवाही बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
क्या प्रशासन जागेगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रशासन और नगर पालिका इस समस्या पर कब ध्यान देंगे। भीषण गर्मी के बीच यदि लोगों को पीने का साफ और ठंडा पानी भी उपलब्ध न हो सके तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
जिले की जनता को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द कार्रवाई करेगा और बंद पड़े शीतल जल फ्रीजरों को दोबारा चालू कराया जाएगा, ताकि गर्मी से परेशान लोगों को कुछ राहत मिल सके।
JANPADNEWS24UP संपादक नवीन गोस्वामी।